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फरीदाबाद विशेष

पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत की गिरफ्तारी जिला पुलिस प्रशासन की गले की हड्डी बनी, 120 मजदूरों का वेतन का जो खा हो, भला पत्रकार रिश्वत का पैसा देगा।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
फरीदाबाद: पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत को झूठे केस में गैर कानूनी तरीके से गिरफ्तारी करने मामला अब जिला पुलिस प्रशासन के लिए की गले की हड्डी बनती जा रहीं हैं आज इसी प्रकरण में  सैकड़ों  पत्रकारों ने एक जुट होकर जिला उपायुक्त यशपाल यादव,केन्द्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर व कैबिनेट  मंत्री मूलचंद शर्मा को एक -एक ज्ञापन सौपा गया। जिसमें पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत को गिरफ्तार करने वाले पुलिस कर्मियों पर भारतीय सहिंता की धारा 307 सहित कई विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करने और जांच में पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत के खिलाफ सेंट्रल थाने में दर्ज मुकदमें को तुरंत रद्द करने और शिकायकर्ता के खिलाफ असल गलती को छुपाने और विश्वास घात करके एक सोची समझी साजिश के तहत पत्रकार को फंसाने का मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई हैं। क्यूंकि आमजन हो या अधिकारी उनके एक फोन पर सैकड़ों पत्रकार उनकी बातों को सुनने के लिए बुलाए गए स्थान पर पहुंच जाते हैं। और वहां पहुंच कर या आकर इस घटिया वारदात को वह शख्स अंजाम दे, यह काम तो इससे भी ज्यादा और घटिया इंसान ही कर सकता हैं। ऐसे पुलिस के ऊपर समाज के लोग फूल बरसा कर एक योद्धा का दर्जा दे रहे हैं।

जो गरीब की आवाज को उठाने वाले पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत को एक सोची समझी साजिश रची जाती हैं, फिर गैर कानूनी तरीके से जाल बिछा कर पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत को गिरफ्तार किया जाता हैं। बताया गया हैं कि पत्रकार राजपूत को 30000 रूपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया हैं और इससे पहले शिकायतकर्ता ने उसे ब्लेकमेलिंग में 50000 रूपए देने की बात भी बताया गया  हैं। कुल 5 लाख रूपए की मांगने का आरोप पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत पर  मंढा गया हैं। लोग खुद समझदार हैं आख़िरकार शिकायतकर्ता ने पहले दौर में पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत को क्यों दिया 50000 रूपए, उसकी ऐसी कौन सी गलती की हुई थी जो उसे पत्रकार के हाथों ब्लेकमेल होना पड़ा। जब उस शख्स बिल्कुल दूध का धुला था तो उसी वक़्त 50000 रुपए रिश्वत के देते हुए पकड़वा देता  पर ऐसा उसने  नहीं किया। बाद में उसे 9 मई को सोची समझी साजिश के तहत सेंट्रल थाना की पुलिस से मिली भगत करके पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत को जबरन 30 हजार रूपए धरा कर गिरफ्तार कर लिया। साथ में उसके एक साथी लाल सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया। जहां तक  5 लाख रुपए मांगने की बात हैं। जो इंसान अपने 120 मजदूरों को सेलरी की रकम भर चैक दे दिए थे और वह सभी चेक बाउंस हो गए। आप स्वंय समझ सकते हैं वह कंपनी कितना मकार रहा होगा। लॉकडाउन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा था कि कोरोना महामारी के इस संकट की घड़ी में किसी भी मजदूरों को काम से नहीं हटाया जाएगा।
अपने कंपनी में काम करने वाले मजदूरों का ध्यान रखना हैं मदद की तौर पर मजदूरों को सेलरी देना होगा।  कुल मिला कर अपने मजदरों और उसके परिवारों को खाली पेट नहीं सोने और रहने देना हैं। ऐसे में अपने 120 मजदूरों को सैलरी का चेक देकर गुमराह करने वाली बात हैं। शायद उसके दिमाग यह चल रहा होगा कि इन सभी मजदूरों को चेक दे देंगें और ये सभी मजदूर अपने अपने गांव चले जाएंगें और चेक बाउंस होने के बाद वे लोग अपने गांव से फोन पर चिलाते रहेंगें पर मजदूरों ने ऐसा न करके यहीं अपने बैंक खाते में चेक डाल दिया जो कि सभी के सभी चेक बाउंस हो गए। जब मजदूर लोग एकत्रित होकर प्रदर्शन कर रहे थे,ऐसे में पत्रकार की खबर तो बनती हैं और मजदूरों की आवाज बुलंद करने के लिए पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत मौके पर पहुंच गए।  यह बात तो समझना होगा जिसकी नियत अपने मजदूरों की प्रति ठीक नहीं हैं ऐसे वह उस पत्रकार के प्रति कैसे रहेंगी जो किए गए कारनामों का भंडाफोड़ करने गया हो। उसने वही किया जिसका अनुमान था। 

