Athrav – Online News Portal
दिल्ली राष्ट्रीय हाइलाइट्स

इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान उच्चस्तरीय चर्चा में कृत्रिम मेधा के युग में रोजगार क्षमता के भविष्य पर विचार।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘कृत्रिम मेधा के युग में रोजगार क्षमता का भविष्य’ विषय पर एक उच्चस्तरीय चर्चा का आयोजन किया गया। इसमें नीति निर्माताओं, उद्योग जगत की अग्रणी हस्तियों, शिक्षाविदों और नवोन्मेषकों ने इस बात पर चर्चा की कि कृत्रिम मेधा किस तरह विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार क्षमता को पुनर्परिभाषित कर रही है। चर्चा में सीमित कौशल की विशेषज्ञता से मानव नेतृत्व में क्षमताओं की ओर परिवर्तन तथा एआई के युग में भारत के सामने अवसरों और जिम्मेदारियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।सत्र का संचालन एआई4इंडिया के सह-संस्थापक आलोक अग्रवाल ने किया। मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ वी अनंत नागेश्वरन ने इसे आभाषी माध्यम से संबोधित किया। वक्ताओं में एआई4इंडिया के सहसंस्थापक और पद्मश्री से सम्मानित शशि शेखर वेमपति, एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश, इंफोएज के सह- संस्थापक संजीव भिखचंदानी, एजवर्व के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश सीतारमैया, संपर्क फाउंडेशन के संस्थापक और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनीत नैयर तथा स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ मेडिसिन के अनुबंधित प्रोफेसर अनुराग मैराल शामिल थे।सत्र में इस बात पर चर्चा की गई कि मशीनीकरण में तेजी आने के साथ कौन से कौशल, किरदार और सोच प्रासंगिक बनी रहेंगी तथा रोजगार के योग्य बने रहने के लिए क्या करना चाहिए।

वक्ताओं ने सीमित कौशल से संबंधित विशेषज्ञता के बजाय रचनात्मकता, समग्र सोच, अनुकूलनीयता और जीवनपर्यंत ज्ञानार्जन के बढ़ते महत्व पर जोर दिया।आभासी माध्यम से अपने संबोधन में, मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि दूरदर्शिता, संस्थागत अनुशासन और निरंतर अमल में लाने के साथ, भारत सच्ची ‘मानवीय बहुलता’ प्रदर्शित करने वाला पहला बड़ा समाज बन सकता है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता या तो इस दृष्टिकोण को मजबूती दे सकती है या इसे कमजोर कर सकती है और इसका परिणाम आकस्मिक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल प्रवाह के साथ नहीं होगा, इसके साथ ही उन्होंने तत्परता, राजनीतिक इच्छाशक्ति और मजबूत राज्य क्षमता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रौद्योगिकी को व्यापक रोजगार सृजन करने की क्षमता के साथ जोड़ कर अपनाना हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह प्रयास केवल सरकार तक सीमित न रहकर एक ‘टीम इंडिया’ पहल बनना चाहिए, जिसमें नीति निर्माता, उद्योग, शिक्षक और पूरा समाज शामिल होना चाहिए।शशि शेखर वेम्पति ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत के लिए एआई  को एक राष्ट्रीय क्षमता के रूप में देखा जाना चाहिए, जो भारतीय डेटा, भाषाओं और सामाजिक आवश्यकताओं पर आधारित हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई की सफलता का वास्तविक पैमाना नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ने वाला प्रभाव और समावेशी विकास में इसका योगदान होगा।अपने संबोधन में, स्मिता प्रकाश ने उल्लेख किया कि प्रौद्योगिकी दशकों से नौकरियों की जगह ले रही है, लेकिन अब बदलाव की गति काफी तेज हो गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निरंतर कौशल विकास जरूरी है और इस बात पर बल दिया कि एआई  से उत्पन्न होने वाले व्यवधानों के जवाब में मीडिया को अपने प्रारूपों, राजस्व मॉडल और बौद्धिक संपदा रणनीतियों को विकसित करना होगा।विनीत नायर ने कहा कि एआई उन ‘उप-कौशलों’ को स्वचालित कर रहा है जो औद्योगिक युग के दौरान विकसित हुए थे, जिससे अब व्यवस्थित सोच और कल्पनाशीलता जैसे ‘मैक्रो स्किल्स’ महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने आगाह किया कि भारत को शिक्षा, नवाचार और डेटा स्वामित्व पर पुनर्विचार करना चाहिए ताकि वह वैश्विक एआई प्रौद्योगिकियों का केवल एक उपभोक्ता बनकर न रह जाए।संजीव भीखचंदानी ने कहा कि नौकरियों पर एआई के असर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन इसे अपनाना ही एकमात्र सही तरीका है। उन्होंने पेशेवरों, विशेष रूप से युवाओं को रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से एआई  उपकरणों को सीखने और उन्हें लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया।स्वास्थ्य सेवा पर चर्चा करते हुए, प्रोफेसर अनुराग मैरल ने नौकरियों के सृजन के रूप में एआई की क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने और सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवा वितरण में नई भूमिकाओं को सक्षम करने पर जोर दिया।सतीश सीतारामैया ने एआई को एक ‘क्षमता बढ़ाने वाले’ उपकरण के रूप में वर्णित किया जो उत्पादकता और नवाचार को बढ़ावा देता है। उन्होंने जोर दिया कि जैसे-जैसे एआई  को अपनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, उद्यम अधिक ‘डिजिटल नेटिव’ बनेंगे, जिससे विभिन्न लेकिन सार्थक भूमिकाओं का सृजन होगा।चर्चा के दौरान इस बात पर ज़ोर दिया गया कि एआई बड़ी रुकावट तो पैदा करता है, लेकिन यह भारत को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और नागरिक कल्याण के अनुरूप एक समावेशी, नवाचार-संचालित और जिम्मेदार एआई पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का अवसर भी प्रदान करता है।

Related posts

महिलाओं के हक और हिस्सेदारी के लिए महिला कांग्रेस शुरू करेगी देशव्यापी आंदोलन -अलका लांबा

Ajit Sinha

राहुल गांधी ने इंदौर में प्रदूषित पानी से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों और बीमार लोगों से की मुलाकात।

Ajit Sinha

खुद को दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर बताने वाले एक धोखेबाज पकड़ा गया।

Ajit Sinha
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
error: Content is protected !!
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x