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वीडियो: एक ट्वीट करने पर पीएमओ में बैठे गोडसे के भक्तों ने इतने संगीन दो FIR मुझ पर दर्ज करवा दिए- जिग्नेश मेवाणी।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने आज एआईसीसी मुख्यालय में मीडिया को संबोधित किया:जिग्नेश मेवाणी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पीएमओ में बैठे गोडसे के कुछ भक्तों के द्वारा मुझ पर जो एफआईआर हुए, उसपर मैं आज ये प्रेस वार्ता कर रहा हूं।

साथियों, सबसे पहला मेरा सवाल है कि गुजरात में पिछले 8-10 सालों के दौरान 2-4 नहीं, 22 एग्जाम के पेपर लीक हुए, उसमें कोई इनवेस्टिगेशन नहीं, कोई जांच नहीं, कोई गिरफ्तारियां नहीं। एक -दो नहीं, 22 एग्जाम के पेपर लीक हुए हैं। गुजरात में मुंद्रा के पोर्ट पर 1 लाख 75 हजार करोड़ का ड्रग्स पाया गया, I repeat, जिसकी इंटरनेशनल मार्केट में कीमत 1 लाख 75 हजार करोड़ है, उतना ड्रग्स पाया गया, जिस मुंद्रा के पोर्ट पर। यदि आपके घर में 10 ग्राम भी ड्रग्स पकडा जाए पत्रकार साथियों, आपको भी नहीं छोड़ेंगे, लेकिन गौतम अडानी साहब, उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं, कोई एफआईआर नहीं, कोई जांच नहीं और कोई इनवेस्टिगेशन और कोई इंटेरोगेशन के लिए एक बार भी नहीं बुलाया।

