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अपराध दिल्ली

₹30 करोड़ का साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़,ऑनलाइन इंस्टाग्राम शॉपिंग धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया, 7 गिरफ्तार


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
पीएस साइबर नॉर्थ,दिल्ली की टीम ने सोमवार को लगभग 30 करोड़ रुपए का साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस टीम ने ऑनलाइन इंस्टा ग्राम शॉपिंग धोखाधड़ी गिरोह के 7 आरोपितों को गिरफ्तार किए है, जिनके नाम आदित्य मिश्रा, आयु 23 वर्ष, निवासी बर्रा-7, कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश, बीबीए स्नातक,आयुष वर्मा, आयु 22 वर्ष, निवासी बर्रा-7, कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश; बीसीए स्नातक,अभिषेक पाल, आयु 23 वर्ष, निवासी नौरिया खेड़ा, दादा नगर, कानपुर, उत्तर प्रदेश; आईटीआई योग्यता धारक,राहुल कुमार, आयु 30 वर्ष, निवासी पिपौरी, पोस्ट-मर्दनपुर, कानपुर, उत्तर प्रदेश; बीए स्नातक,हिमांशु राणा, आयु 29 वर्ष, निवासी पिपौरी, पोस्ट-मर्दनपुर, कानपुर, उत्तर प्रदेश; बीए स्नातक,उदित प्रताप सिंह भदौरिया, आयु 22 वर्ष, निवासी कैपिटल विहार, पतारसा, मर्दनपुर, कानपुर, उत्तर प्रदेश; बीबीए स्नातक और गौरव पांडेय, आयु 24 वर्ष, निवासी किदवई नगर, कानपुर, उत्तर प्रदेश; एमबीए उपाधिधारी है। पुलिस ने इनके कब्जे से 20 मोबाइल फोन, 45 सिम कार्ड, 28 चेकबुक, 33 डेबिट कार्ड, 39 पीओएस मशीन, 15 स्कैनर, 05 स्टैम्प, 07 आधार कार्ड, 05 पैन कार्ड, 02 लैपटॉप, 21 बैंक खाता संबंधित दस्तावेज बरामद किए है। 

