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विशेष हरियाणा

हरियाणा परिवाहन विभाग ने की अनूठी पहल, दुपहिया चालक के हेलमेट न पहने चालान काटे फिर उसे फ्री में हेलमेट दिए।  

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
चंडीगढ़:हरियाणा के परिवहन विभाग द्वारा आज पंचकूला में एक अनूठी सडक़ सुरक्षा पहल की गई। परिवहन आयुक्त डॉ. एस.एस. फुलिया ने इस अभियान की शुरुआत की तथा विभिन्न स्थानों पर दुपहिया वाहनों की चेकिंग के दौरान हेलमेट न पहनने वाले वाहन चालकों का चालान करने के साथ-साथ उन्हें तथा पिछली सीट पर सवार लोगों को हेलमेट भी दिए गए। ये हेलमेट सडक़ सुरक्षा के  लिए राज्य सरकार की एजेंसी, हरियाणा विजन जीरो द्वारा विभाग को दान किए गए। परिवहन विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि परिवहन आयुक्त डॉ. एस.एस. फुलिया ने माता मनसा देवी के सिंहद्वार और अमर टैक्स चौक पर  हेलमेट न पहनने वाले दुपहिया वाहन चालकों का चालान किया और सभी दुपहिया वाहन चालकों से अनुरोध किया कि वे दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग अवश्य करें।

ऐसा न करने पर दुपहिया वाहन चालकों का चालान किया जाएगा।डॉ. एस.एस. फुलिया ने कहा कि दुपहिया वाहनों का प्रयोग अक्सर युवा करते हैं और युवाओं के जीवन की देश को बहुत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर घटनाओं में   हेलमेट न पहनने के कारण मृत्यु हो जाती है। हेलमेट पहनने से देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण युवाओं के जीवन को बचाया जा सकता है।उन्होंने बताया कि ऑपरेशन की परिकल्पना और उसका नेतृत्व संयुक्त परिवहन आयुक्त सुश्री मीनाक्षी राज ने किया जो माजरी चौक, सेक्टर 5,  स्टेडियम लाइट्स,एमडीसी रेड लाइट समेत विभिन्न सात जगहोंं पर चालान पार्टी के साथ मौजूद रहीं। इस अभियान के दौरान पंचकूला की एडीसी मनिता मलिक भी मौजूद थीं।प्रवक्ता ने बताया कि इस पहल के प्रति लोगों की भिन्न-भिन्न प्रतिक्रिया देखने को मिली।



एक महिला जिसके वाहन का चालान किया गया था, ने अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि यह सरकार की एक अनूठी पहल है। उसने मुफ्त हेलमेट दिए जाने पर सुखद आश्चर्य महसूस किया, हालांकि उसे चालान होने का दुख भी था। उन्होंने बताया कि बहुत से लोग बिना चालान के हेलमेट चाहते थे, लेकिन चालान टीम ने इससे इन्कार कर दिया और यह सुनिश्चित किया गया कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों को कानून के अनुसार दंडित किया जाए।उन्होंने बताया कि लोगों से, उनकी सुरक्षा के लिए नियमों का पालन करवाना एक कठिन कार्य है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अगर यह अभियान भी हेलमेट पहनने की दिशा में सकारात्मक रूप से एक भी व्यक्ति के दृष्टिकोण को बदलने में सफल होता है, तो यह कामयाब है।

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