गुजरात भाजपा की एक दलित समाज की महिला कार्यकर्ता ने भाजपा के सिटिंग मंत्री के खिलाफ बलात्कार करने का,लगातार बलात्कार करने का इल्जाम लगाया, This is discussed in the assembly of Gujarat. गुजरात की विधानसभा में भी इस मामले को उठाया गया। उस मामले पर भी कोई इनवेस्टिगेशन नहीं, कोई जांच नहीं, कोई एफआईआर नहीं। इस देश में धर्म संसद के नाम पर एक स्पेसिफिक समुदाय के लोगों के जैनोसाइड का कौल दिया जाता है। कोई इनवेस्टिगेशन नहीं होता, कोई जांच नहीं होती। कुछ लोग पब्लिक्ली कहते हैं कि “गोली मारो सालों को”, फिर भी उसपर इनवेस्टिगेशन नहीं होती है, कोई जांच नहीं होती, एफआईआर नहीं होती और मेरे केवल एक ट्वीट करने पर पीएमओ में बैठे गोडसे के भक्तों ने इतने संगीन दो एफआईआर मुझ पर कर दिए।
What does it show? यह क्या दिखाता है? गुजरात की सरकार, प्रधानमंत्री और देश की मोदी सरकार की मंशा क्या है? उनकी इंटेशन क्या है, उनकी प्रायोरिटी क्या है? 1 लाख 75 हजार करोड़ का ड्रग्स पकड़ा जा रहा है, उसमें आप किसी की जांच नहीं करना चाहते। एक दलित महिला भाजपा के मंत्री के खिलाफ बलात्कार का इल्जाम लगाती है, आप उसमें कोई जांच नहीं करना चाहते। एक-दो नहीं, 22 एग्जाम के पेपर लीक होते हैं, आप उसमें कोई जांच नहीं करना चाहते और लेकिन मैंने केवल एक ट्वीट कर दिया और ट्वीट का कंटेंट क्या है – मैंने केवल यही कहा कि गुजरात के हिम्मतनगर, खंभात और वेरावल इन तीन जगह पर, जहाँ पर कम्युनल टेंशन हुआ है, कम्युनल क्लैशेस हुए हैं, तो क्योंकि जब प्रधानमंत्री गुजरात से हैं और वो गुजरात के दौरे पर हैं, गुजरात आने वाले हैं, तो मैं उनको विनती करता हूं कि महात्मा का मंदिर बनाने वाले प्रधानमंत्री मोदी साहब, इस कम्युनल इशू को देखते हुए जब आप गुजरात आ रहे हैं, तो प्लीज शांति और अमन बनाए रखने की अपील करें। मैंने उनको यही अपील की है कि आप गुजरात की जनता को कहें कि दंगे- फसाद ना हो, पिस और हार्मोनी मेंटेन करिए। क्या इस देश में शांति और अमन बनाए रखने की अपील प्रधानमंत्री करे, ये कहना कौन से कानून के तहत ये ऑफेंस बनता है और यदि उनको तकलीफ मिर्ची इस बात से लगी कि मैंने कहा कि गोडसे के भक्त हैं। मैं इस प्रेस वार्ता के माध्यम से उनको चैलेंज करता हूं कि भैया, लाल किले के प्राचीर पर चढ़कर गोडसे मुर्दाबाद का नारा एक बार लगा दीजिए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। आज जो भी सब्जेक्ट पर इस देश के न्यूज चैनल पर डिबेट हों, वहाँ भाजपा के सारे पत्रकार कहें कि गोडसे मुर्दाबाद, तो सवाल ही नहीं रहेगा। लेकिन आप शांति और अमन का अपील नहीं करना चाहते और 19 तारीख को मेरे खिलाफ एफआईआर होती है। मैं सीटिंग एमएलए हूं, अचानक पुलिस रातों-रात 2500 किलोमीटर की दूरी तय करके असम से गुजरात आती है। 19 तारीख को एफआईआर हुई, मुझे समझ नहीं आ रही है कि उन्होंने कितने बजे फ्लाइट बुक कराई। कोकराझार पुलिस स्टेशन और गुवाहाटी 4 घंटे की दूरी है, साढ़े चार घंटे होते हैं, वहाँ से आप गुवाहटी पहुंचते हो। गुवाहटी से बैंगलोर की फ्लाइट, बैंगलोर से अहमदाबाद की फ्लाइट, अहमदाबाद से आप 140 किलोमीटर दूर वडगाम मेरे कास्टिट्यूंसी मुझे आप गिरफ्तार करने आए। मतलब कहीं ना कहीं एफआईआर करने से पहले आपके फ्लाइट की टिकट बुक हो चुके थे। गिरफ्तार करके मुझे ले गए, तब मुझे बता नहीं रहे। उनको मालूम नहीं कि मैं वकील हूं। मुझे वो बोल नहीं रहे कि कौन सा मुकदमा है। एफआईआर की कॉपी नहीं दे रहे, कौन सी सेक्शन लगी, वो नहीं बता रहे, मेरे परिवार से, मेरे