अजीत सिन्हा/ नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसदडॉ. संबित पात्रा ने आज शनिवार को ओडिशा के भुवनेश्वर में मीडिया को संबोधित कियाऔर कहा कि आज चुनाव आयोग के तीनों कमिश्नरों की बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्तिने कांग्रेस के आरोपों को स्पष्ट किया है। चुनाव आयोग ने बताया कि एसआईआर पर तीनोंकमिश्नरों की पूर्ण सहमति थी और कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ बैठक किसी नीतिगत विषयपर नहीं, बल्कि डेपुटेशन पर आए अधिकारी से संबंधित औपचारिक विषय पर हुई थी। डॉ. पात्रा ने कहा कि कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिएचुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कररही है। उन्होंने कहा कि जनता के समक्ष तथ्यों को रखना आवश्यक है, ताकि संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा और लोकतांत्रिकव्यवस्था सुरक्षित रहे।

डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि सभी को पता है कि परसोंकिस प्रकार एक नामी अंग्रेजी अखबार में चुनाव आयोग पर कुछ आर्टिकल छपने के पश्चाततमाम विपक्षी पार्टियों और खासकर कांग्रेस पार्टी ने हमलावर तेवर में चुनाव आयोगऑफ इंडिया और भारतीय जनता पार्टी पर हमला किया था। उनका दावा था कि चुनाव आयोग औरभारतीय जनता पार्टी मिली हुई है और कहीं न कहीं भारत के लोकतंत्र के साथ खिलवाड़कर रही है। इस कारण से भारतीय जनता पार्टी ने प्रेस वार्ता के माध्यम से अपना विषयजनता के सामने रखा था और बड़े स्पष्ट रूप से अपनी प्रेस वार्ता में यह बताया था कितथ्य क्या थे। कांग्रेस पार्टी ने किस प्रकार विगत दिनों में चुनाव आयोग के साथखिलवाड़ किया था और किस प्रकार सुप्रीम कोर्ट इत्यादि की मोहर एसआईआर पर लगी हुईहै। एसआईआर की जो प्रक्रिया तीसों राज्य के लिए चुनाव आयोग ने निकाली थी, उसमें तीनों इलेक्शन कमिश्नरों की सर्वसम्मति थी। आजदोपहर 3 बजे चुनाव आयोग के तीनों कमिश्नरों की बैठक हुई औरउसके पश्चात चुनाव आयोग ने एक सार्वजनिक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है।भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव आयोग नेमहत्वपूर्ण बातें बताई हैं और एक राजनीतिक पार्टी होने के नाते यह हमारा कर्तव्यहै कि इन बातों को जनता और देश के समक्ष रखा जाए कि किस प्रकार अपने स्वार्थ केलिए कांग्रेस पार्टी संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है। किस प्रकार वहसंवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को तार-तार करना चाहती है। आज की बैठक के बादचुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है किचुनाव आयोग और मुख्यतः भारतीय जनता पार्टी को लेकर जो आरोप लगाया गया था कि चुनावआयोग के अंदर तीनों कमिश्नरों के बीच सहमति नहीं थी, वह विषय इतना गंभीर हो गया था कि कैबिनेट सेक्रेटरी तक गया और उन्हें इसमेंहस्तक्षेप करना पड़ा। साथ ही, यह आरोप लगाया गया था कि भारतीय जनता पार्टी अपनेबचाव के लिए चुनाव आयोग को प्यादे के रूप में इस्तेमाल कर रही है। यह एक बातस्पष्ट रूप से दिखाती है और वह है कांग्रेस पार्टी में परिपक्वता की कमी और देश कीसंवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की एक साजिश। कांग्रेस पार्टी में अपने विषयोंको प्रस्तुत करने में परिपक्वता नहीं है। ऐसा नहीं है कि वह अपरिपक्वता में यह सबकर रहे हैं। उनका उद्देश्य किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करना है और इसके लिए वेकिसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।डॉ. पात्रा ने कहा कि गिरने में भी जिस प्रकार काप्रदर्शन कांग्रेस पार्टी का रहा है, वह अपरिपक्व है।इस प्रकार देश के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हमला नहीं होता है। 2014 के पश्चात कांग्रेस पार्टी के इतिहास को देखें तो ऐसीकोई संस्था नहीं है, जिस पर कांग्रेस पार्टी ने हमला नहीं किया हो।