अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे एक निर्माणाधीन मॉल के असुरक्षित बेसमेंट में गिरकर जान गंवाने वाले 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के मामले में प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। जहाँ एक तरफ पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मौत के संघर्ष की खौफनाक दास्तां बयां की है, वहीं दूसरी ओर नोएडा प्राधिकरण ने बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) लोकेश एम ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की है। ट्रैफिक सेल विभाग के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को सुरक्षा में चूक और लापरवाही के चलते तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। जबकि बेसमेंट निर्माण और यातायात सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा गया है।

CEO ने लोटस बिल्डर के आवंटन और निर्माण कार्य की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। CEO लोकेश एम ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं का सुरक्षा निरीक्षण (Safety Audit) दोबारा करें। आदेश में साफ कहा गया है कि यदि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति हुई, तो जिम्मेदारी तय कर सीधे जेल भेजा जाएगा। सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि ठंडे पानी में दो घंटे का मौत से संघर्ष किया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट (No. 101/26) के निष्कर्षों ने दिल दहला दिया है। रिपोर्ट और पुलिस सूत्रों के अनुसार, युवराज की मौत के पीछे केवल पानी नहीं, बल्कि सिस्टम की देरी और कड़ाके की ठंड भी थी। रिपोर्ट में एंटीमॉर्टम ड्राउनिंग बताया गया है फेफड़ों में पानी भरा पाया गया है, जो इस बात का सबूत है कि डूबते समय युवराज ने बचने की भरपूर कोशिश की थी। युवराज करीब दो घंटे तक पानी के बीच खड़ी कार की छत पर मदद का इंतज़ार करते रहे। कड़ाके की ठंड में भीगने के कारण उनकी हालत बिगड़ती गई और अंत में उनका दिल संघर्ष हार गया।शुक्रवार की रात हड्डी गला देने वाली सर्दी थी। बेसमेंट का पानी बर्फ जैसा ठंडा था। डॉक्टरों के मुताबिक, हाइपोथर्मिया (Hypothermia) और अत्यधिक घबराहट (Panic) के कारण युवराज को कार्डियक अरेस्ट आया।इस हादसे को लेकर जनता में भारी आक्रोश दिखा घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा रही। स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उनका कहना था कि प्राधिकरण के अधिकारियों लगातार शिकायत करने बावजूद कोई कार्र्वाही नहीं की गई. इसके लिए स्थानीय सांसद के पत्र को भी अधिकारियों ने तवज्जो नही दी. ठोस कदम उठाया जाता युवराज की मौत नहीं होती. लोगों ने इसे ‘हादसा’ नहीं बल्कि ‘प्रशासनिक हत्या’ करार दिया है।
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