माता-पिता से बात करने की अनुमति नहीं। मेरे वकील से बात नहीं करने दी। यहाँ तक कानून की धज्जियां उड़ा कर एक एमएलए का जो प्रोटोकॉल और प्रिवलेज होता है, उसकी तरफ पूरा ब्लाटन डिसरिकोर्ड करते हुए गुजरात की विधानसभा के स्पीकर को भी बताया नहीं, उनको भी बताया नहीं, उनको भी जानकारी नहीं थी, उनको भी पता नहीं थी कि हमारे एक सीटिंग एमएलए को असम पुलिस गिरफ्तारी करने के लिए आई है। वो जब असम पहुंचे, शायद उसके बाद मैं उनकी कस्टडी में गया, तब शायद गुजरात की विधानसभा के स्पीकर को बताया गया कि आपके एमएलए को हम लोगों ने गिरफ्तार किया है। तो मैं तो मानता हूं, ये असम की पुलिस ने गुजरात की अस्मिता और गुजरात के गौरव को खंडित किया है और ये गुजरात की सरकार के लिए शर्मिंदगी की बात होनी चाहिए। इसमें उनकी इतनी थू-थू हुई, बावजूद उसके उनको शर्मिंदगी महसूस नहीं हुई। एक महिला को आगे किया और दूसरा एफआईआर मुझ पर करवाया। मैं मानता हूं इससे बड़ी बुजदिली और कायरता कुछ नहीं हो सकती। मैं ये कहना चाहूंगा कि ये है 56 इंच की कायरता, ये है 56 इंच की बुजदिली। आप एक महिला को आगे करके 2,500 किलोमीटर दूर बैठे किसी सीटिंग एमएलए के खिलाफ इतना फर्जी मुकदमा करते हैं और ये केवल मेरा एलिगेशन नहीं, मेरे पास असम की जुडिशियरी का बेल ऑर्डर है। क्या कहती है असम की ज्यूडिशरी – “Instant FIR in the second information and seems to be manufactured”, ये एफ आई आर मैन्युफैक्चर्ड है, ये असम का जुडिशयरी कह रहा है। उनका कमेंट है, “This FIR is not maintainable”. मेरे खिलाफ कोई मुकदमा बनता ही नहीं। असम की जुडिशयरी कह रही है, “Commission of the offence under the section 353 IPC prima- facie is not established”. प्राइमाफेसी मेरे खिलाफ कोई केस बनता ही नहीं। “No sane person will ever try to outrage the modesty of a lady police officer in presence of two male police officers”, ये असम की जुडिशयरी कह रही है। “The contrary to the FIR the victim woman has deposed a different story before the learned magistrate”. जज महोदय के सामने उन्होंने कुछ कहा और एफआईआर की जो सूचना है, एफआईआर में जो जानकारी है, जो एलिगेशन है मेरे खिलाफ, दोनों के बीच में बहुत अंतर है। कौन कह रहा है, ये बेल का ऑर्डर कह रहा है। इसी ऑर्डर में जज महोदय ने लिखा है – In view of the above testimony of the victim woman the instant case is manufactured for the purpose of keeping the accused Shri Jignesh Mevani in detention for a longer period abusing the process of court and abusing the process of law. Instant FIR is not maintainable in the court of law. Hon’ble Guwahati Court may perhaps consider, directing the Assam Police to reform itself.कोर्ट का ऑर्डर कह रहा है कि हम गुवाहाटी के हाईकोर्ट को अपील करेंगे कि असम पुलिस अपने चरित्र को सुधारे। ये असम पुलिस क्या कह रही है, क्या कर रही है, किसके इशारों पर कर रही है? किसके कहने पर कर रही है? ज्यूडिशरी ने यहाँ तक कहा कि आपकी कस्टडी में कोई एक्यूज्ड है और आपको सब कुछ दूध का दूध पानी का पानी करना है, तो आप अपने बदन पर सीसीटीवी कैमरा लगाइए। इस प्रकार का कमेंट असम की ज्यूडिशरी को करना पड़ा। इससे ज्यादा शर्मिंदगी की बात क्या हो सकती है कि आप एक महिला का इस्तेमाल एक सीटिंग एमएलए को बदनाम करने के लिए कर रहे और इतना स्ट्रोंग ऑब्जर्वेशन होने के बावजूद भी एक बार भी असम की सरकार को शर्मिंदगी महसूस नहीं हुई।

