अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: हरियाणा पुलिस की राज्य अपराध शाखा के अंतर्गत कार्यरत 22 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स ने वर्ष 2026 के प्रथम छह माह (01 जनवरी से 30 जून 2026) के दौरान उत्कृष्ट कार्य करते हुए 281 गुमशुदा व्यक्तियों का सफलतापूर्वक पता लगाकर उन्हें उनके परिजनों से मिलाया। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि हरियाणा पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ बिछड़े परिवारों को पुनः मिलाने के अपने दायित्व का भी पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ निभा रही है। हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने राज्य अपराध शाखा की मानव तस्करी विरोधी इकाइयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस सराहनीय उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार से मिलाना एक मानवीय उत्तरदायित्व है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गुमशुदगी के पीछे किसी परिवार की पीड़ा, उम्मीद और विश्वास जुड़ा होता है। हरियाणा पुलिस प्रत्येक मामले को पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता से लेते हुए आधुनिक तकनीक, रणनीतिक खुफिया जानकारी, अंतरराज्यीय समन्वय तथा त्वरित कार्रवाई के माध्यम से गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं, बच्चों एवं अन्य कमजोर वर्गों की सुरक्षा हरियाणा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और मानव तस्करी के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत प्रभावी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
इस अवधि में बरामद किए गए 281 गुमशुदा व्यक्तियों में 57 नाबालिग बच्चे शामिल हैं, जिनकी आयु 18 वर्ष से कम थी। इनमें 30 लड़के तथा 27 लड़कियां शामिल हैं। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स ने इन बच्चों की तलाश के लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस, स्थानीय प्रशासन, बाल संरक्षण संस्थाओं तथा अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर लगातार अभियान चलाया। बच्चों को सुरक्षित बरामद कर कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनके परिवारों को सौंपा गया, जिससे अनेक परिवारों की वर्षों पुरानी पीड़ा समाप्त हुई।नाबालिग बच्चों के अतिरिक्त राज्य अपराध शाखा ने 18 वर्ष से अधिक आयु के 224 गुमशुदा वयस्कों का भी सफलतापूर्वक पता लगाया। इनमें 53 पुरुष तथा 171 महिलाएं शामिल हैं। महिलाओं और अन्य कमजोर वर्गों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए टीमों ने प्रत्येक मामले में गंभीरता से जांच की तथा तकनीकी विश्लेषण, फील्ड इंटेलिजेंस और अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से उन्हें सुरक्षित खोजने में सफलता प्राप्त की।पुलिस महानिरीक्षक राज्य अपराध शाखा राकेश आर्या ने बताया कि एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स ने हरियाणा तक सीमित न रहकर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न राज्यों में व्यापक स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाए। आवश्यकता पड़ने पर नेपाल तक समन्वय स्थापित कर गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाया गया। यह दर्शाता है कि राज्य अपराध शाखा केवल राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जहां भी गुमशुदा व्यक्ति के होने की संभावना होती है, वहां तक पहुंचकर उसे सुरक्षित वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास करती है।उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान एक अत्यंत भावुक और उल्लेखनीय मामले में वर्ष 2019 में गुम हुई एक नाबालिग बच्ची का पता उत्तर प्रदेश से लगाया गया। लगभग सात वर्ष बाद उसे सुरक्षित बरामद कर उसके परिवार से मिलाया गया। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि हरियाणा पुलिस किसी भी गुमशुदा व्यक्ति के मामले को समय बीत जाने के कारण बंद नहीं मानती, बल्कि प्रत्येक मामले में तब तक प्रयास जारी रखती है जब तक व्यक्ति का पता नहीं चल जाता।उन्होंने बताया कि इन सफलताओं के पीछे मानव तस्करी विरोधी इकाइयों द्वारा आधुनिक तकनीकी संसाधनों, डिजिटल विश्लेषण, तकनीकी निगरानी, रणनीतिक खुफिया जानकारी, स्थानीय पुलिस, अन्य राज्यों की पुलिस, सामाजिक संगठनों तथा समुदाय के सहयोग का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रत्येक मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए उपलब्ध सभी माध्यमों का उपयोग किया गया, जिससे कम समय में अधिक से अधिक गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाया जा सका।राज्य अपराध शाखा मानव तस्करी के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्य कर रही है। महिलाओं, बच्चों एवं अन्य संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स को लगातार सशक्त किया जा रहा है। इन यूनिट्स का उद्देश्य केवल अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक गुमशुदा व्यक्ति को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाना और मानव तस्करी जैसी गंभीर चुनौती पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना भी है।उन्होंने बताया कि राज्य अपराध शाखा का मानना है कि प्रत्येक गुमशुदगी की रिपोर्ट केवल एक केस फाइल नहीं होती, बल्कि किसी परिवार की उम्मीद, चिंता और भावनाओं से जुड़ी होती है। किसी गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार से मिलाना केवल पुलिस की सफलता नहीं, बल्कि एक परिवार के जीवन में विश्वास, सुरक्षा और खुशियां लौटाने का कार्य है। हरियाणा पुलिस भविष्य में भी नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मानव तस्करी एवं गुमशुदगी के मामलों में इसी प्रकार संवेदनशील व प्रभावी कार्रवाई जारी रखेगी।
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