भारतवर्ष की किसी राजनीतिक पार्टी ने भारतीय सेना के ऊपर हमला नहीं किया है, मगर कांग्रेस पार्टी और उससे जुड़ी कुछ सहयोगीपार्टियों ने भारतीय सेना पर भी हमला किया है। सर्जिकल स्ट्राइक हो या एयरस्ट्राइक, उन्होंने उसके भी सबूत मांगे हैं। कांग्रेस नेताराहुल गांधी ने डीजीएमओ यानी डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस जैसे भारतीय सेना केमहत्वपूर्ण पद पर बैठे अधिकारी को भी झूठा और एजेंट कहा था। यहां तक कि सुप्रीमकोर्ट के जजों के ऊपर भी कांग्रेस पार्टी ने जिस प्रकार का हमला किया और उन्हें भीकठपुतली बताया, वह दिखाता है कि कांग्रेस पार्टी ने किसी भी संस्थाको नहीं छोड़ा है।डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि आज की इस चिट्ठी में बड़ेस्पष्ट रूप से बताया गया है कि कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ हुई बैठक एक औपचारिक बैठकथी और उसका रिकॉर्ड भी रखा जाता है। यह केवल सामान्य बैठक नहीं थी, जिसका कोई लेखा-जोखा न हो। चुनाव आयोग ने स्पष्ट रूपसे बताया है कि कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ हुई बैठक चुनाव आयोग के किसी नीतिगतमामले या आईटी विभाग से संबंधित किसी विषय को लेकर नहीं थी। इस बैठक का मुख्यउद्देश्य डेपुटेशन पर चुनाव आयोग में आए एक अधिकारी के विषय में चर्चा करना था।डेपुटेशन पर अधिकारी आते हैं और उनके विषय में सरकार के विभिन्न स्तरों पर चर्चाहोती है। उसी विषय पर कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ बैठक हुई थी। कांग्रेस पार्टी नेइस बैठक को असहमति के कारण हुई चर्चा के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि आज चुनाव आयोग की चिट्ठी में स्पष्ट रूप से यहबात सामने आई है कि एसआईआर तीनों कमिश्नरों के हस्ताक्षर और पूर्ण सहमति के साथहुआ है। एसआईआर पूरे देश के लिए 24 जून 2025 को जारी हुआ था।इसे कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी और उस समय भी भारतीय जनता पार्टी ने सुप्रीमकोर्ट के निर्णय का उल्लेख करते हुए बताया था कि 27 मई 2026 को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर को वैध मानाथा और कहा था कि एसआई आर किया जा सकता है। तीनों कमिश्नर एसआईआर के विषय पर एकमत थेऔर सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसके पक्ष में निर्णय दिया था। कैबिनेट सेक्रेटरी केपास जाना भी किसी नीतिगत विषय को लेकर नहीं हुआ था। इसके बावजूद कांग्रेस पार्टीने इस पूरे विषय को लेकर हमला करने की कोशिश की।भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेसपार्टी यह बात समझ लेनी चाहिए कि इस देश की जनता में समझदारी है। जनता जानती है किआखिरकार विपक्ष यह सब क्यों कर रहा है। किसी भी कीमत पर सत्ता प्राप्त करना हीराहुल गांधी का लक्ष्य है। राहुल गांधी सत्ता प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं और इसीकारण चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट तथा भारत की संवैधानिक संस्थाओं परआक्रमण कर रहे हैं। उनका मोटो है कि हम जीत नहीं सकते हैं, इसलिए लोकतंत्र के खेल को ही बिगाड़ देते हैं। जिसको हम साधारण हिंदी मेंकहते हैं कि “हमें नहीं मिल रहा है, तो चलो खीर खिंडा देते हैं। ताकि किसी को भी न मिले।” मगर भारत जैसे महान देश में इस प्रकार संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने के बाद जनता कांग्रेस और राहुल गांधी को क्षमा कर दे, ऐसा नहीं हो सकता है। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टीआज एक बार फिर बेनकाब हो गए हैं। आज चुनाव आयोग ने जो सार्वजनिक बयान जारी किया है, उसके अंतिम पेज पर एक तस्वीर है, जिसमें तीनों कमिश्नर एक साथ बैठे हुए हैं। तीनोंकमिश्नर एक साथ बैठकर यह प्रेस विज्ञप्ति जारी कर रहे हैं। जिस प्रकार चुनाव आयोगके ऊपर हमला किया जा रहा था, आज दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है।
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