मालूम हो कि पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत के खिलाफ दर्ज की गई मुकदमें में जिस तरीके से धाराओं का इस्तेमाल किया गया उससे यहीं पता चलता हैं कि शिकायतकर्ता की शिकायत को किसी पुलिस के अधिकारी के इशारे पर लिखवाया गया हैं। इन धाराओं का ज्ञान आम आदमी को नहीं होता हैं। इस से मालूम पड़ता हैं कि पुलिस ने शिकायतकर्ता से मिलीभगत करके ही पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत के प्रति की खेल रचा हैं और इसके बदले में उनसे बाद में  अपना सुविधा शुल्क ले लेंगी। भगवान जाने इनमें कौन ऑफसर हैं इससे इंकार नहीं किया जा सकता हैं अब तो इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता की इलाके की पुलिस अपने वरिष्ठ अधिकारी को गलत गुमराह करके इस साजिश को अंजाम दिया गया हो।  यदि पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत की गिरफ्तारी में पुलिस के किसी बड़े अधिकारी ने फरमान जारी किया हैं यह तो और शर्म की बात हैं। वह इस केस को समझा बुझा की खत्म करवा सकतें थे पर उन्होनें बड़ी फुर्ती दिखाई पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत को गिरफ्तारी करने में। इस प्रकरण में पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने पुलिस के ऊपर लगे  सभी आरोपों से इंकार किया हैं। उनका कहना हैं कि इन सभी बातों का पुलिस के पास रिकॉर्डिंग हैं। पुख्ता सबूत हैं कि पत्रकार पुष्पेंद्र राजपूत ने शिकायतकर्ता से ब्लेकमेलिंग की हैं, प्रवक्ता साहब आपको यहीं जान लेना चाहिए की आपका कुनवा काफी बड़ा हैं और आधे से कही ज्यादा काम पुलिस की गैर कानूनी तरीके से ही चलता हैं, कई बार पत्रकारों के सामने में भी बातें आती रहती हैं और बहुत बार रिकॉर्डिंग पत्रकारों के कैमरे में भी होता हैं पर आपसी शर्म से पत्रकार लोग उन चीजों को दरकिनार कर देती हैं पर आपने तो बिल्कुल शर्म ही छोड़ दिया। पत्रकार न जाने कितना बड़ा ब्लेकमेलर हो गया जोकि टूटी फूटी बाइक पर रिपोर्टिंग करता हैं। यदि बहुत बड़ा ब्लेकमेलर होता एक एक फ़ॉर्चूनर तो जरूर होता जो इस वक़्त जिला प्रशासन के बड़े बड़े और छोटे से छोटे अधिकारियों के पास हैं। अपने जेब से फोन का बिल भर कर , नेट का बिल भर और पेट्रोल जेबों से भरवा कर और अपने बच्चों को तकलीफों में रख पत्रकारिता करने वाले पत्रकार को ब्लेकमेलर का दर्जा  दे रहे हो,

फ्री में लोगों की पब्लिक सिटी करना हैं और आमजनों की समस्याओं को जिला प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने का काम करता हैं। ऐसे में एक छोटी -मोटी गलती हो भी गई तो उसे एहसास करा कर   छोड़ देना चाहिए जैसे आपके मुलाजिमों द्वारा की गई कई गलतियों में पत्रकार देख कर छोड़ देते हैं। यह सोच कर की यह मेरे समाज में ही किसी परिवार का बच्चा होगा। ऐसे में नए नए बने पत्रकारों को चाहिए की अपने वरिष्ठ पत्रकारों से कैसे रिपोर्टिंग की जाती हैं के बारे थोड़ा ज्ञान ले, इसके बदले में वरिष्ठ पत्रकार आपसे सिर्फ सम्मान चाहते हैं जो आपको देना चाहिए, ऐसे पुलिस महकमें में अब के समय में नए उम्र के पुलिस ऑफिसर आ रहे हैं उनकों भी ज्यादा ज्ञान नहीं की आप लोगों के  कैसे सम्मान करे और ऐसी -वैसी गलती कई बार कर बैठते हैं। जहां भी जाए रिपोर्टिंग करने के लिए सबसे पहले वहां के माहौल को समझे, फिर अपना काम करे , लगता आप को वहां आपका पहुंचना जरुरी हैं , और दिक्कतें आ रही हैं तो पुलिस के बड़े अधिकारी से संपर्क करे और तहजीव से उनसे अपनी समस्या बताए ताकि आपकी समस्याओं का समाधान कराने में अपना रूचि दिखाए।     
      

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