अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट ग्रेटर नोएडा : नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र में स्थित सेक्टर-149 कोंडली में मनी ट्रांसफर की दुकान में घुसकर दो बदमाशों ने गन पॉइंट पर दुकान...
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट चंडीगढ़:हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने रविवार को पानीपत स्थित ऐतिहासिक काला आम्ब परिसर का दौरा कर कहा कि इसे हरियाणा...
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट चंडीगढ़: हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने गांव आनंदपुर झरोंठ में लाला खेमचंद चरती लाल गोयल राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय का लोकार्पण...
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट नई दिल्ली:जयराम रमेश,महासचिव, प्रभारी संचार,एआईसीसी द्वारा जारी वक्तव्य: अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता)अधिनियम , 2006, जिसे जन सामान्य...
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस श्रीलंका में बदल रही राजनीतिक परिस्थितियों पर चिंतित है और इन पर अपनी...
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट फरीदाबाद: गुरुकुल इन्द्रप्रस्थ मैनेजिंग कमेटी के महामंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता पं. ओ.पी. शर्मा ने आर्य प्रतिनिधि सभा के पदाधिकारियों द्वारा गुरुकुल की...
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट फरीदाबाद:भारत के किसानों की आमदनी कम होने का कारण भारतीय किसानों की लैंड होल्डिंग साइज एक हेक्टेयर के आसपास होना है जबकि विकसित देश अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया की तुलना में बहुत ही कम है यह बात दिल्ली स्थित भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के सह-आचार्य प्रोफ़ेसर सचिन कुमार शर्मा ने फ़रीदाबाद पंचनद शोध केंद्र द्वारा आयोजित ‘कृषि के भविष्य पर विश्व व्यापार संगठन और भारत की चिंता’ नामक ई-संगोष्ठी में विषय विशेषज्ञ के रूप में कही उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका मेंकिसानों का लैंड होल्डिंग साइज 180 हेक्टेयर के आसपास है वही ऑस्ट्रेलिया में 4000 हेक्टेयर के आसपास है जिस कारण भारत का किसान इन देशों के किसानों के उत्पाद का मुकाबला नहीं कर पा रहा है और उसकी फसल का उत्पादन मूल्य बढ़ता जा रहा है फलस्वरूप वह अक्सर घाटे में अपनी फसल बेचने को मजबूर हो जाता है। ऐसे में सरकारी मदद से वह अपनी आमदनी सुरक्षित कर पाता है। जिस कारण भारत अक्सर विश्व व्यापार संगठन में इन विकसित देशों के निशाने पर रहता है मुख्य वक्ताप्रोफेसर सचिन शर्मा ने आगे कहा कि भारत के किसानों के आर्थिक पिछड़ेपन का एक अन्य कारण उनकी फसल का उन्हें मूल्य नहीं मिलना है। कभी-कभी जब उनकी फसल ज्यादा अच्छी हो जाती है तो वे अपनी फसल का मार्केटिंग नहीं कर पाते हैं और उनको प्राइस फ्लकचुएशन से दो-चार होना पड़ता है। परेशान किसान फसल का अच्छा उत्पादन होने के बावजूद फसल को सड़कों पर फेंक देता हैं। ऐसे में सरकार की ज़िम्मेदारी हो भी बढ़ जाती है प्रोफेसर शर्मा ने कहा कि हर देश स्थिति के अनुसार अपने किसानों की आमदनी को सुरक्षित करने के लिए पॉलिसी बनता है अब वह चाहे अमेरिका हो या यूरोप हो या फिर पाकिस्तान हो या बांग्लादेश हो या फिर अफ्रीकन देश या भारत । कोई भी देश अपने किसानों को मार्केट फोर्सेज पर नहीं छोड़ सकता है और उनको सुरक्षित करने के लिए कोई ना कोई सपोर्ट सिस्टम किसानों को देते हैं। देखिए वर्तमान भारत...