
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा में अनेक ऐसे ऐतिहासिक स्थान हैं जो हमारे गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों के संघर्ष के परिचायक हैं। प्रदेशवासियों को इनसे रूबरू करवाने के लिए हरियाणा में ऐतिहासिक स्थानों का नया कॉरिडोर बनाया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले वीरों की कहानियों की जानकारी मिल सके। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यह निर्देश बृहस्पतिवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में हरियाणा विजन-2047 के अंतर्गत पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की अगले 5 वर्षों की कार्ययोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। उन्होंने पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली में और अधिक सुधार करने तथा हरियाणा को टूरिज्म हब बनाने के संबंध में अधिकारियों को व्यापक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों द्वारा भारत की स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष की गाथा हरियाणा के चप्पे-चप्पे में बिखरी हुई है। सन् 1857 में आजादी की पहली लड़ाई अंबाला कैंट से शुरू हुई जिसके प्रति जन-जागरूकता फैलाने के लिए सरकार द्वारा अंबाला कैंट में विशाल एवं भव्य शहीद स्मारक बनाया गया है। इसमें दर्शाए गए स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित सभी स्थान आज भी अंबाला व अन्य जिलों में मौजूद हैं जिन्हें न केवल संरक्षित करने की जरूरत है बल्कि इन्हें इस प्रकार विकसित करके एक नया कॉरिडोर भी बनाने की आवश्यकता है जिससे आमजन हरियाणा के इतिहास से परिचित हो सकें।

इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को व्यापक कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ.अमित कुमार अग्रवाल ने प्रदेश की प्राचीन सभ्यता, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2047 के विजन के तहत पांच वर्षीय कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य हरियाणा की लगभग 10 हजार साल पुरानी विरासत की खोज, संरक्षण और प्रचार के साथ प्रदेश को सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। योजना के तहत प्रदेश में पुरातात्विक स्थलों की वैज्ञानिक खुदाई, ऐतिहासिक धरोहरों का दस्तावेजीकरण, स्मारकों का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार, संग्रहालयों का आधुनिकीकरण और आमजन की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। प्रदेश में वर्ष 1972 से 2025 के बीच 9 स्थलों पर पुरातात्विक खुदाई की गई है। विभाग द्वारा भविष्य में 21 नए स्थलों पर खुदाई की जाएगी। पहले चरण में 2026-27 के दौरान हिसार जिले के सीसवाली में खुदाई की योजना है। इसके बाद खरड़ अलीपुर में दो चरणों में खुदाई की जाएगी। वर्ष 2029-31 के दौरान बालू, जोगना खेड़ा, तिगड़ाना और राखीगढ़ी में से पुरातात्विक प्राथमिकता के आधार पर स्थलों का चयन किया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 72 संरक्षित स्मारकों की संख्या को वर्ष 2031 तक 120 से अधिक किया जाए। ऐतिहासिक किलों, प्राचीन बावड़ियों, मंदिरों और हवेलियों की पहचान, दस्तावेजीकरण तथा वैज्ञानिक संरक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर पर बने मंदिर के अंदर महाभारतकालीन भाषा लिखी है जिसे संरक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि मंदिर के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ न की जाए। उन्होंने अंग्रेजों के समय बने पुलों व ऐतिहासिक इमारतों को संरक्षित करने के भी निर्देश दिए। डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि विभाग की योजना के तहत पानीपत संग्रहालय, जहाज कोठी संग्रहालय हिसार, दीनबंधु सर छोटू राम संग्रहालय गढ़ी सांपला, जयंती देवी संग्रहालय जींद, भीमा देवी मंदिर संग्रहालय पिंजौर और गुरु गोबिंद सिंह मार्शल आर्ट संग्रहालय कपाल मोचन का नवीनीकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस सूची में शहजादपुर के ऐतिहासिक स्थल तथा नारायणगढ़ थाने के रेस्ट हाउस को भी शामिल करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त पंचकूला में राज्य संग्रहालय, राखीगढ़ी संग्रहालय, कुरुक्षेत्र में सिख एवं रविदास संग्रहालय, झज्जर में स्वामी ओमानंद संग्रहालय तथा कुनाल में संग्रहालय सहित छह नए संग्रहालय विकसित करने की भी योजना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राखीगढ़ी को एक प्रमुख पुरातात्विक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के साथ सरस्वती-सिंधु विरासत कॉरिडोर की अवधारणा पर काम किया जाएगा। इसमें राखीगढ़ी, भरड़ाना , तिगड़ाना, बनावली, कुनाल, बालू, भगवानपुरा और खरड़ अलीपुर सहित प्रमुख स्थलों को जोड़ा जाएगा। इसके साथ कुरुक्षेत्र, अग्रोहा, थानेसर, पिंजौर और अन्य ऐतिहासिक स्थलों की विरासत को भी प्रमुखता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए राखीगढ़ी महोत्सव, हेरिटेज एवं म्यूजियम वॉक, मेले, उत्सव और स्कूलों में हेरिटेज किट वितरण जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएं। संरक्षित स्मारकों और संग्रहालयों में पर्यटकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 की दीर्घकालिक परिकल्पना के तहत हरियाणा के ऐतिहासिक किलों, मंदिरों और स्थापत्य विरासत का दस्तावेजीकरण, शोध प्रकाशन तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग को प्रोत्साहित किया जाए। इससे विरासत संरक्षण के साथ पर्यटन, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को गति देने तथा हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में मदद मिलेगी। बैठक में वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव, मुख्यमंत्री के ओएसडी व स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू तथा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के निदेशक अमित खत्री सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
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