अजीत सिन्हा/नई दिल्ली
आरोपित हरनेक सिंह, जिसके विरुद्ध इंटरपोल रेड नोटिस और लुक-आउट सर्कुलर (एलओसी) प्रभावी थे, को संयुक्त राज्य अमेरिका से निर्वासित कर दिया गया और 09.09.2026 को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नई दिल्ली पर आगमन के समय सीबीआई अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। उसे यथाशीघ्र विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई मामले), पंचकूला, हरियाणा की अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

सीबीआई, दिल्ली द्वारा 2016 में आईपीसी के अंतर्गत आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी तथा जाली दस्तावेजों को असली के रूप में उपयोग करने के अपराधों और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत अपराधों के लिए एक मामला दर्ज किया गया था। जांच से पता चला कि वर्ष 2013 के दौरान, सिंगापुर में रहने या काम करने वाले भारतीय नागरिकों से भारत से संचालित होने वाले ठगों द्वारा स्पूफ किए गए कॉलों के माध्यम से संपर्क किया गया, जिन्होंने सिंगापुर आव्रजन प्राधिकरणों के अधिकारियों का रूप धारण किया था। पीड़ितों को झूठा बताया गया कि उन्होंने हवाई अड्डे पर अपने डिश एम्बार्केशन फॉर्मों में गलत जानकारी दी थी और वे आपराधिक अभियोजन तथा निर्वासन के लिए उत्तरदायी थे।इसके बाद उन्हें पश्चिमी यूनियन मनी ट्रांसफर के माध्यम से भारत में नामित प्राप्तकर्ताओं को कथित समझौता शुल्क/जुर्माने का भुगतान करने के लिए प्रेरित किया गया।जांच में यह स्थापित हुआ कि ठगी गई राशि हरनेक सिंह द्वारा, सह-अभियुक्त आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के साथ मिलकर संचालित एक मनी-ट्रांसफर आउटलेट के माध्यम से प्राप्त की गई थी। आरोपी हरनेक सिंह मई 2013 में भारत से फरार हो गया और बाद में अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कर गया, जहां वह एक दशक से अधिक समय तक फरार रहा।जब हरनेक सिंह फरार बना रहा, तब सह-अभियुक्त आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के विरुद्ध मुकदमे की कार्यवाही उपर्युक्त न्यायालय में पूरी हुई और दोनों को 26.05.2025 को दोषी ठहराया गया।अमेरिका में अमेरिकी न्याय विभाग के माध्यम से उस पर समन और जमानती वारंट तामील किए जाने के बावजूद, हरनेक सिंह विचारण न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने में विफल रहा। परिणाम स्वरूप, विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट, सीबीआई, पंचकूला की अदालत द्वारा 22.04.2024 को उसके विरुद्ध एक खुली तिथि वाला गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। इसके पश्चात सीबीआई ने इंटरपोल माध्यमों के जरिए मामले को आगे बढ़ाया, जिसके परिणामस्वरूप उसके विरुद्ध इंटरपोल रेड नोटिस प्रकाशित किया गया, तथा उसके पासपोर्ट के विरुद्ध लुक-आउट सर्कुलर भी जारी कराया गया।यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून-प्रवर्तन और कूटनीतिक माध्यमों, जिनमें इंटरपोल तंत्र, लुक-आउट सर्कुलर तथा विदेशी प्राधिकारियों के साथ समन्वय का प्रभावी उपयोग शामिल है, के जरिए फरार आरोपियों का पीछा करने की सीबीआई की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह इस बात को भी दोहराती है कि फरार आरोपियों को कानून के समक्ष लाया जाएगा, चाहे कितना भी समय बीत चुका हो।
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