
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार अगले महीने एक स्वचालित राजस्व प्रशासन प्रणाली शुरू करने जा रही है, जो कागजरहित और नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। यह पहल मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में की जा रही है। इस सुधार अभियान का नेतृत्व करते हुए वित्त आयुक्त (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) डॉ. सुमिता मिश्रा ने शुक्रवार को मंडला युक्तों और उपायुक्तों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में राज्य की राजस्व व्यवस्था में तेजी, जवाबदेही और तकनीक के माध्यम से व्यापक बदलाव पर जोर दिया गया। डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि लगभग 1,900 नव-प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से दक्ष पटवारियों को जल्द से जल्द जिलों में तैनात किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये डिजिटल रूप से सक्षम अधिकारी नई राजस्व प्रणाली की रीढ़ बनेंगे और तकनीकी ढांचे को मजबूत करेंगे।

उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि निर्धारित समय-सीमा से अधिक लंबित मामलों को तुरंत निपटाया जाए और पांच दिन से अधिक की देरी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिलों को प्राथमिकता के आधार पर लंबित मामलों को खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं। फील्ड स्तर पर ये 1,900 तकनीकी पटवारी भूमि प्रशासन से जुड़े अहम कार्यों को संभालेंगे, जैसे भूमि रिकॉर्ड का आधार से लिंक करना, लाल डोरा नक्शों का अपडेट, रोवर तकनीक से भूमि का सटीक सीमांकन, एग्रीस्टैक के तहत डिजिटल डेटा का सत्यापन और कब्जे से जुड़े खसरा-खाना कष्ट मामलों का त्वरित निपटान आदि। उन्होंने कहा कि इनकी नियुक्ति से कार्यभार कम होगा और कार्यक्षमता में सुधार आएगा। डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि लंबित इंतकाल (म्यूटेशन) मामलों को तय समय में लगभग शून्य तक लाया जाए ताकि ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली पूरी तरह लागू की जा सके। जिलों को प्रवेश और स्वीकृति के बाद दोनों स्तरों पर तेजी से अनुमोदन करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सीमांकन के मामलों में रोवर आधारित तकनीक से लंबित ऑनलाइन मामलों को समय-सीमा में निपटाया जाएगा। समीक्षा में डिजिटल शासन में हुई प्रगति भी सामने आई। पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली के तहत 3.23 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से करीब 84 प्रतिशत स्वीकृत हो चुके हैं, जिससे प्रक्रियाओं में तेजी और मानवीय हस्तक्षेप में कमी आई है। भूमि रिकॉर्ड के क्षेत्र में लगभग 85 प्रतिशत जियो-रेफरेंस्ड गांव अब भू-नक्शा पोर्टल पर उपलब्ध हैं, जिससे डेटा की सटीकता और उपलब्धता बढ़ी है। कृषि डिजिटलीकरण में भी अच्छी प्रगति हुई है। एग्रीस्टैक किसान रजिस्ट्रेशन पर कार्य तेजी से चल रहा है, जबकि डिजिटल फसल सर्वेक्षण 54 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। जमाबंदी अपडेट लगभग 86 प्रतिशत तक पहुंच चुका है और शेष मामलों को जल्द निपटाया जा रहा है। डॉ मिश्रा ने कहा कि आगामी स्वचालित प्रणाली हरियाणा के राजस्व प्रशासन में एक नया अध्याय शुरू करेगी, जिसमें इंतकाल, रजिस्ट्रेशन और रिकॉर्ड प्रबंधन को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा। नागरिक ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे, डिजिटल रिकॉर्ड देख सकेंगे और जल्दी स्वीकृति प्राप्त कर सकेंगे, जिससे कार्यालयों के चक्कर कम होंगे और देरी में कमी आएगी। समीक्षा बैठक में युवा आपदा मित्र योजना की प्रगति पर भी चर्चा की। इस योजना के तहत 5,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और उन्हें इमरजेंसी रिस्पॉन्डर किट (ERK) और बीमा सुविधा दी जा रही है। सोनीपत और कुरुक्षेत्र में प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, जबकि गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, रेवाड़ी, यमुनानगर और पंचकूला में विस्तार जारी है। सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि किट वितरण और दस्तावेजीकरण सही तरीके से सुनिश्चित किया जाए, ताकि स्वयंसेवकों को प्रेरित किया जा सके।
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