डीसीपी, नार्थ डिस्टिक, निहारिका भट्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि पीएस साइबर नॉर्थ में शिकायतकर्ता से एक शिकायत प्राप्त हुई, जो इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश की निवासी है और वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में अध्ययनरत है, जिसमें एनसीआरपी पोर्टल पर पंजीकृत ऑनलाइन धोखाधड़ी ₹6,450/- के संबंध में शिकायत दर्ज की गई थी, जिसका पावती संख्या 30804260030782 है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने“Kavya _kurti_hub” खाते के माध्यम से एक कुर्ती के लिए इंस्टाग्राम विज्ञापन देखा और उसे व्हाट्सएप नंबर 9057898XXX पर भेज दिया गया, जहां उसने ₹799 का ऑर्डर दिया और क्यूआर कोड के माध्यम से अग्रिम रूप से ₹400 का भुगतान किया। इसके पश्चात, उसे मोबाइल नंबर 769100XXXX से पार्सल डिलीवरी के संबंध में कॉल प्राप्त हुई और उससे एक पास कोड प्रदान करने के लिए कहा गया। विक्रेता से संपर्क करने पर, उसे कोड जनरेट करने के लिए वापसी योग्य शुल्क के रूप में ₹1,150 का भुगतान करने के लिए प्रेरित किया गया, जिसके बाद इसी प्रकार के बहाने पर ₹2,000, ₹2,650 और ₹650 के और भुगतान कराए गए। भुगतान प्राप्त करने के बावजूद, कथित विक्रेता ने न तो पार्सल की डिलीवरी की और न ही राशि वापस की। तदनुसार, एफआईआर संख्या 36/ 2026 दिनांक 04.09.2026 को पीएस साइबर नॉर्थ में दर्ज की गई और जांच शुरू की गई। उनका कहना है कि एसआई अरविंद यादव के नेतृत्व में एचसी हिमांशु और एचसी रवि को शामिल करते हुए एक समर्पित टीम का गठन किया गया, जो इंस्पेक्टर रोहित गहलोत, एसएचओ/साइबर पीएस नॉर्थ के पर्यवेक्षण में, विशेष धत्तरवाल, एसीपी/ऑपरेशन्स/नॉर्थ के मार्गदर्शन में, तथा  राम दुलेश मीना, अतिरिक्त डीसीपी/नॉर्थ और डीसीपी/नॉर्थ जिला के समग्र पर्यवेक्षण में कार्यरत थी। जांच के दौरान, लगभग 200 मोबाइल नंबरों और आईएमईआई, बैंकिंग लेनदेन तथा फ्लिपकार्ट, जोमैटो और ब्लू डार्ट से प्राप्त डिजिटल अभिलेखों का व्यापक तकनीकी विश्लेषण किया गया। ठगी गई राशि का पता पाइन लैब्स मर्चेंट के माध्यम से किसेंटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, ग्रेटर नोएडा के केनरा बैंक खाते तक लगाया गया, जो आदित्य मिश्रा और उदित प्रताप सिंह भदौरिया से संबद्ध था।उनका कहना है कि संदिग्धों के ठिकानों में बार-बार बदलाव के बावजूद, निरंतर निगरानी के परिणाम स्वरूप 16.10.2026 को ग्रेटर नोएडा में समन्वित छापेमारी की गई, जिसमें छह आरोपितों आदित्य मिश्रा, आयुष वर्मा, अभिषेक पाल, हिमांशु राणा, राहुल कुमार और गौरव पांडे को गिरफ्तार किया गया। आगे की कड़ियों के आधार पर 21.10.2026 को कानपुर से उदित प्रताप सिंह भदौरिया की गिरफ्तारी हुई, जिससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या सात हो गई। ग्रेटर नोएडा में किराए के परिसरों पर की गई छापेमारी में तीन संदिग्ध फर्में—किजेंटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, एग्जीक्यूटिव एज और नेक्सकोर—का पता चला। कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। जब्त साक्ष्यों का विश्लेषण अन्य साइबर धोखाधड़ी मामलों से आगे के संबंध स्थापित करने के लिए जारी है।उनका कहना है कि पूछताछ के दौरान, आदित्य मिश्रा ने खुलासा किया कि उसने उदित प्रताप सिंह भदौरिया, आयुष वर्मा और अभिषेक पाल के साथ मिलकर कथित रूप से फर्जी फर्में स्थापित की थी और चालू बैंक खाते खोले थे, जिन्हें ₹25,000 के मासिक भुगतान के बदले हिमांशु राणा और राहुल कुमार को सौंप दिया गया था।हिमांशु और राहुल ने बताया कि उन्होंने आगे इन खातों को बैंकिंग किटों और लिंक्ड सिम कार्डों के साथ गौरव पांडे को उपलब्ध कराया। गौरव कथित रूप से बैंक खाता आपूर्ति सिंडिकेट संचालित करता था और कमीशन के आधार पर मैक्सवेल और सॉलिटेयर के रूप में पहचाने गए व्यक्तियों को ये खाते प्रदान करता था। बताया गया है कि ये लोग अमेरिका देश कोड वाले व्हाट्सएप नंबरों के माध्यम से संपर्क करते थे।
कार्यप्रणाली:
जांच में यह सामने आया कि एमबीए डिग्रीधारी गौरव पांडे ने कथित रूप से अपने सहयोगियों को चालू और बचत बैंक खाते खोलने के लिए व्यक्तियों की व्यवस्था करने हेतु लगभग ₹25,000 प्रति माह के मौद्रिक प्रोत्साहन के बदले वित्तपोषित किया। कथित रूप से इस गिरोह ने परिसर किराए पर लिए, फर्जी फर्में स्थापित की और बैंक खाते खोलने के लिए दस्तावेज तैयार किए। खाता किट और उनसे जुड़े सिम कार्ड हिमांशु राणा और राहुल कुमार द्वारा एकत्र किए गए तथा कमीशन के आधार पर गौरव पांडे के माध्यम से मैक्सवेल और सॉलिटेयर को आपूर्ति किए गए। इन खातों का कथित रूप से साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से प्राप्त धन को प्राप्त करने और उसे आगे भेजने के लिए उपयोग किया गया।

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