अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:बीते नौ महीनों में ही विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से चार लाख करोड़ रुपये निकाले जाने का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था का बंटाधार कर दिया है। पार्टी ने विदेशी निवेशकों द्वारा इतनी भारी मात्रा में पैसे निकालने, देश में छाए आर्थिक संकट, रुपये की गिरती कीमत, महंगे पेट्रोल-डीजल और शेयर बाजार में भारी गिरावट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा। पार्टी ने लोगों पर कर्ज के बढ़ते बोझ और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।

कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने हाल ही में कर्ज के चलते नोएडा में एक युवक की आत्महत्या का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा देश का हर वर्ग भुगत रहा है। सरकार को सिर्फ भ्रष्टाचार एवं चंद पूंजी पतियों की ही चिंता है। इसीलिए भारतीय बाजार में पूंजी लगाने वाले विदेशी संस्थागत निवेशक भारत से पैसा निकाल रहे हैं। आंकड़ों का हवाला देते हुए गोहिल ने बताया कि जनवरी से सितंबर 2026 तक हर महीने विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली का रुझान रहा और इस अवधि में 4.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी भारतीय बाजार से बाहर गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा सिलसिला देश के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि एनएसई में लिस्टेड कंपनियों से 14.7 से 15.8 प्रतिशत पूंजी निकल गई। 29 सितंबर, 30 सितंबर और 01 अक्टूबर के तीन दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने 29,000 करोड़ रुपये की अपनी बिकवाली की है।गोहिल ने शेयर बाजार में गिरावट का जिक्र करते हुए कहा कि सितंबर 2024 में सेंसेक्स करीब 85 हजार के स्तर पर था, जबकि सितंबर 2026 के अंत में यह करीब 72,500 के स्तर पर आ गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुराने बयानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दोनों ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले लोगों से शेयर बाजार में निवेश करने की अपील की थी। उस समय इन बातों पर भरोसा करके जिन मध्यम वर्गीय लोगों ने शेयर बाजार में निवेश किया, उन्हें अब नुकसान उठाना पड़ रहा है और टैक्स भी देना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि 13 करोड़ से अधिक लोगों को हुए भारी नुकसान की जिम्मेदारी मोदी स्वीकार करें। कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि यूपीए शासन के दौरान पूरे विश्व में आर्थिक मंदी आई थी, लेकिन सरकार ने इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ने दिया था, बल्कि यूपीए के 10 साल के कार्यकाल में सेंसेक्स 398 प्रतिशत बढ़ा था। 2004 में यूपीए सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स शून्य कर दिया था, जिससे मध्य वर्ग को राहत मिली। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार ने इसे 12.5 प्रतिशत और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन को 20 प्रतिशत कर दिया है। साथ में सेक्युरिटीज ट्रांसैक्शन टैक्स भी लगता है। उन्होंने 1991 के आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए यह भी याद दिलाया कि तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने विदेशी संस्थागत निवेश के लिए भारतीय बाजार खोले, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।गोहिल ने भारतीय रुपये के कमजोर होकर प्रति डॉलर लगभग 100 रुपये होने पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री मोदी के पुराने वीडियो दिखाए, जिनमें उन्होंने इसी मुद्दे पर यूपीए सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने आगे कहा कि यूपीए शासन में कच्चे तेल की कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल होने पर भी पेट्रोल-डीजल इतना महंगा नहीं हुआ, जबकि आज इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल भी महंगा है।कांग्रेस नेता ने कहा कि लोगों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और रोजगार की कमी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी समस्याओं ने युवाओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गोहिल ने पूछा कि रुपये के लगातार गिरने पर मोदी चुप क्यों हैं। उन्होंने मोदी सरकार से जवाब मांगा कि विदेशी निवेशक हर दिन भारतीय बाजार से पैसे निकालकर क्यों जा रहे हैं? लगातार नौ महीने से विदेशी संस्थागत निवेशकों में बिकवाली और नकारात्मक रुझान क्यों बना हुआ है? पेट्रोल-डीजल इतना महंगा क्यों है? गोहिल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार की मिलीभगत का भी जिक्र किया। उन्होंने जस्टिस (सेवानिवृत्त) नरीमन और जस्टिस भुइयां द्वारा लाखों मतदाताओं के वोट के अधिकार से वंचित होने को लेकर जताई गई चिंता का हवाला दिया।
Related posts
0
0
votes
Article Rating
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest
Newest
Most Voted

