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दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय हाइलाइट्स

लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए जा रहे हैं, ऊपर से इन्हें महिला आरक्षण के रूप में प्रस्तुत और प्रचारित किया जा रहा है, परिसीमन का मुद्दा है।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली: परिसीमन के प्रस्तावों को लेकर देशभर से कई गंभीर चिंताएं सामने आई हैं, जो कुछ अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को लाभ पहुंचाती हैं, जहां फिलहाल भाजपा मजबूत है। इससे लोकसभा में कई राज्यों की सापेक्ष शक्ति वास्तव में कम हो जाएगी। असम और जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से परिसीमन किया गया है, वह दिखाता है कि मोदी-शाह की जोड़ी कितने खतरनाक तरीके से काम करती है। इन विधेयकों का असली उद्देश्य और विषय-वस्तु छल-कपट से भरी है, और इनका प्रभाव बेहद व्यापक और नुकसानदेह है। इन्हें उनके वर्तमान स्वरूप में पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए।

विपक्ष की मांग सरल है: लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं, साथ ही अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से आने वाली महिलाओं के लिए भी आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। 2023 में भी विपक्ष का यही रुख था और आज भी यही है। यही असली सत्ता में भागीदारी है, जो कहीं अधिक लोकतांत्रिक है और संवैधानिक मूल्यों एवं सिद्धांतों के अनुरूप है।

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