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अपराध नोएडा

इंजीनियर युवराज की मौत मामले में पुलिस का बड़ा एक्शन; 5 बिल्डर्स पर जल और वायु प्रदूषण एक्ट के तहत नई FIR दर्ज

अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट 
नोएडा के सेक्टर 150 में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने नॉलेज पार्क थाने में ‘लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘विजटाउन’ के भागीदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। यह मुकदमा गिरफ्तार बिल्डर अभय कुमार समेत मनीष कुमार, संजय कुमार, अचल वोहरा, निर्मल के खिलाफ, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और IPC की धारा 304A  लगाई गई है.पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, यह अधिनियम सरकार को पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और सुधार करने का अधिकार देता है। यदि बिल्डर के प्रोजेक्ट की वजह से हवा या पानी जहरीला हो रहा है, तो इस कानून के तहत भारी जुर्माने और 5 साल तक की कैद  का प्रावधान है।

जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974: FIR में जिक्र है कि गड्ढे का पानी काला हो चुका है। इस कानून के तहत किसी भी जल निकाय या खुले क्षेत्र में गंदा पानी या कचरा जमा करना अपराध है, क्योंकि यह भूजल (groundwater) को भी प्रदूषित करता है। IPC/BNS की धाराएं: लापरवाही से हुई मौत के लिए आमतौर पर IPC की धारा 304A (लापरवाही से मृत्यु) लगाई जाती है, जिसमें 2 साल तक की सजा हो सकती है। निर्माणाधीन साइट्स के लिए अथॉरिटी ने भी सख्त गाइड लाइन्स बनाई हैं, जिनका इस मामले में उल्लंघन पाया गया है, नियम अनिवार्य सुरक्षा मानक के अनुसार बैरिकेडिंग गहरे गड्ढों या खुदाई वाले क्षेत्रों के चारों ओर कम से कम 2 मीटर ऊँची टिन शेड या मजबूत बैरिकेडिंग अनिवार्य है। जलभराव प्रबंधन,  बेसमेंट या साइट पर पानी जमा होना प्रतिबंधित है। बिल्डर को पंप लगाकर पानी निकालना होता है ताकि मच्छर न पनपें और नींव कमजोर न हो। साइन बोर्ड,  खुदाई वाली जगह से 50-100 मीटर पहले “काम चालू है” या “खतरा” के रिफ्लेक्टिव बोर्ड लगाने जरूरी हैं ताकि रात में ड्राइवर देख सकें। स्ट्रक्चरल ऑडिटबेसमेंट की दीवारें इतनी मजबूत होनी चाहिए कि वे किसी भी बाहरी दबाव या छोटे टक्कर को झेल सकें

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