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फरीदाबाद

फरीदाबाद: अंतरराष्ट्रीय आम महोत्सव। छोटा या बड़ा – आम सभी का खास।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद:राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद की एस जे ए बी, जे आर सी और गाइड ने अंतरराष्ट्रीय आम महोत्सव के अवसर पर विशेष प्रतियोगिता ऑनलाइन आयोजित की। एस जे ए बी अधिकारी व प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि आम का वैज्ञानिक नाम मेंगीफेरा इंडिका है। आम एक भारतीय और स्वादिष्ट फल है। आम को फलों का राजा कहा जाता है क्यूंकि आम कई गुणों से भरपूर है आम बायोएक्टिव कंपाउंड और फाइबर होने के कारण यह स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। आम विटामिन ए, बी और सी के साथ-साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम ,कॉपर, कैल्शियम और फॉस्फोरस के सबसे बड़े स्त्रोतों में से एक हैं। इनमें प्री-बायोटिक फाइबर व फ्लावोनोइड एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर होते हैं। जे आर सी काउन्सलर रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने बताया कि बड़े बड़े

इतिहासकार और गीतकार बताते हैं कि ‘आम की जो मशहूर प्रकार हैं, उन्हें वहीं का नाम दे दिया गया, जहां उसका पेड़ पहली बार उगा या दिखाई दिया। दशहरी को यह नाम काकोरी के पास दशहरी गांव की वजह से मिला। कहा जाता है कि दशहरी आम का पेड़ सबसे पहले यहीं हुआ। रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि ऐसा जाता है कि अगर दशहरी आम किसी को तोहफे में भेजा जाता था तो उसके आर-पार छेद कर दिया जाता था, ताकि उसकी गुठली से कोई नया पेड़ न उगा ले। इतनी पाबंदी के बावजूद दशहरी ने पूरे विश्व में धाक जमा ली। इसका श्रेय जाता है आम विशेषज्ञों को, जिन्होंने बड़े बड़े व्यक्तित्व के नाम पर आम की नई नई किस्में विकसित की हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर नमो आम है, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम पर योगी आम भी। सचिन तेंदुलकर और एपीजे अब्दुल कलाम के नामों पर भी वे आम की किस्मों का नाम रख चुके हैं। आम का राजा कौन। फलों का राजा तो आम ही है, लेकिन आम का राजा कौन? सच बात तो यह है कि उत्तर प्रदेश वालों के लिए दशहरी आम का राजा है, तो मुंबई वालों के लिए अलफांसो। बेंगलुरु वाले बंगनपल्ली के स्वाद पर मरते हैं,

तो पश्चिम बंगाल के लोग मालदा को खास बताते हैं और एक और विशेष तथ्य – आम है विशुद्ध भारतीय आम पूरी तरह भारतीय मूल का है। कहा जाता है कि चौथी-पांचवी सदी में बौद्ध धर्म प्रचारकों के साथ भारत से आम मलेशिया और पूर्वी एशिया के देशों तक पहुंचा। पारसी लोग 10वीं सदी में इसे पूर्वी अफ्रीका ले गए। पुर्तगाली 16वीं सदी में इसे ब्राजील ले गए, वहां से यह वेस्टइंडीज और मैक्सिको पहुंच गया। भारत में आज भी आम की पैदावार सबसे ज्यादा है। भारत के बाद क्रमश: चीन, मैक्सिको, थाइलैंड व पाकिस्तान का नाम आता है। यूरोप में सबसे अधिक आम स्पेन में होता है, जिस का आम तीखी खुशबू लिए होता है। आज प्रतियोगिता में अंशु को प्रथम, निशा व खुशी को द्वितीय तथा पूनम सिंह व निशा कुमारी को तृतीय घोषित किया। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने सभी प्रतिभागी बच्चों, प्राध्यापिका जसनीत कौर और गीता का कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व आम पर उद्गार व्यक्त करने हेतु विशेष आभार व्यक्त किया।

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