तो सवाल ये है कि असम की सरकार को अचानक क्या मन हुआ कि 2500 किलोमीटर दूर बैठे गुजरात के उस विधायक जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ एफआईआर करे।

मेरा ये दावा है, मेरा ये आरोप है कि भारत के प्रधानमंत्री के ऑफिस से डिजाइन हुआ कॉन्सपिरेसी है। गुजरात में चुनाव है और वो चाहते हैं कि मुझे बदनाम किया जाए, मुझे डिस्ट्रोय किया जाए और यहाँ तक मानो मैं कोई आतंकवादी हूं, मेरे घर पर छापे किए। मेरे कंप्यूटर को सीज किया, मेरे एमएलए क्वार्टर पर रेड़ की, लैपटोप को सीज किया। मेरे कास्टिट्यूंसी के ऑफिस गए, मेरे टीम के लोगों के लोगों के मोबाइल जब्त कर लिए। टीम के लोग जब अपने घर पर नहीं मिले, उनके मां बाप के मोबाइल जब्त कर लिए।

मैं साथियों, कहना चाहता हूं, हम लोग पेगासस का ऐरा (Era) में जी रहे, जहाँ पर भारत इस मोदी सरकार के खिलाफ एलिगेशन है कि इस सरकार ने पत्रकार, ह्यूमन राइट्स का काम करने वाले वकील और विपक्ष के नेताओं के मोबाइल और कंप्यूटर में स्पाइवेयर को घुसेड़ा है, इंस्टॉल किया है गैर कानूनी तरीके से इस दौर में जब जी रहे हैं। तो मुझे एप्प्रिहेंशन चिंता क्यों ना हो कि जो मेरा कंप्यूटर लिया, जो मेरे लैपटॉप सीज किया, जो मेरे मोबाइल के इंस्ट्रूमेंट लिए, मेरे टीम के लोगों के मोबाईल जब्त किए, उसमें there is every chance by now they move planted something. अब तक उन्होंने उसमें कुछ प्लान किया हो सकता है।

तो सवाल ये हो रहा है कि इतना सारा फर्जीवाड़ा करने में प्रधानमंत्री को क्या रुचि है? इतना सारा फैब्रिकेटेड केसेस करके ढाई हजार किलोमीटर दूर एक जेल में डालकर इस देश के लोकतंत्र को, भाजपा को क्या हासिल होगा? करने के लिए बहुत कुछ है, इन सारे मामलों में सरकार कुछ नहीं कर रही और एक ट्वीट करने पर इतना हल्ला, इतना शोर, इतनी गिरफ्तारी आधी रात को 12 बजे मानो किसी आतंकवादी को आप गिरफ्तार कर रहे हैं।

उस प्रकार का आपने जो माहौल बनाया है, मैं मानता हूं कि ये देश के लिए हमारे लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक है। पहले उन्होंने रोहित वेमुला को सुसाइड के लिए मजबूर किया। दलित समाज के पत्रकार साथियों को जेल में डाला, चंद्रशेखर की गिरफ्तारी करवाई और अब ये लोग मुझे खत्म करना चाहते हैं। कोई युवा बोले, कोई पत्रकार बोले, कोई वकील बोले और उसमें भी यदि कोई दलित समाज का युवा लीडर बोलता है तो मोदी साहब अपने कास्ट बायस के चलते उसको हजम नहीं कर पा रहे। ये मैं आज इस प्रेस वार्ता के माध्यम से आपके बीच में कहना चाहता हूं और मोदी साहब भी गुजरात से हैं, हम भी गुजरात से हैं, तो उनको चैलेंज भी देना चाहते हैं कि मैं अपने खिलाफ जो मुकदमा हुए, वो उसको झेल लूंगा, मैं वो सब सहन करुंगा। अपने खिलाफ जो केस हुए दोनों, उसको वापस लेने की बात नहीं कर रहा हूं, लेकिन जिस प्रकार से गुजरात में पाटीदार कम्युनिटी पर हुए आंदोलन के दौरान हुए सारे केस वापस लिए, उसी प्रकार से मेरे विधानसभा क्षेत्र वडगाम में जो भी माइनॉरिटी समाज के साथियों के ऊपर मुकदमा दर्ज हुए और ऊना के आंदोलन के वक्त जो एफआईआर हुए, जो मुकदमे दर्ज हुए, वो सारे केस आप वापस लीजिए।

नंबर दो ये 22 पेपर लीक हुए, उसको स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम के द्वारा उसकी जांच करवाइए।

नंबर तीन, ये मुंद्रा पोर्ट पर 1 लाख 75 हजार करोड़ का जो ड्रग्स पाया गया, उसमें गौतम अडानी का इंटेरोगेशन करवाइए और यदि इन सारे मामलों में आप एक महीने के दौरान कोई कार्यवाही नहीं करेंगे तो मैं चैलेंज के साथ कह रहा हूं एक जून को इंडियन नेशनल कांग्रेस का गुजरात चैप्टर और हम सारे गुजरात के लड़ने वाले लोग सड़क पर उतरगें और गुजरात बंद का इस मंच से मैं कॉल दे रहा हूं। मोदी जी आप भी गुजरात से हैं, मैं भी गुजरात से हूं। आप भी समझ लीजिए, जैसा कि मेरे साथी ने कहा फ्लावर नहीं फायर है, झुकेगा नहीं। It’s my challenge to you Prime Minister of India. Thank you so much.

