
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने नोएडा, मानेसर, फरीदाबाद में हुए हालिया मजदूर आंदोलनों का हवाला देते हुए केंद्र की मोदी सरकार और राज्यों की भाजपा सरकारों को जमकर घेरा है। कांग्रेस नेता डॉ. उदित राज ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा नवंबर 2025 से लागू की गई श्रम संहिताओं के कारण ठेका मजदूरों का शोषण चरम पर पहुंच गया है। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस के चेयरमैन डॉ. उदित राज ने देश में मजदूरों की दयनीय स्थिति और उनके भयंकर शोषण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नोएडा व अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों को औसतन 11,000 से 12,000 रुपये प्रति माह वेतन मिल रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जिस शहर में छह-सात हजार रुपये केवल किराया हो, वहां एक मजदूर अपने परिवार का पेट कैसे पालेगा और बच्चों को कैसे पढ़ाएगा?

उन्होंने मौजूदा हालात के लिए मोदी सरकार की चार नई श्रम संहिताओं को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इन नई श्रम संहिताओं ने कांग्रेस सरकारों द्वारा बनाए गए 42 श्रम कानूनों को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले ट्रेड यूनियनें हड़ताल करती थीं तो पूरा देश प्रभावित होता था और सरकारें उनसे बातचीत कर उनकी मांगों पर विचार करती थीं। लेकिन अब माहौल बदल चुका है और हिंदू-मुस्लिम नैरेटिव के कारण मीडिया में मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा लगभग बंद हो गई है। डॉ. उदित राज ने हालिया आंदोलनों के बाद उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार द्वारा बढ़ाए गए वेतन को भी अपर्याप्त बताया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के विरोध के बाद वेतन में थोड़ी वृद्धि की गई है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

डॉ. उदित राज ने आगे कहा कि श्रमिकों की निर्भरता इन नौकरियों पर इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि मनरेगा ने दम तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मनरेगा खत्म करने से मजदूरों का शोषण और पीड़ा बढ़ी है जबकि उद्योगपतियों का मुनाफा बढ़ा है। गांवों में काम न मिलने के कारण मजदूर शहरों में काम करने को मजबूर हैं। डॉ. उदित राज ने बताया कि कर्मचारियों के वेतन से प्रोविडेंट फंड और ईएसआई का हिस्सा तो काट लिया जाता है, लेकिन अक्सर कंपनियां अपना अंश जमा नहीं करातीं। उन्होंने ‘विकसित भारत’ और ‘अमृत काल’ जैसे नारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चार नई श्रम संहिताओं की आड़ में मजदूरों का शोषण हो रहा है। उऩ्होंने कहा कि यही ‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘स्टैंड अप इंडिया’, ‘स्टार्ट अप इंडिया’ का असली चेहरा है।
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