
अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर आज उस वक्त तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब किसानों के गुस्से का सैलाब उमड़ पड़ा है। 44 गांवों के सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ ‘हल्ला बोल’ करने पहुंच गए। हालात को बेकाबू होने से रोकने के लिए प्राधिकरण प्रशासन और पुलिस ने मौके पर भारी बैरिकेडिंग कर दी और बड़े-बड़े जेसीबी (JCB) लगाकर किसानों का रास्ता रोक दिया।मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात है, लेकिन 44 गांवों के किसान और युवा पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं और सीधे उच्च अधिकारियों से आमने-सामने वार्ता करने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे काफी लंबे समय से अपनी वाजिब मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन प्राधिकरण सिर्फ आश्वासन देता आया है।
प्रदर्शन कर रहे किसानों की मुख्य मांगें हैं, 4% अतिरिक्त विकसित भूखंड का आवंटन किसानों का आरोप है कि 11 साल से उनका 4 प्रतिशत का वैधानिक विकसित भूखंड बकाया है, जिसे प्राधिकरण टाल रहा है। अधिग्रहित की गई जमीनों के बदले स्थानीय ग्रामीण युवाओं को उद्योगों और विकास परियोजनाओं में रोजगार की गारंटी दी जाए। पिछले कई वर्षों से सर्कल रेट न बढ़ाए जाने और आबादी की बैकलीज जैसे स्थानीय मुद्दों का तत्काल समाधान किया जाए।फिलहाल, प्राधिकरण कार्यालय के बाहर किसानों के प्रदर्शन से तनावपूर्ण स्थिति बन गई और माहौल गरमाया हुआ है। किसानों ने साफ अल्टीमेटम दे दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और अधिकारियों के साथ निर्णायक वार्ता नहीं होती, उनका यह आंदोलन और अनशन थमेगा नहीं।
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