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गुडगाँव

भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में पहले क्षेत्रीय परिसर की स्थापना के साथ रचा इतिहास

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
गुरुग्राम:समावेशी राष्ट्रीय विकास और क्षेत्रीय क्षमता निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) ने मेघालय के न्यू शिलांग टाउनशिप में पांच एकड़ भूमि औपचारिक रूप से अधिग्रहित की है। यह संस्थान का पूर्वोत्तर भारत में पहला क्षेत्रीय परिसर होगा, जो IICA की कॉरपोरेट गवर्नेंस और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।भूमि हस्तांतरण समारोह की अध्यक्षता मेघालय सरकार के मुख्य सचिव डोनाल्ड फिलिप्स वहलांग और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने की। इस अवसर पर IICA के महानिदेशक और सीईओ ज्ञानेश्वर कुमार सिंह, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव इंदरदीप सिंह धारीवाल, योजना विभाग के आयुक्त एवं सचिव सी.वी.डी. दियांगदोह, IICA के कर्नल अमनदीप सिंह पुरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। भूमि का हस्तांतरण मेघालय सरकार के योजना विभाग के संयुक्त सचिव के. हिनन्यूटा और भारत सरकार के उप सचिव शेखर श्रीवास्तव द्वारा किया गया।

मुख्य सचिव डोनाल्ड फिलिप्स वहलांग ने IICA की इस दूरदर्शी पहल की सराहना करते हुए मेघालय की ज्ञान-आधारित विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने बताया कि यह परिसर ‘नॉलेज सिटी’ क्लस्टर में स्थित है, जहां पहले से ही आईआईएम शिलांग, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी मेघालय और एनआईएफटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान मौजूद हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि शिलांग में एक नया हवाई अड्डा विकसित किया जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय संपर्क में वृद्धि होगी और यह परिसर देशभर से पेशेवरों, फैकल्टी और छात्रों के लिए आसानी से सुलभ होगा। यह अवसंरचनात्मक विकास शिलांग को पूर्वोत्तर के प्रमुख शैक्षणिक और नीति केंद्र के रूप में सुदृढ़ करेगा।IICA के महानिदेशक एवं सीईओ ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “दिल्ली से बाहर यह हमारा पहला बच्चा है—विकेंद्रीकरण और सशक्तिकरण का प्रतीक।” उन्होंने बताया कि यह परिसर उद्यमिता, क्षमता निर्माण और सुशासन को बढ़ावा देने में सहायक होगा और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘विकसित भारत @2047’ जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट’ कार्यक्रमों में दिए गए दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर को हमेशा “भारत की अष्टलक्ष्मी” के रूप में देखा है—जो विविधता, प्रतिभा और संभावनाओं से परिपूर्ण क्षेत्र है। उन्होंने कहा, “IICA को गर्व है कि वह इस क्षेत्र को भारत के दूरस्थ किनारे से एक गतिशील विकास इंजन में बदलने की प्रक्रिया का हिस्सा बना है।”उन्होंने आगे कहा, “यह पहल प्रधानमंत्री के मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। शिलांग में हमारा परिसर केवल विस्तार नहीं है, यह ‘परिवर्तन के लिए परिवहन’ की उस सोच का सजीव उदाहरण है, जहाँ अवसंरचना और ज्ञान संस्थान मिलकर शांति, समृद्धि और उद्देश्य का मार्ग प्रशस्त करते हैं।”प्रधानमंत्री के उत्तर-पूर्व भारत के विकास हेतु शुरू की गई ‘PM-DevINE’ योजना के तहत ₹100.95 करोड़ के निवेश से शिलांग परिसर विकसित किया जाएगा, जो कॉरपोरेट गवर्नेंस, ESG, CSR, दिवालियापन और शोधन प्रक्रिया, प्रतिस्पर्धा कानून, और बोर्ड नेतृत्व जैसे प्रमुख क्षेत्रों में प्रशिक्षण, शोध और नीति सलाहकार केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने अपने संबोधन में मेघालय सरकार के सक्रिय और उदार समर्थन की सराहना की और कहा कि यह साझेदारी सहकारी संघवाद की भावना और उत्तर-पूर्व को नए भारत का विकास इंजन बनाने की केंद्र सरकार की दृष्टि को दर्शाती है। उन्होंने यह भी विशेष रूप से ज़ोर देकर कहा कि शिलांग स्थित IICA भवन के डिज़ाइन में स्थानीय स्थापत्य शैलियों को शामिल किया जाना चाहिए।शैक्षणिक और परामर्श कार्यक्रम वर्तमान वित्त वर्ष में प्रारंभ किए जाएंगे, और निर्माण कार्य तुरंत शुरू होगा। IICA ने पहले भी पूर्वोत्तर क्षेत्र में 300 से अधिक पेशेवरों को लाभ पहुंचाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन किया है और स्वतंत्र निदेशक डेटाबैंक का संचालन करता है, जिसमें सभी पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हैं। आगे चलकर, IICA राज्य विश्वविद्यालयों और नॉलेज सिटी में स्थित संस्थानों के साथ सहयोगी कार्यक्रम शुरू करेगा, जो इस क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए प्रशिक्षण, नीति सहायता और क्षमता निर्माण पहलों पर केंद्रित होंगे।यह विस्तार इस बात को दर्शाता है कि IICA नैतिक उद्यमियों, कुशल पेशेवरों और जिम्मेदार नेताओं को तैयार करने में पूर्वोत्तर भारत के केंद्र से एक दीर्घकालिक भागीदार के रूप में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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