
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ सुधांशुत्रिवेदी ने आज बुधवार को नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित किया और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध अनर्गल बयानदेकर वे अपनी विफलताओं से ध्यान भटका रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर संसद में बहस से भागने,भ्रामक दावे करने और लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान करने का आरोप लगाया। राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि भारत में अनादिकाल से शास्त्रार्थ कीपरंपरा रही है। वैदिक काल से आज तक हम ही वह विचारधारा हैं, जिसका प्रतिनिधित्व शास्त्रार्थकी परंपरा से जुड़ा है। हम बहस की परंपरा को मानते हैं, जबकि राहुल गांधी इसे नहींमानते।

राहुल गांधी अपने मन को सुकून देने के लिए मॉक डिबेट करवा सकते हैं और जो करनाचाहें, कर सकते हैं, क्योंकि वह पहले से ही लोकतंत्र, संविधान और संसद का मखौल उड़ारहे हैं। उनकी यह मांग भी संसद का मखौल उड़ाने के समान है। राहुल गांधी ने पंजाब मेंजाकर जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया, वह भारत की जनता का अपमान है। रामलीला मैदानमें राम-विरोधी लोगों के एकत्र होने और देश-विरोधी शक्तियों के सुर में सुर मिलानेके बाद अपनी भयानक विफलता से ध्यान भटकाने के लिए यह केवल एक ओछा हथकंडा है। डॉ त्रिवेदी ने कहा कि दुर्भाग्य से भारत के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधीहैं और यह कांग्रेस पार्टी के लिए और भी बड़ा दुर्भाग्य है।

राहुल गांधी अपने स्वभावकी उद्दंडता और मन की कुंठा से वशीभूत होकर एक बार फिर पंजाब में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में तमाम प्रकार कीअनर्गल बातें करते दिखाई पड़े। जिस तारीख तक पंजाब से नशा समाप्त करने का संकल्प लियागया है, राहुल गांधी कह रहे हैं कि तब तक सरकार ही नहीं रहेगी। यह बड़े आश्चर्य कीबात है कि राहुल गांधी को संकल्प की दृढ़ता और उसे सिद्धि में परिवर्तित करने की क्षमताका ज्ञान नहीं है। यदि सीखना है, तो हमारे नेताओं से सीखिए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा। राहुल गांधीकान खोलकर सुन लें कि नक्सलवाद समाप्त होने के साथ ही पिछले 12 महीनों में एक ऐसा रिकॉर्डबना है, जो पिछले 47 वर्षों में पहली बार हुआ है। इस दौरान सीआरपीएफ की कोई कैजुअल्टीनहीं हुई है।

राहुल गांधी पहले कहते थे कि ‘Poverty is in state of mind’ यानी गरीबीमन की एक अवस्था है। आज वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत में एक्सट्रीमपॉवर्टी अब केवल 2.6% रह गई है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी ने2011 में कहा था कि आतंकवाद को नियंत्रित करना पूर्णतः संभव नहीं है। आज भारत आतंकवादपर इतना प्रभावी नियंत्रण करने में सफल हुआ है कि दक्षिण कश्मीर के तीन-चार जिलों कोछोड़कर संपूर्ण भारत से आतंकवाद समाप्त हो गया है। राहुल गांधी की हर भविष्यवाणी गलतसिद्ध होती रही है। उन्होंने एलआईसी को निपटा देने की बात कही थी, लेकिन आज एलआईसीऑल-टाइम हाई प्रॉफिट में है। उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक के बारे में भी ऐसी ही बातेंकही थीं, जबकि वह भी ऑल-टाइम हाई प्रॉफिट में है। इसी प्रकार, राहुल गांधी ने कहा थाकि एचएएल बर्बाद हो गई है, जबकि वह भी ऑल-टाइम हाई प्रॉफिट में है।