श्री राजेश लिलोथिया ने कहा कि जिग्नेश मेवाणी जी ने जितने विस्तार से आप लोगों को बताया कि नरेन्द्र मोदी की जो सरकार है, वो तानाशाही अंदाज में चल रही है, हिटलर के अंदाज में चल रही है और ये दलित विरोधी है। किस तरीके से झूठा फेब्रिकेटेड केस बनाकर एक नौजवान की आवाज को, जो दलित था उसकी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया और उसके साथ-साथ महिला का इस्तेमाल करके हमारे लिए महिला बहुत सम्मानित है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी, आरएसएस जो माओवादियों की पार्टी है, उनकी नजर में महिला का दर्जा क्या है, वो इस बात से भी साबित होता है।

एक प्रश्न पर कि असम के मुख्यमंत्री ने कहा है कि आपकी जो गिरफ्तारी हुई है, उसके बारे में उन्हें कुछ नहीं पता है, क्या कहेंगे, श्री जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि ये नामुमकिन है, पूरे देश को पता है, आपको पता है, असम के मुख्यमंत्री को पता नहीं है! मैं उनकी कस्टडी में हूँ, एक के बाद एक एफआईआर मुझ पर हो रही है, इतना हल्ला हो रहा है, डेली प्रोटैस्ट गुजरात में हो रहा है, पूरे देश में हो रहा है, असम में हो रहा है और उनको पता नहीं है? उन्हीं ने उनके पॉलिटिकल बॉसेस की सूचना के तहत ये ऑफेंस दर्ज करवाया, हो सकता है। जब असम की जुडिशियरी आपको इतना लताड़ रही है, उसके बाद भी आप सुधरने को तैयार नहीं हैं, तो ये सवाल पूछना चाहता हूँ। मेरा ऑब्जर्वेशन एक बात है, जुडिशियरी का ये कहना है कि Assam is becoming a Police State. ये शर्मनाक बात है।

एक अन्य प्रश्न पर कि असम पुलिस की जिस महिला ने आपके खिलाफ केस किया था, अब जो बेल ऑर्डर आया है, उसके विरुद्ध वो हाई कोर्ट में जाएगी, ऐसा कहा जा रहा है, क्या कहेंगे, श्री मेवाणी ने कहा कि तो वो बेल ऑर्डर को चैलेंज करना चाहते हैं, लेकिन अपने आप को पूछें, कि जिडिशियरी को क्यों कहना पड़ा कि ये फर्जी एफआईआर है, not maintainable in law, filed with malafide intentions. जुडिशियरी का ये कहना है कि एक्यूज्ड जिग्नेश मेवाणी को जानबूझकर गैर कानूनी तौर पर लौंगर पीरियड के लिए, लंबे वक्त के लिए जेल में डाले रखने के लिए ही मुकदमा दर्ज हुआ है, उसके बाद भी शर्मिंदगी से अपना सिर झुकाकर माफी मांगने के बजाय अपील में जाने की बात कर रहे हो, it is a matter of shame. ये असम का कल्चर नहीं हो सकता।

