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दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय हाइलाइट्स

कांग्रेस ने शोर-शराबा और बहिष्कार को कल्चर बना लिया है, संसदचलने नहीं देनी और सड़क पर अराजकता फैलानी है


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी सड़क पर भीड़जुटाने के बजाय संसद में आए और वहां मुद्दों पर चर्चा करें। वे हाथ में संविधान लेकर घूमते हैं, जबकि संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने का उचित मंच संसद है। संसद काअपमान करते हैं, लोकसभा अध्यक्ष का अपमान करते हैं और न्यायालय का भी अपमान करते हैं,लेकिन बात लोकतंत्र की करते हैं। बचपन में जब हम कबड्डी खेलते थे, हमारी सातवीं कक्षा की टीम लगातार चैंपियन बनती थी। इससे परेशान होकर नौवींकक्षा की टीम ने एक बैठक की और तय किया कि यदि वे जीत नहीं पा रहे हैं, तो रेफरी कोही बेईमान घोषित कर दिया जाए,ताकि अपनी हार का ठीकरा किसी और पर फोड़ा जा सके। लगताहै राहुल गांधी ने भी शायद इसी उदाहरण से सीख ली है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद देश के विभिन्न राज्यों में हुए चुनावों में जनता ने लगातार कांग्रेस और राहुल गांधी कोनकारा है।

सबसे पहले हरियाणा में चुनाव हुए। मतगणना के दिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा औरकांग्रेस के नेता नए कपड़े पहनकर मिठाइयां लेकर पार्टी कार्यालय पहुंच गए थे। शुरुआतीचार राउंड तक उन्हें उम्मीद थी, लेकिन पांचवें राउंड में कांग्रेस की उम्मीदों पर पानीफिर गया। हरियाणा की जनता ने लगातार तीसरी बार भाजपा को जनादेश दिया। पहले दो बार मनोहर लाल खट्टर और तीसरी बार नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया। हरियाणा केबाद महाराष्ट्र में भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद बिहार मेंभाजपा की जीत हुई, दिल्ली में तीन दशक बाद भाजपा सत्ता में लौटी, असम में भाजपा नेजीत दर्ज की, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ाऔर पुडुचेरी में भी भाजपा की सरकार बनी।

लगातार मिल रही चुनावी हार से राहुल गांधीबौखलाए हुए हैं। इसी कारण वे अपनी हार की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय उसका ठीकरा चुनाव आयोग और एसआईआर पर फोड़ते हैं।  शाह ने कहा कि 2014 में एसआईआर नहीं हुआ था, फिर भी कांग्रेस कोहार का सामना करना पड़ा। 2019 और 2024 के चुनावों में भी एसआईआर नहीं हुआ था, इसकेबावजूद कांग्रेस चुनाव हार गई। हरियाणा और महाराष्ट्र में भी एसआईआर नहीं हुआ था, फिरभी कांग्रेस को हार मिली। कांग्रेस अब 13 करोड़ वोट काटे जाने का आरोप लगा रही है।राहुल गांधी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  को चर्चा के लिए चुनौती देने के बजायउन्हें एक पत्र लिखें। भाजपा एसआईआर पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने कोतैयार है।

संसद में इस विषय पर पूरी चर्चा कर ली जाएगी, लेकिन कांग्रेस को झूठ बोलनाबंद करना चाहिए। 13 करोड़ वोटों में लगभग 2.8 करोड़ ऐसे मतदाता हैं, जिनकी मृत्यु होचुकी है। जिन लोगों का निधन हो चुका है, क्या वे मतदान कर सकते हैं? इसके अलावा लगभग6.25 करोड़ लोग ऐसे हैं, जो दूसरे राज्यों में स्थानांतरित हो गए हैं। ऐसे में उनकेपुराने राज्य की मतदाता सूची से नाम हटना स्वाभाविक है। करीब एक करोड़ लोगों के नामतीन से अधिक स्थानों पर दर्ज थे। ऐसे मामलों में एक स्थान पर नाम रहने और अन्य स्थानोंसे नाम हटने की प्रक्रिया आवश्यक है। इस प्रकार लगभग 10 करोड़ नामों को हटाने के पीछेस्पष्ट कारण हैं। शेष लगभग तीन करोड़ नाम ऐसे लोगों के हैं, जो चुनाव आयोग के समक्षसत्यापन के लिए उपस्थित नहीं होते।

