अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि ‘मोगैंबो मोदी’ लोकतंत्र को तबाह कर वोट चोरी, युवाओं की आवाज दबाने और संस्थाओं पर कब्जा करने का काम कर रहे हैं।नेता प्रतिपक्ष ने वोट चोरी के विरोध में उतरे प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन देते हुए कहा कि देशभर में अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों को डरने की जरूरत नहीं है, विपक्ष उनके साथ खड़ा है, हम मिलकर मोदी सरकार को उखाड़ फेंकेंगे।

तमिलनाडु के चेन्नई में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में आए युवाओं और जेन-जी के विशाल जनसमुद्र से सीधा संवाद करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय ताकतों के इशारों पर चल रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मोदी का खेल अब खत्म हो चुका है और वह अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस दमन की कठोर निंदा करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के लिए पाबंदियां लगाई गईं, इंटरनेट बंद किया गया और पुलिस ने छात्रों के साथ मारपीट की। भाजपा ने अपने गुंडों को खुला छोड़ दिया,

जिन्होंने छात्रों पर हमला किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, आरएस एस प्रमुख मोहन भागवत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लोकतंत्र एवं संविधान पर हमले के लिए न्याय के कटघरे में लाने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती।छात्रों की भूमिका पर जोर देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि एक विद्यार्थी की सबसे बड़ी पहचान उसकी जिज्ञासा होती है। उन्होंने कहा कि नफरत, डर, गुस्सा और समाज में विभाजन पैदा करना भाजपा की राजनीति के प्रमुख हथियार हैं। इसके विपरीत जिज्ञासा और सवाल पूछना समाज की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि इंसान जो भी नया काम करता है, उसकी शुरुआत एक सवाल से होती है। सवाल पूछने से ही विचार आगे बढ़ते हैं और लोकतंत्र मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को सवाल उठाने का अधिकार देता है और मतदान के माध्यम से जनता अपने नेताओं से जवाबदेही सुनिश्चित करती है। पेरियार और तिरुवल्लुवर का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने छात्रों से अपील की कि वे जिन विचारों एवं सिद्धांतों में विश्वास करते हैं, उनके लिए खड़े रहें और सवाल पूछना कभी बंद न करें। छात्रों के ‘राहुल-राहुल’ नारों के बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार की नीतियां तमिलनाडु की भाषा, इतिहास और संस्कृति के खिलाफ हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से तमिलनाडु के स्कूलों के लिए निर्धारित 3,300 करोड़ रुपये रोक दिए गए हैं। इसके अलावा नीट के जरिए एमबीबीएस की सीटों में तमिल-माध्यम के छात्रों की हिस्सेदारी में 87 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल द्वारा निर्णयों पर रोक लगाए जाने के कारण राज्य के 70 प्रतिशत विश्वविद्यालय बिना कुलपति के चल रहे हैं और परिसीमन के माध्यम से तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व एवं आवाज को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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