इसी से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री मेवाणी ने कहा कि हाँ, ये 19 तारीख को मेरे खिलाफ एफआईआर हुई, कोकराचार से गुवाहाटी का एयरपोर्ट 4 घंटे की दूरी पर है। गुवाहाटी से अहमदाबाद की डायरेक्ट फ्लाइट मिले तब भी आप अहमदाबाद लैंड करोगे, वहाँ से 140 किलोमीटर की दूरी पर मेरा विधानसभा का क्षेत्र और है, तो जिस मोमैंट पर एफआईआऱ हुई और नेक्स्ट मोमेंट पर आपने गाड़ी निकाली और गुजरात के लिए निकल गए, Is it possible? और महिला वाली जो एफआईआर है, पांच पुलिस की गाड़ियों का काफिला मेरे बगल में ही उस पुलिसकर्मी को क्यों बैठाया गया, She could have been any of the vehicle. कोर्ट का भी ये कहना है, मतलब कि ये प्री-प्लांड कॉन्स्पीरेसी है।

एक अन्य प्रश्न पर कि गुजरात में अब चुनाव आने वाले है, आज की जो सिचुएशन है, उसको कैसे देखते हैं, श्री मेवाणी ने कहा कि वही मैं कहना चाह रहा हूँ, यदि मेरी विधानसभा क्षेत्र में कोई कम्यूनल क्लैश हो जाए, दंगा हो जाए, तो बतौर भारतीय नागरिक, बतौर एक इलेक्टिड रिप्रिजेंटेटिव मेरी क्या रेस्पॉन्सिबिलिटी होनी चाहिए- यही कि शांति और अमन बनाए रखनी की मैं अपील करूँ, तो गुजरात में जब तीन जगह पर दंगे हुए, इस प्रकार का कम्यूनल टेंशन खड़ा हुआ और प्रधानमंत्री आ रहे हैं, तो उनकी क्या रेस्पॉन्सिबिलीट बनती है- शांति और अमन की अपील करना। इतना करने को तैयार नहीं है और फिर महात्मा के मंदिर का निर्माण करते हो, गांधी जी का चश्मा उठाकर उसको स्वच्छता के कैंपने के साथ जोड़ते हो, अहमदाबाद साबरमती आश्रम को रिनोवेट करवाते हो। दिल में गोडसे और मुंह पर गांधी का नाम, ये ठीक नहीं है।

एक अन्य प्रश्न पर कि क्या अदालत का विरोध करेंगे, जिस तरह एक ट्वीट को लेकर अरैस्ट किया गया एक एमएलए को, श्री मेवाणी ने कहा कि Congress Party has been solidly with me. PCC President of Gujarat, PCC President of Assam everybody has provided me legal assistant. तो आगे भी कोई भी कानूनी मदद की जरुरत रहेगी तो Party is solidly with me. उसका सवाल नहीं है, सवाल ये है कि इसके बावजूद इतने स्ट्रॉन्ग ऑब्जर्वेशन के बावजूद भी मुझे कोर्ट में जाना पड़े, एक्चुअली मैं आपको बोलूं, मुझे इस महिला के ऊपर तरस आ रहा है, जिसने मेरे खिलाफ कंप्लेन किया है, क्योंकि मैं इमेजिन ही नहीं कर सकता हूँ, कि उसके ऊपर कितना दबाव बनाया होगा, वरना कोर्ट का जो ऑब्जर्वेश है, उसी के आधार पर I can file a case of criminal defamation raid with criminal conspiracy 120 (B). जनरोसिटी दिखाकर मैं ये नहीं करूँगा, ये हमारा कल्चर नहीं है। हमारी सरकार है महाराष्ट्र में, छत्तीसगढ़ में, राजस्थान में, किसी भी पुलिस स्टेशन में जाकर मैं एफआईआर करवा सकता हूँ on the basis of this court order that the FIR is not maintainable. हम ये नहीं करेंगे, क्योंकि उसके ऊपर कितना दबाव हो सकता है, वो मैं समझ सकता हूँ। आपको ये समझना है कि गुजरात के जो लोग आज व्यापारी हैं, जो रियल एस्टेट में हैं, जो पत्रकार हैं, जो सरकार से सवाल पूछते हैं, उनके साथ इन 25-27 सालों में क्या हुआ होगा। ध्वेल पटेल नाम के एक पत्रकार को राष्ट्रद्रोह के आरोप में अंदर डाल दिया। द इंग्लिश डेली के एडिटर्स के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का केस सरकार ने किया है, यही उनका चरित्र है।

