अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली कांग्रेस ने कहा है कि मोदी सरकार बार-बार पद्धति का तरीका बदलकर जीडीपी के आंकड़ों को अपने हिसाब से सेट कर रही है और भारत की बदहाल आर्थिक हकीकत को छिपाया जा रहा है। पार्टी ने तथ्यों के साथ बताया कि हालिया 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर का आंकड़ा जमीनी हकीकत से पूरी तरह दूर है और देश की जनता इस समय महंगाई, बेरोजगारी एवं गिरती आय समेत विभिन्न आर्थिक संकटों से बुरी तरह जूझ रही है। कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी नेता और अर्थशास्त्री सलमान सोज ने कहा कि देश के लोग इन आंकड़ों पर विश्वास नहीं करते। जनता पूछ रही है कि अगर अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है, तो उसका असर जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा? परिवारों को खर्च करने के लिए उधार क्यों लेना पड़ रहा है? निजी निवेश क्यों स्थिर है? जीडीपी के हिस्से के तौर पर नेट एफडीआई शून्य क्यों है? युवा बेरोजगारी 16 प्रतिशत पर क्यों है?

पार्टी के मीडिया पैनलिस्ट सोज ने बताया कि जीडीपी की असल वृद्धि को महंगाई के साथ समायोजित करना पड़ता है। सरकार ने इसके समायोजन के लिए 2.3 प्रतिशत की दर ली है, जो सच्चाई से दूर है। जबकि धरातल पर खुदरा महंगाई 3.9 प्रतिशत और थोक महंगाई लगभग 10 प्रतिशत के स्तर पर है। ऐसे में विसंगति एकदम स्पष्ट है।कांग्रेस नेता ने ‘मेक इन इंडिया’ की विफलता को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके 10 साल पूरे होने के बाद भी मैन्युफैक्चरिंग का जीडीपी में हिस्सा 25 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंचने के बजाय घटकर 13 प्रतिशत से भी नीचे चला गया है। उन्होंने आगे कहा कि चीन के साथ 112 अरब डॉलर का रिकॉर्ड व्यापार घाटा और 2018 के बाद से स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व कैपेसिटी में एक बूंद की बढ़ोतरी न होना, सरकार के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दावों पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। उन्होंने आगे कहा कि देश में 44 प्रतिशत कार्यबल कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर है, जहां पिछले एक दशक से उनकी आय नहीं बढ़ी है। सोज ने चिंता जताते हुए कहा कि वर्ष 2026 में अभी तक निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि इतनी अच्छी है, तो निवेशक यहां से अपना पैसा क्यों निकाल रहे हैं और अर्थव्यवस्था का एक्सपोर्ट शेयर पहले के मुकाबले इतना कम क्यों है? उन्होंने कहा कि आरबीआई के हस्तक्षेप के बावजूद रुपया डॉलर के मुकाबले 95-96 के स्तर पर फिसलकर एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा बन गया है। सोज ने आगाह करते हुए कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाइमेट चेंज से नौकरियों पर बड़ा संकट आने वाला है, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धरातल पर आकर आम जनता की समस्याएं सुननी चाहिए। वहीं एक्स पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जीडीपी के आंकड़े केवल आंकड़ों की बाजीगरी हैं। बार-बार पद्धति बदलकर, मोदी सरकार जीडीपी आंकड़ों को अपने अनुसार तय कर रही है और भारत की बदहाल आर्थिक सच्चाई को छिपा रही है। उन्होंने कहा कि नॉमिनल और वास्तविक जीडीपी के बीच का अंतर महंगाई को दर्शाता है और सरकार के अनुसार यह अंतर सिर्फ 2.3 प्रतिशत है। लेकिन इसी तिमाही में थोक मूल्य सूचकांक महंगाई 9 प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने कहा कि यह एक स्पष्ट विसंगति है, जो मोदी सरकार ने खुद पैदा की है, जिसने इस साल जीडीपी गणना की पद्धति दो बार बदली है। जून में, जीडीपी अनुमानों के इस नवीनतम दौर से ठीक पहले सरकार ने आकलन के लिए थोक मूल्य सूचकांक के इस्तेमाल से दूरी बना ली। अगर मोदी सरकार ईमानदार आंकड़े पेश करती, तो वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का आंकड़ा बहुत कम होता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ ने भले ही बहुत कम हासिल किया हो, लेकिन मोदी सरकार की सिग्नेचर स्कीम ‘फ़ेक इन इंडिया’ बिना रुके जारी है।
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