इनमें घुसपैठिए भी शामिल हैं, जिनके नाम कांग्रेसने मतदाता सूची में दर्ज कराए हैं। राहुल गांधी घुसपैठियों के समर्थन में जितना विरोधकरना चाहें, करें, लेकिन भारतीय जनता पार्टी का संकल्प स्पष्ट है। पार्टी घुसपैठियोंकी पहचान करेगी, उनके नाम मतदाता सूची से हटाएगी और उन्हें चुन-चुनकर देश से बाहर निकालने का काम करेगी। कांग्रेस की रैली मतदाताओं के अधिकार बचाने के लिए नहीं, बल्कि घुसपैठियोंको बचाने के लिए आयोजित की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्पस्पष्ट है – डिटेक्ट (घुसपैठियों की पहचान करना), डिलीट (मतदाता सूची से नाम हटाना)और डिपोर्ट (देश से बाहर भेजना)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग ने प्रत्येकराजनीतिक दल को बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करने की अनुमति दी है।

ऐसे में जब चुनाव आयोगएसआईआर की प्रक्रिया चला रहा था, तब कांग्रेस के बीएलए क्या कर रहे थे? मतदाता सूचीको लेकर सवाल उठाने के बजाय कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि उसके बीएलए उस समय कहांथे। कांग्रेस के बीएलए मतदाताओं की मदद करने के बजाय पार्टी के भीतर भूपेंद्र सिंहहुड्डा और कुमारी शैलजा के बीच चल रही खींचतान में व्यस्त थे। मतदाता सूची की विसंगतियोंको केवल राहुल गांधी ने ही नहीं देखा है। क्या 10 साल की शादी में 12 बच्चे हो सकतेहैं? क्या मतदाता सूची में बेटा अपने पिता से उम्र में बड़ा हो सकता है? क्या 600 गजके एक मकान में 132 लोग रह सकते हैं? इस प्रकार की विसंगतियां फर्जी मतदाता प्रविष्टियोंकी ओर संकेत करती हैं।

