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अपराध दिल्ली

19 लाख 50 हजार रुपए से भरे बैंग लूटने व पीड़ित के साथ मारपीट करने के मामले में 5 आरोपित पकड़े गए, लूट की 9.90 लाख रुपए बरामद।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
दिल्ली के थाना कश्मीरी गेट क्षेत्र में नोटों से भरे बैग, जिसमें 19.50 लाख रुपए रखे हुए थे, को  लूटने व पीड़ित के साथ मार पीट करने के मामले में आज सोमवार को थाना कश्मीरी गेट व दिल्ली पुलिस की स्पेशल स्टाफ,उत्तर जिला की संयुक्त टीम ने 5 आरोपितों को गिरफ्तार किए है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम अभिषेक तिवारी,पुत्र चंदर भान तिवारी, निवासी गली नं. 8, राम पार्क, लोनी, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश, आयु 21 वर्ष, शाकिर, पुत्र शकील, निवासी राम पार्क एक्सटेंशन, गली नं. 4, लोनी, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश, आयु 26 वर्ष, सुलेमान @ शाहरुख, पुत्र मुस्तफा, निवासी राम पार्क, लोनी, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश, आयु 23 वर्ष, अरुण, पुत्र रूप नारायण, निवासी रंधानी एन्क्लेव, राम पार्क, गली नं. 7, लोनी, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश, आयु 26 वर्ष और सुभाष कश्यप, पुत्र स्वर्गीय लाल चंद, निवासी राम पार्क, लोनी, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश, आयु 26 वर्ष है। पुलिस ने इनके कब्जे  से लूटी गई रकम में से 9 लाख 90 हजार रुपए नकद और लूटी गई रकम में से खरीदा गया एक नया आई-फोन 17 प्रो, मूल्य 1 लाख रुपये हैं , को बरामद किया है।   