राहुल गांधी नेवैक्सीन के बारे में भी अनाप-शनाप बातें कही थीं। वह कितना झूठ बोलते हैं, इसका प्रमाण16 मई 2021 का उनका ट्वीट है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारत सरकार ने बच्चोंकी वैक्सीन विदेश भेज दी। जबकि कोई भी जांच कर सकता है कि मई 2021 तक भारत ही नहीं,बल्कि दुनिया में बच्चों की कोई वैक्सीन बनी ही नहीं थी। बच्चों की पहली वैक्सीन जनवरी2022 में ट्रायल के बाद बनी थी। कांग्रेस पार्टी को तय करना चाहिए कि विक्षिप्त मनःस्थितिवाले एक विचित्र और कुंठित नेता के नेतृत्व में वह अपनी आगे की रणनीति किस प्रकार तयकर सकती है। डॉ त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी ने पंजाब में परविंदर सिंह केघर जाने का प्रयास किया था, लेकिन वहां के लोगों ने उन्हें जाने से मना कर दिया।

राहुलगांधी के प्रति यह धारणा है कि उनकी पार्टी ने सिखों के साथ नरसंहार किया था। इसकेबावजूद, उसी नरसंहार की बरसी पर जिद करते हुए राहुल गांधी ने 1 नवंबर को रैली की,जोनितांत असफल साबित हुई। अपनी रैली की असफलता को छिपाने के लिए राहुल गांधी अब अपनेकुछ तथाकथित सलाहकारों की सलाह पर ऐसे विचित्र बयान दे रहे हैं। राहुल गांधी कहते हैंकि वह डिबेट करने के लिए तैयार हैं, लेकिन भारत के संविधान निर्माताओं ने बहस के लिएसर्वोच्च स्थान संसद को निर्धारित किया है। यदि कोई व्यक्ति नेता प्रतिपक्ष है और वहयह कहता है कि वह सदन में बहस नहीं करना चाहता, तो यह भारत के संविधान निर्माताओं कीभावना और संविधान की मूल भावना का अपमान है।

जब आप संसद के सदस्य हैं और लाखों लोगोंने आपको चुनकर भेजा है,तो आप उन लोगों के साथ-साथ देश के करोड़ों लोगों द्वारा चुनकरभेजे गए सभी सांसदों का मखौल उड़ा रहे हैं। सांसदों को संसद में इसलिए भेजा जाता है,ताकि वे विषयों पर बहस करें, लेकिन राहुल गांधी सदैव बहस से भागते हैं। भाजपा सांसद ने कहा कि वर्ष 2024 में अविश्वासप्रस्ताव आया,तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बोलना शुरू किया और राहुलगांधी भाग गए। मणिपुर के विषय पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बोलना शुरूकिया, तब भी राहुल गांधी भाग गए। जब भी भाजपा की ओर से किसी विषय पर बोलना शुरू कियाजाता है, तो राहुल गांधी भाग खड़े होते हैं। इसीलिए कहा जाता है, ‘सदा युद्ध से भागतेनाम बड़े रणधीर, और भाग्यचंद की आज तक सोई है तकदीर।’ राहुल गांधी को यह भी समझना चाहिएकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले 12 वर्षों से एनडीए के सर्वसम्मत नेताहैं, जबकि राहुल गांधी ‘इंडी’ गठबंधन के नेता नहीं हैं। लोकसभा और राज्यसभा में ‘इंडी ‘गठबंधन नाम की किसी चीज का अस्तित्व नहीं है। राहुल गांधी यूपीए के भी चेयरमैन नहींरहे हैं। यूपीए की चेयरमैन भी सोनिया गांधी ही रही हैं। राहुल गांधी ने हाल ही मेंमॉक पार्लियामेंट बनाई थी। बिगड़े दिल शहजादे को खुश करने और उनके दिल को सुकून देनेके लिए, जैसे किसी जमाने में दरबारी लोग उनकी पसंद के अनुसार चीजें सजाया करते थे,उसी तरह वह एक मॉक डिबेट भी करवा सकते हैं। उनकी मॉक पार्लियामेंट में दूसरा पक्ष थाही नहीं। यानी वहां भी बहस की कोई गुंजाइश नहीं थी और केवल एकतरफा भाषण हुआ।
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