अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
मरकर भी किसी को नया जीवन कैसे दिया जाता है, इसकी मिसाल पेश की है चंडीगढ़ के एक जांबाज आर्मी अफसर ने। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद, अफसर की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए परिजनों ने अंगदान का फैसला किया। एम्स के पैनल ने प्रक्रिया शुरू की, तभी नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में एक मरीज को तत्काल हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत सामने आई। चंडीगढ़ के आर्मी अस्पताल से हार्ट सुरक्षित निकालकर नोएडा भेजने का फैसला हुआ—लेकिन चुनौती थी समय सीमा की।

ऐसे में दिल को एयरलिफ्ट कर गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट लाया गया। इसके बाद गाजियाबाद और नोएडा पुलिस ने मिलकर वो कर दिखाया जो मिसाल बन गया। दोनों जिलों की पुलिस के आपसी तालमेल से एक अभूतपूर्व ‘ग्रीन कॉरिडोर’ तैयार किया गया। गाजियाबाद पुलिस ने भारी ट्रैफिक के बीच महज 9 मिनट 30 सेकंड में एंबुलेंस को मॉडल टाउन गोल चक्कर तक पहुंचाया। वहां से कमान संभाली नोएडा पुलिस ने, जिसने सिर्फ डेढ़ मिनट के भीतर दिल को सीधे फोर्टिस अस्पताल की इमरजेंसी तक पहुंचा दिया। यानी पूरा सफर सिर्फ 11 मिनट में तय हुआ। इस बीच अस्पताल में डॉक्टरों की टीम पहले से तैयार थी। दिल पहुंचते ही सर्जरी शुरू हुई और मरीज को एक नया जीवन मिल गया। ट्रैफिक पुलिस की इस मुस्तैदी और आर्मी अफसर के इस सर्वोच्च दान की हर तरफ तारीफ हो रही है।
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