एक अन्य प्रश्न पर कि क्या आप इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएंगे, श्री मेवाणी ने कहा कि विधानसभा में मुद्दे को उठाएंगे, सड़क पर भी उठाएंगे, लेकिन फ्रैंक्ली मैं कह रहा हूँ, इतना सब होने के बावजूद उनका जो अटैम्प्ट था हरैस करने का, एक्चुअली मुझे हरैस नहीं कर पाए, वो अपने माइंडसेट का भी मामला होता है। तो मेरे मन में कोई वैंडेटा नहीं है, कोई विंडिक्टिवनेस नहीं है। मैं यही चाहता हूँ कि सरकार को शर्मिंदगी महसूस हो और बाकी के जो मेरे सारे मुद्दे उठाए, उन मुद्दों पर कार्यवाही करो न। गुजरात का जो यूथ है, उसको आप नशे की लत लगाना चाहते हो। उसकी रगो में खून के बजाय ड्रग्स भरना चाहते हो, इससे ज्यादा खतरनाक और क्या हो सकता है! 25-50 ग्राम का मामला नहीं, 25,000 टन हेरोइन ड्रग्स और अडानी साहब के पोर्ट पर लगातार आ ही रहा है। 21 हजार करोड़ का, 600 करोड़ का, 9 हजार करोड़ का, 50 करोड़ का, 55 करोड़ का, टोटल अब तक 1,75,000 करोड़ हो गया, आप उसको एक बार पूछ नहीं रहे। यदि आपके और हमारे घर से थोड़ा भी ड्रग्स पकड़ा जाए, छोड़ेंगे, आप सब पत्रकार हैं, बावजूद उसके? आपके ऊपर तुरंत गिरफ्तारी होगी, कम से कम आपको इंट्रोगेट किया जा रहा है, इस गौतम अडानी साहब की कोई पूछताछ ही नहीं हो रही है। कौन है वो, is he beyond law? Is he beyond Indian Constitution? क्योंकि पीएमओ के साथ उनके गहरे ताल्लुकात हैं। क्योंकि मोदी साहब से बहुत गहरी दोस्ती है। ये भाजपा, पीएमओ और गौतम आडानी तीनों की मिलीभगत के बिना इतना ड्रग्स गुजरात में आना, देश में आना नामुमकिन है और ये मैं बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस से निकलने के बाद ट्वीट करने वाला हूँ और मैं 24 घंटा दिल्ली में हूँ, एफआईआर करनी हो तो कर लीजिए।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री मेवाणी ने कहा कि एक तारीख को, एक जून को गुजरात की सड़क पर उतरेंगे, गुजरात बंद करेंगे। मैं अपने केस वापस लेने की बात नहीं कर रहा हूँ, ऊना के वक्त जो दलितों के ऊपर केस हुआ, वो वापस लो। ये 22 एग्जाम्स का पेपर लीक हुआ, उसमें कोई जांच ही नहीं हो रही है। एक एसआईटी का गठन हो, जिसमें तीन अधिकारियों का नाम सरकार दे। तीन अधिकारियों के नाम, जिनकी इंटेग्रिटी पेकेवल हो, ऐसे तीन अधिकारियों का नाम विपक्ष के तौर पर हम दें। and let there be free and fair investigation. जांच हो, ये ड्रग्स कहाँ से आ रहा है? गौतम अडानी साहब की इंक्वायरी हो, कुछ नहीं हो रहा है और ट्वीट पर एफआईआर कर रहे हो, मजाक चल रहा है क्या?

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री मेवाणी ने कहा कि बिल्कुल, पीएमओ, असम पुलिस, असम की सरकार, गुजरात पुलिस, गुजरात सरकार, उसका पूरा ये एक कलैक्टिव एफर्ट है, ये कलैक्टिव कॉन्स्पीरेसी है।

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