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अपराध फरीदाबाद

फरीदाबाद, दयालपुर गांव में एक पिता ने 5 साल के इकलौते बेटे की हत्‍या की, फिर बेटे के लाश को सीने से बांध खुद भी लगा ली फांसी।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद: दयालपुर गांव, बल्लभगढ़ में 34 वर्षीय एक व्यक्ति ने अपने इकलौते 5 वर्षीय बेटे की हत्या कर उसके शव को अपने सीने से बांधा, फिर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। व्यक्ति नशा करने और रोजाना परिजनों से झगड़ा करता था। उसकी इस आदत से परेशान होकर पत्नी-बेटा, माता-पिता व अविवाहित बड़ा भाई पैतृक मकान छोड़कर पड़ोसी गांव की कालोनी में किराए पर रह रहे थे। व्यक्ति पैतृक मकान में अकेला रहता था। वह पत्नी व परिवार के सदस्यों द्वारा तिरस्कृत किए जाने से मानसिक रूप से परेशान था। पत्नी व परिजनों से कई बार गांव लौटने की बात कहता था। पुलिस का मानना है कि संभवता इसी मानसिक पीड़ा के चलते उसने इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया।

खबर  के मुताबिक दयालपुर गांव में रूपचंद अपनी पत्नी मंजू, बड़े बेटे भारत, छोटे बेटे सागर के साथ रह रहा था। भारत एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है लेकिन अभी अविवाहित है। सागर पहले टैक्सी चलाता था, अब घरेलू गाड़ी पर ड्राइवर था। सागर ने 8  साल पहले नेहा नामक युवती से प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद नेहा ने पुत्र लक्षित को जन्म लिया। 5  वर्षीय लक्षित अब नर्सरी कक्षा में पढ़ रहा था।नेहा का पति सागर कई तरह का नशा करता था, जिसके कारण उसकी पत्नी, माता-पिता व भाई से अक्सर झगड़ा होने लगा। रोजाना कलह से तंग आकर रूपचंद ने परिवार सहित पैतृक मकान को छोड़ने का फैसला लिया। करीब दो साल पहले रूपचंद अपनी पत्नी मंजू, बड़े बेटे भारत व बहू नेहा व पोते लक्षित को लेकर मच्छगर गांव की एक कॉलोनी में किराए पर रहने लगा, जबकि सागर पैतृक मकान में रह रहा था।पड़ोसी ने बताया कि हर रविवार को सागर अपने बेटे को पत्नी के पास से गांव ले आता था। रविवार को वह लक्षित को लेकर 12 बजे गांव आया था। दोपहर 3  बजे के आसपास पड़ोसियों को लक्षित के खेलने कूदने की आवाज आ रही थी लेकिन फिर आनी बंद हो गई।पुलिस को अंदेशा है कि सागर ने बेटे की हत्या शाम तीन से चार बजे के आसपास की होगी। शाम को 7:30 बजे नेहा ने पति को फोन मिलाया तो लगातार रिंग जा रही थी। रात 8  बजे वह गांव वाले घर पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद मिला।नेहा के कहने पर एक पड़ोसी सीढ़ी के सहारे मकान की छत पर गया, वह नीचे आया तो देखकर दंग रह गया। सागर फांसी के फंदे से झूल रहा था, जबकि लक्षित का शव उसके सीने से बंधा था।पड़ोसी ने अंदर से मुख्य दरवाजे की कुंडी खोली, नेहा अंदर दाखिल हुई, उसने बेटे को पति के सीने से अलग किया। उसके शरीर में जान नहीं थी, गला और मुंह नीला पड़ा था। वहां चीख पुकार मची तो अन्य ग्रामीण पहुंचे।नेहा ने बताया उसे कतई अंदाजा नहीं था कि उसका पति बेटे की जान ले लेगा। सागर मन में सबसे रंजिश रखता था। अपनी बुरी आदतें नहीं सुधार रहा था, इसीलिए सब दूर रहते थे।रविवार को हर बार की तरह जब वह बेटे को लेकर गया, तो उसने कहा था कि शाम 7 बजे तक छोड़ जाऊंगा। मुझे पता होता कि वह ऐसा कदम उठाएगा तो मैं बेटे को उसके साथ कभी नहीं भेजती।

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