डीसीपी, उत्तर जिला, निहारिका भट्ट ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि दिनांक 30.09.2026 को,मुकेश और रमेश्वर नामक दो व्यक्ति अपने कार्यालय , जो ओल्ड लाजपत राय मार्केट में स्थित था, से लगभग ₹19.50 लाख नकद लेकर स्कूटी पर करोल बाग की ओर जा रहे थे। छत्ता रेल पार करने के बाद, जब वे जीपीओ के पास पहुँचे, तो दो मोटरसाइकिलों पर सवार कुछ व्यक्तियों ने उन्हें घेर लिया और सड़क-झगड़े की घटना के बहाने उनसे बहस शुरू कर दी। हालांकि, जैसे ही मौके पर आम लोग इकट्ठा होने लगे, हमलावरों ने अपना प्रयास छोड़ दिया और वहाँ से चले गए। इसके बाद मुकेश और रमेश्वर ने करोल बाग की ओर अपनी यात्रा फिर से शुरू कर दी।जब वे रानी झांसी फ्लाईओवर पर सेंट स्टीफन अस्पताल के पास पहुँचे, तो दो मोटरसाइकिलों पर सवार 4-5 व्यक्तियों ने अचानक उनकी स्कूटी को रोक लिया। हमलावरों ने पीड़ितों के साथ मारपीट की और लगभग ₹19.50 लाख नकद से भरा बैग जबरन छीनकर मौके से फरार हो गए। तदनुसार, थाना कश्मीरी गेट में एफआईआर संख्या 446/26 दिनांक 01.10.2026, धारा 309(4)/309(6)/3(5) बीएनएस के अंतर्गत दर्ज की गई और मामले की जांच शुरू की गई। उनका कहना है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए,उन्होंने पीएस कश्मीरी गेट और स्पेशल स्टाफ/उत्तर जिला की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। प्रथम टीम, शंकर बनर्जी, एसीपी कोतवाली के मार्गदर्शन में, इंस्पेक्टर प्रशांत यादव (एसएचओ/कश्मीरी गेट) के नेतृत्व में थी, जिसमें एसआई दिलबाग, एसआई उमेश, एचसी अजीत, एचसी अंकुर, सिपाही  ऋतेश, सिपाही प्रवीण और सिपाही अजीत शामिल थे। द्वितीय टीम, विशेष धत्तरवाल, एसीपी/ऑपरेशन/उत्तर के मार्गदर्शन में, इंस्पेक्टर रोहित सरस्वत (प्रभारी, स्पेशल स्टाफ) के नेतृत्व में थी, जिसमें एसआई अशोक, एएसआई हरफूल, एचसी परवीन, एचसी बालकिशन, एचसी देवेंद्र, एचसी संदीप, एचसी राकेश, एचसी संदीप, एचसी आकाश, एचसी अमित, सिपाही  रवि, सिपाही  मोहित, सिपाही  मोहित, सिपाही विक्की शामिल थे।अपराध के संबंध में सूचना प्राप्त होते ही, दोनों टीमों को मौके पर ही संक्षिप्त जानकारी दी गई और विशिष्ट कार्य सौंपे गए। घटनास्थल तथा आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत जांच की गई। फुटेज से पता चला कि दो मोटरसाइकिलों पर सवार छह व्यक्तियों ने छत्ता रेल क्षेत्र से आईएसबीटी और तीस हजारी की ओर पीड़ितों का पीछा किया था। इसके पश्चात, दोनों मोटरसाइकिलों के प्रवेश और निकास मार्गों का सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से सूक्ष्मता से मानचित्रण किया गया। अलग-अलग टीमों को शिकायतकर्ता की दुकान के बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच करने और अपराध में प्रयुक्त मोटरसाइकिलों का पता लगाने का कार्य सौंपा गया। विश्लेषण से पता चला कि दो संदिग्ध शिकायतकर्ता की दुकान के बाहर तैनात थे और बाद में पीड़ित मुकेश का कुचा घासी राम से पीछा करते हुए गए, जहां वह एक भुगतान लेने गया था। इससे यह स्थापित हुआ कि अपराध से पहले पीड़ित की आवाजाही पर बारीकी से नजर रखी जा रही थी।निरंतर सीसीटीवी ट्रैकिंग और अनेक एएनपीआर कैमरों के विश्लेषण के माध्यम से, अपराध में प्रयुक्त मोटर साइकिलों में से एक की पहचान की गई। उसके स्वामित्व की श्रृंखला का व्यवस्थित रूप से सत्यापन किया गया। मोटरसाइकिल प्रारंभ में परवेज के नाम पर पंजीकृत थी, जिसने बताया कि उसने इसे अनस को बेच दिया था। इसके बाद इसे ओंकार को बेचा गया और अंततः यह अभियुक्त दानिश के कब्जे में आ गई। तकनीकी निगरानी ने आगे प्रासंगिक समय पर घटनास्थल के आसपास दानिश की उपस्थिति और आवाजाही की पुष्टि की। तकनीकी इनपुट्स ने बाद में उसके सहयोगियों की पहचान करने में सहायता की, अर्थात् अभिषेक, शाकिर, सुलेमान, अरुण और सुभाष। आगे किए गए सतत प्रयासों के परिणाम स्वरूप 03.10.2026 को अभिषेक, शाकिर, सुलेमान और अरुण को मनाली से दिल्ली लौटते समय गिरफ्तार किया गया , जहां वे कथित रूप से डकैती के बाद गए थे और लूटी गई राशि का कुछ हिस्सा खर्च किया था। अपराध में प्रयुक्त दूसरी मोटरसाइकिल के मालिक सुभाष को भी आरोपियों की निशानदेही पर गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान ₹9.90 लाख नकद तथा हाल ही में खरीदा गया iPhone 17 Pro बरामद किया गया, जिसकी कीमत लगभग ₹1 लाख है और जिसे कथित रूप से लूटी गई राशि से खरीदा गया था। अभियुक्त से की गई आगे की पूछताछ, जिसे तकनीकी साक्ष्यों द्वारा विधिवत पुष्ट किया गया, से एक अन्य अभियुक्त बृज की संलिप्तता का पता चला, जिसने कथित रूप से डकैती को अंजाम देने के लिए अमन और पिंटू की व्यवस्था की थी। जांच में यह भी सामने आया कि अमन और पिंटू ने कुचा घासी राम से पीड़ितों का पीछा किया था और उनकी गतिविधियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी अपने सहयोगियों को दी थी, जिससे अपराध के कारित होने में सहायता मिली। जांच पूर्ण साजिश का पर्दाफाश करने तथा प्रत्येक अभियुक्त की विशिष्ट भूमिका का पता लगाने के लिए जारी है। शेष अभियुक्तों का पता लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में टीमें भेजी गई हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से की गई निरंतर पूछताछ के दौरान, लूट की साजिश और उसके क्रियान्वयन का खुलासा हुआ। यह सामने आया कि आरोपी बृज, जो चांदनी चौक क्षेत्र में काम करता है, को कथित रूप से शिकायतकर्ता के कार्यालय से नकदी की आवाजाही की जानकारी थी। इस जानकारी का लाभ उठाते हुए, उसने कथित रूप से अभिषेक के साथ मिलकर साजिश रची और अमन तथा पिंटू को पीड़ित की गतिविधियों पर नजर रखने तथा लूट की वारदात को अंजाम देने में सहायता करने के लिए लगाया। जांच के अनुसार, बृज के निर्देशों पर अमन और पिंटू ने पीड़ित का पीछा कुचा घासी राम से किया, जहां वह एक भुगतान लेने गया था। इसके बाद उन्होंने सिस गंज गुरुद्वारे के पास पीड़ित की पहचान अरुण और अभिषेक को कराई और ओल्ड लाजपत राय मार्केट की और उसकी गतिविधियों पर नजर रखना जारी रखा। तदुपरांत, सभी छह आरोपियों ने दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर ओल्ड लाजपत राय मार्केट से पीड़ित का पीछा किया। उन्होंने प्रारंभ में कश्मीरी गेट के निकट उसे रोककर नकदी से भरा बैग छीनने का प्रयास किया, किंतु घटनास्थल की परिस्थितियों के कारण वे सफल नहीं हो सके। हतोत्साहित हुए बिना, उन्होंने रानी झांसी फ्लाईओवर की ओर पीड़ित का पीछा जारी रखा, जहां उन्होंने कथित रूप से उसे रोका और उस पर हमला किया, तथा बाद में उससे नकदी लूट ली।अपराध करने के पश्चात, अभियुक्त पहचान से बचने के प्रयास में सदर बाजार और पहाड़गंज के मार्ग से फरार हो गए। लूटी गई नकदी बाद में आरोपियों के बीच बांट दी गई।जांच में आगे यह भी सामने आया कि डकैती के बाद, पकड़े गए आरोपियों ने, सुभाष को छोड़कर, कथित रूप से मनाली की यात्रा की, जहां उन्होंने लूटी गई राशि का एक हिस्सा खर्च किया। सुभाष दिल्ली में ही रहा, जबकि अमन और पिंटू गिरफ्तारी से बचने के प्रयास में नैनीताल की ओर भाग गए। शेष आरोपियों को गिरफ्तार करने, अपराध से प्राप्त शेष धनराशि की बरामदगी करने तथा षड्यंत्र में शामिल सभी व्यक्तियों की संपूर्ण भूमिका का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।

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