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नई दिल्ली: एमनेस्टी के आरोप दुर्भाग्यपूर्ण, तथ्यहीन और सच्चाई से कोसों दूर हैं-राजयवर्धन सिंह राठौड़

नई दिल्ली / अजीत सिन्हा 
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राज्यवर्धन राठौड़ ने आज मंगलवार को पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया और एमनेस्टी इंडिया के बेबुनियाद आरोपों को निराधार एवं सत्य से परे बताते हुए कहा कि कोई भी संस्था भारत में काम कर सकती है लेकिन देशी हो या विदेशी, सभी संस्थाओं को भारत के कानूनों का पालन करना ही होगा।पत्रकारों को संबोधित करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि एमनेस्टी के आरोप दुर्भाग्यपूर्ण, तथ्यहीन और सच्चाई से कोसों दूर हैं। भारत में काम करना है तो विदेशी फंडिंग के बारे में सबको बताना होता है। एमनेस्टी इंटर नेशनल को विदेशी योगदान कानून (एफसीआरए) के तहत 20 साल पहले केवल एक बार परमिशन मिली थी। इसके बाद कोई परमिशन नहीं ली गई।
नियमों के मुताबिक हर 5 साल में इसका रिव्यू और रिन्यूवल जरूरी है। एफसीआरए के अप्रूवल के बिना भी एमनेस्टी ने विदेशों से फंड लेना जारी रखा। जांच एजेंसियों की छानबीन से बचने और एफसीआरए के नियामकों दरकिनार करने के लिए एमनेस्टी ने चार अलग संस्थाएं बनाईं और एमनेस्टी यूके ने भारत में पंजीकृत चार कंपनियों को एफडीआई बताकर बड़ी मात्रा में धनराशि दी।

जब एक फंड की जांच हुई तो पता चला कि संदेहास्पद स्रोत से पैसे आए हैं। उन्होंने कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ग़ैरक़ानूनी और संदेहास्पद तरीक़ों से नियमों के विपरीत जाकर विदेशों से फंड जुटाया है। आखिर बाहर से आए पैसे को छुपाने की कोशिश क्यों की जा रही है? राठौड़ ने कहा कि कोई भी संस्था भारत में काम कर सकती है लेकिन देशी हो या विदेशी, सभी संस्थाओं को भारत के नियमों और कानूनों का पालन करना ही होगा। ये अंग्रेजों के हुकूमत का जमाना नहीं है, अब देश में सबके लिए समान कानून है। उन्होंने कहा कि एमनेस्टी भारत में अपने मानवीय कार्य जारी रखने के लिए स्वतंत्र है। लेकिन, भारत ऐसे संगठनों को घरेलू राजनीतिक बहसों में दखल देने की अनुमति नहीं देता है जिन्हें विदेशी मदद मिल रही है। यह कानून सभी के
लिए बराबर है और एमनेस्टी पर भी लागू होता है।

राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि भारत में सबसे ज्यादा मानवाधिकार का ध्यान रखा जाता है। एमनेस्टी पर करारा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के बारे में तो एमनेस्टी खूब बोलती है लेकिन पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के बारे में वह कुछ नहीं बोलती। उन्होंने कहा कि एमनेस्टी ने देश की संसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ कैंपेन शुरू कर दिया कि ये भारतीयमुसलमानों के खिलाफ है जबकि इस विधेयक का देश के किसी भी नागरिक से कोई लेना-देना ही नहीं है। यह सरासर भारत के खिलाफ साजिश है। राठौड़ ने कहा कि यूपीए सरकार के समय संसद में सरकार के तरफ से एमनेस्टी इंटरनेशनल की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े किए थे और एमनेस्टी को पूर्वाग्रह से ग्रस्त बताया था। इतना ही नहीं, अवैध रूप से विदेशी फंडिंग लेने के कारण एमनेस्टी इंटरनेशनल के लाइसेंस को 2009 में यूपीए सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया था। साथ ही, एमनेस्टी के भारत में काम करने पर भी रोक लगा दी गई थी।

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