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फरीदाबाद

फरीदाबाद: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जागरूकता अभियान चलाया गया।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
फरीदाबाद: हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण पंचकुला के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में  जिला एवं सत्र न्यायाधीश एंव चेयरमेन दीपक गुप्ता व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एंव सचिव  मंगलेश कुमार चौबे के मार्गदर्शन में आज  से एक विशेष ऑनलाइन  जागरूकता अभियान  चलाया गया जिसका उद्देश्य सामाजिक दूरी कायम रखकर सभी नागरिकों को मौलिक कर्तव्यों के बारे में जागरूक करना है, ताकि हम आज अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करके लाॅकडाउन को कामयाब बनाएं।                  

आज उक्त अभियान का आॅनलाइन संचालन  जिला विधिक सेवा प्राधिकरण फरीदाबाद की टीम शिव कुमार ,रविंद्र गुप्ता राजेंद्र गौतम रामवीर तंवर ओम  प्रकाश सैनी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया। उन्होंने ऑनलाइन  बताया कि यदि प्रत्येक व्यक्ति केवल अपने अधिकारों का ही ध्यान रखे और दूसरों के प्रति कर्त्तव्यों का पालन न करे तो शीघ्र ही किसी के लिए भी अधिकार नहीं रहेंगे। करने योग्य कार्य ( कर्त्तव्य) कहलाते हैं। किसी भी समाज का मूल्यांकन करते हुए, केवल अधिकारों पर ही ध्यान नहीं दिया जाता है, वरन् यह भी देखा जाता है कि नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं या नहीं।  राष्ट्र के बेहतर निर्माण, तरक्की व समाज की सुदृढ़ और स्वच्छ आधारशिला की नींव को रखने में मौलिक कर्तव्य सहायक होते हैं। हर नागरिक बेहतर राष्ट्र निर्माण के लिए संप्रभुता तथा अखंडता की रक्षा,

देश की प्रगति और राष्ट्रीय सेवा में में सहयोग, प्राकृतिक तथा सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण, लोकतंत्र को सफल बनाने में सहायता, संस्कृति की रक्षा और संरक्षण, विश्व बंधुत्व की भावना का विकास, स्त्रियों का सम्मान जैसे विशेष कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। भारत के मूल संविधान में केवल मौलिक अधिकारों को ही शामिल किया गया था जबकि मौलिक कर्तव्य प्रारंभ में संविधान में उल्लेखित नहीं थे। ऐसी आशा की जाती थी कि भारत के नागरिक स्वतंत्र भारत में अपने कर्तव्यों की पूर्ति स्वेच्छा से करेंगे, किन्तु 42 वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग 4 क, और अनुच्छेद 51 क, जोड़ा गया, जिसमें दस मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया गया। मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख संविधान में समावेश करने के लिए सरदार स्वर्ण सिंह की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया। मूल कर्त्तव्य मुख्यतः पूर्व सोवियत संघ के संविधान से प्रेरित थे। वर्ष 2002 में 86 वें संविधान संशोधन के बाद मूल कर्त्तव्यों की संख्या 11 हो गई  हे।  

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