
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार द्वारा ऐतिहासिक मनरेगा योजना को खत्म कर 01 जुलाई, 2026 से उसके स्थान पर लागू की गई वीबी ग्राम जी योजना को गरीबों के अधिकारों पर बड़ा कुठाराघात बताया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में मनरेगा को गड्ढा खोदने वाली योजना कहा था और आज उसी दुर्भावना के तहत इस जनहितैषी योजना को समाप्त कर दिया गया है। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी सांसद और ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष सप्तगिरी उलाका ने मांग की है कि वीबी ग्राम जी को तुरंत निरस्त कर पुरानी मनरेगा योजना को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी 500 रुपये प्रतिदिन की जाए। साथ ही, 15 दिनों में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिले तथा फंड आवंटन के नॉर्मेटिव मॉडल को हटाया जाए।
उलाका ने नई योजना की कई गंभीर खामियों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि मनरेगा अधिकार और मांग आधारित कानून था। इसके तहत गरीब, महिलाएं, एससी, एसटी और ओबीसी समेत वंचित वर्गों के लोग जब काम मांगते थे, तो सरकार को रोजगार देना ही पड़ता था, अन्यथा बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान था। इसके विपरीत, नई योजना पूरी तरह सप्लाई-आधारित है, जिसमें केंद्र सरकार पहले से मजदूरी बजट एवं फंड आवंटित करेगी और उसी सीमा के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मजदूरी के लिए अपना हिस्सा 100 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया है, जिससे अब राज्यों को 40 प्रतिशत हिस्सा देना होगा। इसके अलावा, तय सीमा से अधिक रोजगार देने पर उसका 100 प्रतिशत अतिरिक्त खर्च राज्यों को उठाना होगा। नई योजना के तहत 125 दिन रोजगार देने के मोदी सरकार के दावे की पोल खोलते हुए कांग्रेस सांसद ने उदाहरण दिया कि हरियाणा में काम मांग रहे पंजीकृत मजदूरों को औसतन सिर्फ 13.78 व्यक्ति-दिवस का ही रोजगार उपलब्ध होता है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के लिए शुरुआती आवंटन 984 करोड़ रुपये है, जिसमें 40 प्रतिशत हिस्सा यानी 393 करोड़ रुपये राज्य को देना होगा। इसे 125 दिन तक बढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार को कम से कम 5,786 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। उलाका ने कहा कि नई योजना में हर राज्य में फंड आवंटन के लिए नॉर्मेटिव मॉडल लागू होगा। इसमें सरकार 16वें वित्त आयोग के हॉरिजॉन्टल डिवोल्यूशन फॉर्मूले (जिसमें जनसंख्या, क्षेत्रफल, वन एवं पारिस्थितिकी, जीडीपी में योगदान आदि मानदंड शामिल हैं) का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने बताया कि कई राज्यों में संकट है, वहां बेरोजगारी ज्यादा है और जीडीपी में योगदान कम है; उनके साथ यह फॉर्मूला अन्याय करता है।उन्होंने कहा कि नई योजना में कृषि के मुख्य सीजन के दौरान दो महीने काम बंद रखना रोजगार गारंटी की मूल भावना के खिलाफ है। मनरेगा इसलिए आया था कि यदि कोई खेतीबाड़ी के काम नहीं करना चाहता है तो उसे रोजगार दिया जा सके, ताकि उन्हें गांव से बाहर पलायन न करना पड़े। कांग्रेस सांसद ने कहा कि मनरेगा में ग्राम सभाएं, पंचायतें और स्थानीय लोग मिलकर तय करते थे कि गांव में कहां और क्या काम होना चाहिए। लेकिन अब ग्राम सभाओं को दरकिनार कर केंद्र सरकार तय करेगी कि गांव को क्या चाहिए। अधिकारी अपने स्तर पर योजनाओं को पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वीबी ग्राम जी योजना में सरपंचों को भी नहीं पता कि उनके गांव में क्या काम स्वीकृत हो रहा है।उन्होंने बताया कि संसद की स्थायी समिति ने सिफारिश की थी कि वर्तमान मजदूरी दर बेहद कम है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए, लेकिन मोदी सरकार ने उसे भी दरकिनार कर दिया।उलाका ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने वीबी ग्राम जी योजना के खिलाफ ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ रैलियां की हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का संदेश हर कार्यकर्ता और मनरेगा मजदूर तक पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ कांग्रेस अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
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