
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
दिल्ली:भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी की टिप्पणी “तमिलनाडु विधानसभा ने वीबी-जी-रैम-जी के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया”
मैं पूछना चाहता हूं: यदि कोई विधेयक भारत की संसद द्वारा विधिवत पारित किया गया है और सर्वोच्च न्यायालय ने उस पर न तो आपत्ति जताई है और न ही उस पर रोक लगाई है, तो क्या किसी राज्य विधान सभा के पास इसके खिलाफ विधेयक पारित करने का संवैधानिक अधिकार है?मैं तमिलनाडु और केरल की सरकारों से भी पूछना चाहता हूं: यदि आपकी राज्य विधानसभा कोई प्रस्ताव पारित करती है, तो क्या किसी जिला पंचायत या नगर निगम के पास यह कहने का कानून पारित करने का अधिकार है कि वह केरल या तमिलनाडु के कानून का पालन नहीं करेगा?

यदि उत्तर नहीं है, तो यही सिद्धांत उन पर भी लागू होता है।
मैं राहुल गांधी से पूछना चाहूंगा: क्या संविधान खतरे में है या नहीं, जब संसद के एक अधिनियम को राज्य विधानसभाओं द्वारा खुले तौर पर इस तरह से अपमानित किया जा रहा है जो संविधान और उसकी भावना के साथ स्पष्ट रूप से विरोधाभासी है? डॉ. राजेंद्र प्रसाद से लेकर बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर तक हमारे पूर्वजों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि संसद द्वारा पारित कोई भी अधिनियम भारत के सभी नागरिकों के लिए बाध्यकारी है।तो उनसे मेरा प्रतिप्रश्न यह है: क्या संविधान अब खतरे में नहीं है? और क्या इससे यह भी नहीं पता चलता कि, उनके लिए संविधान एक ऐसी चीज़ है जिसे वे केवल अपनी जेब में रखते हैं और सुविधा के लिए उपयोग करते हैं?
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