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गुडगाँव चंडीगढ़ हरियाणा

सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर लाभ दिलाने के लिए लंबित ऑडिट पैरों के शीघ्र निपटान के निर्देश।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
हिसार:उत्तर एवं दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह के निर्देशानुसार निगम में सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर वित्तीय एवं सेवानिवृत्ति लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लंबित ऑडिट पैरों के शीघ्र निपटान के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। यह विषय कर्मचारियों, सेवानिवृत्त अधिकारियों तथा विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार हरियाणा पावर यूटिलिटीज की चेयरपर्सन सुश्री आशिमा बराड़, प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह एवं निगम प्रबंधन के समक्ष उठाया जाता रहा है। इसी क्रम में डीएचबीवीएन के मुख्य अभियंता (प्रशासन एवं मानव संसाधन) इंजीनियर राजकुमार जाजोरिया ने मुख्य वित्तीय अधिकारी एवं मुख्य लेखा परीक्षक को लंबित ऑडिट पैरों का प्राथमिकता के आधार पर निपटान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य अभियंता ने कहा कि निगम के अनेक सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों से संबंधित ऑडिट पैरे लंबे समय से लंबित हैं, जबकि संबंधित कार्यालयों द्वारा आवश्यक स्पष्टीकरण एवं जवाब पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इन मामलों के लंबित रहने से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) जारी करने में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप पेंशन, ग्रेच्युटी, वित्तीय सहायता एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान में अनावश्यक विलंब हो रहा है।उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार की नीति के अनुसार सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान यथासंभव कर्मचारी की सेवानिवृत्ति तिथि पर ही सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके बावजूद लंबित ऑडिट मामलों के कारण कर्मचारियों को आर्थिक कठिनाइयों एवं मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही यह स्थिति निगम की कार्यप्रणाली एवं सार्वजनिक छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में आवश्यक जवाब उपलब्ध होने के बावजूद अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे ऑडिट पैरों का निस्तारण अनावश्यक रूप से लंबित बना हुआ है। उन्होंने ऑडिट प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अनेक बार ऑडिट आपत्तियां अथवा हाफ मार्जिन जारी करते समय संबंधित नियम, विनियम, नीति, निर्देश या वित्तीय संहिता का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया जाता। इससे संबंधित कार्यालयों को तथ्यात्मक एवं नियमसम्मत जवाब तैयार करने में कठिनाई होती है तथा पत्राचार लंबा खिंच जाता है। उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में जारी किए जाने वाले प्रत्येक ऑडिट पैरे अथवा हाफ मार्जिन में उस नियम, निर्देश या नीति का स्पष्ट संदर्भ अवश्य दिया जाए, जिसके आधार पर आपत्ति दर्ज की गई है। इससे संबंधित कार्यालयों को सटीक एवं प्रभावी उत्तर देने में सुविधा होगी और मामलों का समयबद्ध निपटान संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि जहां भी प्रक्रियागत त्रुटियां पाई जाती हैं, वहां संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भविष्य में सावधानी बरतने के लिए उचित रूप से सचेत किया जाए, ताकि ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो तथा निगम के वित्तीय हित सुरक्षित रह सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑडिट व्यवस्था का उद्देश्य केवल आपत्तियां दर्ज करना नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सुशासन को सुदृढ़ करना भी है। उन्होंने सभी लंबित ऑडिट मामलों की व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर उनके शीघ्र निपटान के निर्देश दिए हैं, ताकि कर्मचारियों के एनडीसी समय पर जारी हो सकें और उनके वैधानिक सेवानिवृत्ति एवं वित्तीय लाभ अनावश्यक रूप से लंबित न रहें। साथ ही संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में की गई कार्रवाई की अनुपालना रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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