ऐसी मतदाता सूची को दुरुस्त करना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्वहै। राहुल गांधी के शोर-शराबे, आरोपों और घुसपैठियों को बचाने के लिए आयोजित रैलियोंसे भाजपा का संकल्प कमजोर नहीं पड़ने वाला है। देश की जनता कांग्रेस के इन प्रयासोंके साथ नहीं है। भाजपा की प्रत्येक रैली में हजारों की संख्या में लोग जुटते हैं, जबकिकांग्रेस ने दिल्ली में आयोजित अपनी रैली के लिए देशभर से लोगों को बुलाया और 10 लाखलोगों के जुटने का दावा किया। इसके बावजूद, लगभग 70 हजार लोगों की क्षमता वाला मैदानभी आधा खाली रहा। अब जनता राहुल गांधी के बहकावे में आने वाली नहीं है। कांग्रेस नेरैली के लिए 1 नवंबर का दिन चुना। 1 नवंबर 1984 को कांग्रेस के शासनकाल में हुए सिखविरोधी दंगों में हजारों निर्दोष सिखों की निर्मम हत्या की गई थी। शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को उसकी चुनावी गारंटियां याद दिलानाआवश्यक है। तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकारें हैं। चुनाव प्रचार केदौरान राहुल गांधी अपनी गारंटियों को लेकर बड़े-बड़े दावे करते थे और कहते थे कि सभीवादे ‘खटाखट, खटाखट, फटाफट’ पूरे किए जाएंगे। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने 10 गारंटियां दी थीं, लेकिन उनमें से एक भी पूरी नहीं की। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी ने भी जनता को गारंटियां दी थीं। हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन गारंटियों को पूरा करने की दिशा में काम किया है। पंजाबमें किसान एमएसपी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मानको किसानों के हित में सरकार चलाने और एमएसपी सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा सरकारके मॉडल से सीखना चाहिए। हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 24 फसलोंपर एमएसपी देने का निर्णय लिया है। हाल ही में विश्व बैंक के आंकड़ों से पता चला हैकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  के नेतृत्व में करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहरआए हैं। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशनउपलब्ध कराया गया, 49 करोड़ से अधिक लोगों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिला,16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया गया, 13 करोड़ किसानों को किसान सम्मान निधि कालाभ दिया गया, 12 करोड़ शौचालयों का निर्माण कराया गया, 10.5 करोड़ परिवारों को उज्ज्वलायोजना के तहत गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए और 3.5 करोड़ से अधिक लोगों को पक्के मकानदिए गए। यदि राहुल गांधी को सरकार के कामकाज की समीक्षा करनी है, तो उन्हें इन उपलब्धियोंका आकलन करना चाहिए। इंदिरा गांधी ने ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया था, लेकिन गरीबी दूरनहीं हुई। राजीव गांधी ने ‘भ्रष्टाचार हटाने’ के नाम पर सत्ता हासिल की, लेकिन उनकेकार्यकाल में बोफोर्स सहित कई घोटाले सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की10 साल की यूपीए सरकार के दौरान 12 लाख करोड़ रुपये के घपले और घोटाले हुए। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आमतौर पर जब कोई व्यक्तिकाम मांगने जाता है,तो उससे उसके पिछले कामकाज का रिकॉर्ड पूछा जाता है। इसी तरह जनताभी राहुल गांधी से उनके राजनीतिक प्रदर्शन का हिसाब मांगती है, लेकिन वे अपना रिकॉर्डनहीं बताते। 2007 में जब राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के महासचिव बने, तब पार्टी केपास 1,200 विधायक थे। जब वे उपाध्यक्ष बने, तब यह संख्या घटकर 900 रह गई। अध्यक्ष बननेतक विधायकों की संख्या 700 हो गई और वर्ष 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के समय यह संख्याघटकर 600 रह गई। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायकों की संख्या लगातारघटती गई, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के विधायकऔर सांसद लगातार बढ़े हैं। इसके बावजूद राहुल गांधी चुनाव में हार का ठीकरा ईवीएम परफोड़ते हैं। जब केरलम, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी, तब पार्टीने चुनाव परिणामों को स्वीकार करते हुए सरकार का गठन और शपथ ग्रहण क्यों किया? यदिमतदाता सूची और ईवीएम में गड़बड़ी थी, तो फिर इन राज्यों में मिली जीत को स्वीकार क्योंकिया गया? कांग्रेस जहां चुनाव जीतती है, वहां मतदाता सूची सही होती है, लेकिन जहांहारती है, वहां मतदाता सूची और ईवीएम पर सवाल उठाने लगती है। कहावत  है – ‘नाच न जाने आंगन टेढ़ा’। राहुल गांधी को यहस्वीकार करना चाहिए कि देश की जनता उनके नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर रही है। राहुलगांधी हाल ही में वियतनाम के दौरे पर गए थे। राहुल गांधी पारदर्शिता की बात करते हैं,इसलिए उन्हें अपनी विदेश यात्राओं का पूरा विवरण देश की जनता के सामने रखना चाहिए।उन्हें बताना चाहिए कि वे वियतनाम में कितने दिन रहे, किन लोगों से मिले, किस उद्देश्यसे गए और वहां कौन-सा कार्यक्रम था। राहुल गांधी विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पदपर हैं और जनता को उनके सार्वजनिक कार्यों एवं गतिविधियों की जानकारी जानने का अधिकारहै। सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता आवश्यक है। सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगोंका निजी जीवन भी काफी हद तक सार्वजनिक होता है और उन्हें अपने आचरण में पूरी पारदर्शितारखनी चाहिए। शाह ने कहा कि अब देश की जनता को तय करना है कि कानून बनाने कीप्रक्रिया, देश की समस्याओं पर चर्चा और जनकल्याणकारी योजनाओं पर विचार-विमर्श सड़कपर होना चाहिए या संसद में। राहुल गांधी को सड़क पर चर्चा करने का इतना ही शौक है,तो भाजपा को भी कोई आपत्ति नहीं है। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चर्चाके लिए स्थान बताने की चुनौती देते हैं, लेकिन वे किसी भी स्थान का नाम बताएं। हरियाणाके किसी भी चौराहे पर भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष उनसे चर्चा करने के लिए तैयार हैं।यदि राहुल गांधी अपने मुद्दों को लेकर गंभीर हैं और उनके पास ठोस तर्क हैं, तो उन्हेंसंसद में आकर चर्चा करनी चाहिए। भाजपा हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन जबराहुल गांधी सवालों का सामना नहीं कर पाते, तो वे हमेशा की तरह चर्चा से पीछे हट जातेहैं। हरियाणा के सभी भाजपा कार्यकर्ता प्रदेश के घर-घर तक जाएं और चुनाव प्रक्रियाको बदनाम करने के लिए कांग्रेस तथा उसके सहयोगियों द्वारा किए जा रहे प्रयासों को जनताके सामने उजागर करें। लोगों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराएं। कांग्रेस का यह अभियानमतदाता सूची को लेकर नहीं, बल्कि घुसपैठियों को बचाने के लिए है। मतदाता सूची में घुसपैठियोंके नाम नहीं होने चाहिए। उनकी पहचान कर उन्हें मतदाता सूची से हटाना और देश से बाहरनिकालना आवश्यक है। 

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