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फरीदाबाद

फरीदाबाद : सुप्रीम कोर्ट के दीपावली पर्व पर पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध के फैसले को सरकार व प्रशासन ने उड़ाया मजाक, खूब जले पटाखें।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 

फरीदाबाद : सुप्रीम कोर्ट के दीपावली पर्व के दिन पटाखे के बिक्री पर प्रतिबंध के लगाएं जाने के फैसले को प्रदेश सरकार व  जिला प्रशासन ने इस तरह मजाक उड़ाएगा। शायद यह सुप्रीम कोर्ट को बिल्कुल मालूम नहीं होगा। जी हैं दीपावली के दिन आम लोगों ने महंगी -महंगी दामों में पटाखों को खरीद कर जमकर पटाखों को छोड़ा।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली -एनसीआर में दीपावली त्यौहार के दिन पूरी तरह से पटाखों के बिक्री करने पर बिल्कुल प्रतिबंध लगा दिया था ताकि बढ़ते हुए प्रदूषण  पर कंट्रोल किया जा सकें और इससे फैलने वाली  बिमारियों पर ब्रेक लगाया जा सकें ,पर सुप्रीम कोर्ट के इन फैसले को प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन ने पूरी तरह से फ्लॉप कर दिया।
देखा गया हैं कि बीती रात तक़रीबन आठ बजे प्रत्येक घरों में भगवान गणेश-लक्ष्मी जी का पूजा होने के बाद अपने -अपने घरों से बहार निकल कर सड़कों पर पटाखों को छोड़ना शुरू कर दिया। बताया गया हैं कि कई अलग -अलग जगहों पर सड़क के किनारे खुलेआम चारपाई पर पटाखों को बेचते हुए देखे गए हैं पर उनसे कोई पूछने वाला नहीं था कि प्रतिबंध के वावजूद खुलेआम सड़कों पर पटाखों को क्यों बेच रहा हैं के अलावा कई इलाकों में कॉर्ड वर्ड में पटाखों की बिक्री किए जाने की खबर हैं और काफी महंगें दामों में लोगों ने पटाखों को ख़रीदा हैं।
ये एक बड़ी वजह हैं कि आमजनों तक काफी तादाद में पटाखें पहुँच गईं और लोगों ने लक्ष्मी पूजा के बाद जमकर आतिशबाजी की। लोग बतातें हैं कि सुप्रीम कोर्ट के प्रदूषणों को रोकने के प्रयासों को जानबूझ कर प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन द्वारा ढीला छोड़ा गया हैं। उनका कहना हैं कि अगर जिला प्रशासन चाहता तो जरूर पटाखों की बिक्री को रोका जा सकता था पर उन उन्होनें  ऐसा कुछ  नहीं किया क्यूंकि पहले से भाजपा की सरकारों  द्वारा लिए गए कई  फैसलों से आम जनता  बिल्कुल नाराज हैं। इसमें  दीपावली पर्व के दिन चलने वाले पटाखों पर लगे प्रतिबंध पर सख्ती कर पाते तो  लोग और जाएदा  नाराज हो जाते यहीं एक वजह हैं कि पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंध लगाए गए फैसले को प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन ने हल्के में लेने का निर्णय लिया होगा। क्यूंकि यह मामला आमजनों से जुड़ा हुआ हैं, सरकार ऐसा नहीं करती तो भाजपा का वर्ष -2019  चुनाव का मुश्किल भरा होता।
 

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