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दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय हाइलाइट्स

कांग्रेस की मांग- सुप्रीम कोर्ट के जज से कराई जाए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और उनके परिवार के जमीन घोटाले की जांच।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार द्वारा किए गए जमीन घोटाले की न्यायिक जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराने की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने प्रस्तावित विकास परियोजनाओं तथा मास्टर प्लान से जुड़ी अंदरूनी जानकारी का लाभ उठाकर भूमि खरीदी और भाजपा इस पूरे मामले पर जवाब देने के बजाय चुप्पी साधे हुए है।कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के मीडिया व प्रचार (संचार विभाग) के अध्यक्ष पवन खेड़ा और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री के परिवार को पहले से इस बात की जानकारी थी कि किन इलाकों का विकास होने वाला है और सत्ता का दुरुपयोग करके उन्होंने पहले ही वहां जमीनें खरीद लीं।पवन खेड़ा ने बताया कि मुख्यमंत्री बनने से पहले और बाद में मोहन यादव के परिवार ने सैकड़ों एकड़ जमीन खरीदी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद खरीदी गई 168 एकड़ में से 111 एकड़ जमीन उज्जैन के उस क्षेत्र में है, जहां सिंहस्थ कुंभ प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि उज्जैन के जिस क्षेत्र में 2035 के मास्टर प्लान के तहत विकास कार्य होने हैं, वहां जमीन खरीदी गईं। उन्होंने इस जमीन खरीद की तुलना शेयर बाजार में इंसाइडर ट्रेडिंग (अंदरूनी जानकारी का गलत इस्तेमाल) से करते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के पास मास्टर प्लान और परियोजनाओं से जुड़ी अंदरूनी जानकारी थी।
उन्होंने अपने प्रभाव और शक्ति का दुरुपयोग किया।खेड़ा ने भाजपा को घेरते हुए कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री के परिवार ने महाकाल की नगरी उज्जैन में जमीन घोटाला किया, तो दूसरी तरफ अयोध्या में राम मंदिर का प्रबंधन देखने वालों ने श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए पवित्र दान को लूटने का काम किया। उन्होंने कहा कि यह लूट आस्थावान लोगों की पीठ में खंजर घोंपने के समान है।कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि इतना बड़ा घोटाला होने के बावजूद मोहन यादव मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने हुए हैं, क्योंकि वह आरएसएस से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस खुद को एक संगठन के रूप में पंजीकृत नहीं कराता क्योंकि वह सभी अधिकार तो चाहता है लेकिन कोई जिम्मेदारी या जवाबदेही नहीं लेना चाहता।वहीं जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा का पूरा तंत्र इस भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है और इसी कारण पार्टी सवालों का जवाब देने से बच रही है। उन्होंने कहा कि इस घोटाले पर कांग्रेस पार्टी द्वारा सवाल पूछे हुए 30 घंटे से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन भाजपा पूरी तरह चुप है। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस भ्रष्टाचार पर चुप क्यों हैं? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोहन यादव के परिवार ने जमीन की रजिस्ट्रियों में भी टैक्स चोरी की है। पटवारी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या उनके परिवार ने वास्तव में ये जमीनें खरीदी हैं या नहीं? क्या ये जमीनें उन इलाकों में हैं जहां बाद में सड़क, कॉरिडोर और अन्य विकास परियोजनाएं घोषित की गईं? क्या सरकार इन परियोजनाओं की टाइमलाइन सार्वजनिक करेगी? क्या भाजपा इस जमीन घोटाले की स्वतंत्र न्यायिक जांच के आदेश देगी और क्या मुख्यमंत्री 2023 के बाद अपने परिवार द्वारा खरीदी गई संपत्तियों पर श्वेत पत्र जारी करेंगे?उन्होंने आगे पूछा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार द्वारा तेजी से जो जमीनें खरीदी गईं, उनके लिए धन कहां से आया? मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी किन कंपनियों को विकास परियोजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिला? क्या सरकार संबंधित क्षेत्रों के मास्टर प्लान में हुए बदलावों को सार्वजनिक करेगी? क्या इन परियोजनाओं की जानकारी जमीन बेचने से पहले किसानों को थीं?पटवारी ने भाजपा सरकार के शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए आगे बताया कि मध्य प्रदेश के छह विभागों में करीब 1,000 करोड़ रुपये का तबादला घोटाला हुआ। साथ ही उज्जैन में 500 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को महज एक रुपये में एक ट्रस्ट को सौंप दिया गया, जिसमें मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार ट्रस्टी हैं।उन्होंने मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ओबीसी वर्ग से हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या ओबीसी होने का अर्थ यह है कि कोई गलत काम कर सकता है?

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