अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
बेरोजगारी का फायदा उठाकर युवाओं के साथ ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। थाना फेज-1 और साइबर क्राइम टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सेक्टर-6 के एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी की। यहाँ से 5 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जो खुद को भारत सरकार के श्रम विभाग से जुड़ा बताकर बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी कर चुके थे। पुलिस की गिरफ्त में खडे मास्टरमाइंड दुर्गेश और सोनू, पुनीत, अमन और आलोक को पुलिस ने सेक्टर-6 में स्थित बी-30 की दूसरी मंजिल पर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर छापे के दौरान गिरफ्तार किया है. डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल ने बताया कि यह गैंग बेरोजगार युवाओं को कॉल कर नामी मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी दिलाने का लालच देता था। पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए ये लोग ‘मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट’ की फर्जी आईडी और फर्जी मोहरों का इस्तेमाल करते थे।

डीसीपी साइबर क्राइम ने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया है कि ये आरोपी हर आवेदक से रजिस्ट्रेशन और अन्य शुल्कों के नाम पर 2,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक वसूलते थे। अब तक ये सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। पुलिस ने इनके 5 बैंक खातों को चिन्हित कर उनमें जमा 10 लाख रुपये की धनराशि को फ्रीज करा दिया है। इस गैंग की कलाई तब खुली जब NCRP पोर्टल पर विभिन्न राज्यों से 25 से अधिक शिकायतें दर्ज मिलीं। पुलिस को छापे के दौरान मौके से ठगी में इस्तेमाल होने वाले लैपटॉप, मोबाइल फोन, फर्जी मोहरें, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, पैन कार्ड और चेकबुक बरामद की है। डीसीपी साइबर क्राइम का कहना है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है। फिलहाल पांचों अभियुक्तों को अदालत में पेश किया जा रहा है और इनके अन्य साथियों की तलाश जारी है।
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