
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए शुरू की गई अभिनव डबल ओटीपी (Double OTP) / ड्यूल ऑथेंटिकेशन प्रणाली को लेकर पुलिस मुख्यालय में एक विस्तृत एवं उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान इस महत्वाकांक्षी पहल की अब तक की प्रगति की समीक्षा की गई और इसे राज्यभर में विस्तारित करने की रणनीति पर गहन चर्चा की गई। एचडीएफसी बैंक के अधिकारियों ने बताया कि यह पहल वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराधों, विशेषकर “डिजिटल अरेस्ट”, फर्जी निवेश योजनाओं और प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन) जैसे मामलों से निपटने के लिए एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरी है। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर एडीजीपी साइबर शिबास कबिराज ने की, जिसमें एसपी साइबर मयंक गुप्ता सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

**गुरुग्राम और पंचकूला में सफल पायलट प्रोजेक्ट**
बैठक में जानकारी दी गई कि डबल ओटीपी प्रणाली को पायलट आधार पर गुरुग्राम और पंचकूला में लागू किया गया, जहां इसे व्यापक सफलता मिली है। इस पहल की शुरुआत एचडीएफसी बैंक के सहयोग से की गई थी, जिसने इसे तकनीकी रूप में लागू करने में हरियाणा पुलिस का पूरा साथ दिया।
**देश के प्रमुख बैंकों की भागीदारी**
इस बैठक में देश के 9 प्रमुख बैंकों—Axis Bank, ICICI Bank, State Bank of India, Canara Bank, IndusInd Bank, Kotak Mahindra Bank, Bank of Baroda, Union Bank of India और Yes Bank—के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान HDFC बैंक के अधिकारियों द्वारा एक विस्तृत प्रेजेंटेशन (PPT) प्रस्तुत की गई, जिसमें डबल ओटीपी प्रणाली के तकनीकी पहलुओं, कार्यप्रणाली और इसके क्रियान्वयन के मॉडल को विस्तार से समझाया गया।
**कैसे काम करती है डबल ओटीपी प्रणाली**
प्रेजेंटेशन में बताया गया कि वर्तमान में अधिकांश साइबर ठगी के मामलों में अपराधी तकनीकी रूप से खाते को हैक नहीं करते, बल्कि पीड़ित विशेषकर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों पर मानसिक दबाव, भय और झांसे में लेकर स्वयं उससे ओटीपी साझा करवाते हैं। ऐसे में पारंपरिक ओटीपी प्रणाली अप्रभावी साबित होती है। डबल ओटीपी प्रणाली इस कमी को दूर करती है। इसके तहत पहले चरण में सामान्य ओटीपी वरिष्ठ नागरिक के मोबाइल नंबर पर आता है। दूसरे चरण में एक अतिरिक्त ओटीपी या पुष्टि कॉल उस व्यक्ति के पास जाती है, जिसे वरिष्ठ नागरिक ने अपने विश्वसनीय संपर्क (परिजन/मित्र) के रूप में नामित किया होता है। लेन-देन तभी पूरा होता है जब दोनों स्तर पर सत्यापन हो जाता है। इस प्रकार यह प्रणाली लेन-देन के दौरान एक “सुरक्षा विराम” (Protective Pause) प्रदान करती है, जिससे संदिग्ध परिस्थितियों में धोखाधड़ी को रोका जा सकता है। यह पहल 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगो के लिए शुरू की गई है जिसका धीरे धीरे विस्तार किए जाने की योजना है ।
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