अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को भाजपा-आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की व्यवस्था को नियंत्रित करने वाले लोगों के एक समूह ने यह मान लिया है कि वे देश के 150 करोड़ लोगों का सच जानते हैं और इसी मानसिकता के तहत हर दिन छात्रों पर हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत में यही वैचारिक लड़ाई है। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की आवाज को दबाए जाने के पीछे भी भाजपा-आरएसएस की यही मानसिकता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के स्वराज के विचार के अनुरूप हर नागरिक को अपनी राह तय करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए तथा हर व्यक्ति को यह महसूस होना चाहिए कि यह देश उसका अपना है और यहां उसे प्यार व सम्मान मिलता है, उसकी सत्य की खोज इस देश के बाकी लोगों के लिए ज़रूरी है।

जवाहर भवन में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की 82वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ‘हरा भरा स्वराज’ कार्यक्रम को संबोधित करते राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा अल्पसंख्यकों के अस्तित्व पर सवाल खड़े करती है, आदिवासियों को यह संदेश दिया जाता है कि उनकी जमीनें छीन ली जाएंगी और विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे, जबकि दलितों के उत्पीड़न को नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के इस मौजूदा माहौल को पूरी तरह बदलने की आवश्यकता है। महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गांधी जी का मानना था कि प्रत्येक व्यक्ति एक अद्वितीय इकाई है और सच तक पहुंचने का उसका अपना मार्ग होता है। लेकिन आरएसएस ने यह मान लिया है कि वह देश के सभी 150 करोड़ लोगों का सच जानता है, जबकि वास्तविकता यह है कि हर व्यक्ति अपना सच खुद जान सकता है। उन्होंने कहा, “अगर मैं यह मानने लगूं कि मुझे दूसरों का सच पता है, तो मैं पागल हूं। क्योंकि मैंने वह नहीं झेला है जिसका पीड़ित व्यक्ति ने खुद सामना किया है। तो मैं कैसे कह सकता हूं कि मुझे दूसरे व्यक्ति का सच पता है?”राहुल गांधी ने यह भी कहा कि धर्म, जाति, उम्र या लिंग से परे हर नागरिक को यह महसूस होना चाहिए कि वह इस देश का हिस्सा है, यहां उसे प्यार और सम्मान मिलता है तथा उसके सत्य की खोज का भी महत्व है।वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि महात्मा गांधी का विजन महंगी शिक्षा व्यवस्था, अनुचित परीक्षा प्रणाली और कुछ ही लोगों के हाथों में सिमटी वित्तीय व्यवस्था के साथ साकार नहीं हो सकता। छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार और देश का दायित्व उनकी कल्पनाओं के द्वार खोलना है, ताकि वे अपनी पसंद के रास्ते पर आगे बढ़ सकें।अपने संबोधन में ‘स्वराज’ शब्द की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि इसे अंग्रेजी के ‘फ़्रीडम’ शब्द का पर्याय यानी ‘आज़ादी’ मानना गलत है। स्वराज का मतलब ‘स्व’ पर ‘राज’ यानी खुद पर राज करना है। उन्होंने कहा कि इंसान का दुनिया के साथ व्यक्तिगत रिश्ता स्वराज है। कोई दूसरा व्यक्ति किसी को स्वराज प्रदान नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि गांधी जी चाहते थे कि देश का हर व्यक्ति स्वराज के इस रास्ते पर चले।इस दौरान राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, विजय महाजन, प्रो सतीश राय, डॉ. चयनिक, सौरभ राय भी मौजूद थे।
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