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दिल्ली शिक्षा

शिक्षा ही व्यक्ति और समाज के उत्थान में मील का पत्थर है : डॉ. बीरबल झा


अजीत सिन्हा / नई दिल्ली 
शिक्षक दिवस के अवसर पर  ब्रिटिश लिंग्वा  में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के जाने -माने शिक्षाविद एवं लेखक डॉक्टर बीरबल झा ने कहा कि हर शिक्षक को अपने छात्रों को इस तरह से पढ़ाना चाहिए कि वे उस विषय में महारत हासिल कर ले। शिक्षक को अपने  छात्रों को  सिर्फ परीक्षा पास करने के उद्देश्य  से पढ़ाने से हमेशा बचना चाहिए। शिक्षा का मूल उद्देश्य  छात्र -छात्राओं  को  विषय की पूरी जानकारी देना एक  उनका सर्वांगीण विकास करना है। यदि कोई शिक्षक ऐसा नहीं कर पाते हैं तो शिक्षक होने का कोई मतलब नहीं है।

डॉ झा  ने आगे कहा कि दुनिया में शिक्षण कार्य को सबसे पवित्र माना जाता है। “सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन ने कहा है  कि एक इंजीनियर की गलती ईट से दीवार में दब जाती है। एक वकील की गलती फाइल में दब जाती है। एक डॉक्टर की गलती श्मशान में दफ़न हो जाती है। पर एक शिक्षक की गलती ब्रह्माण्ड मैं सदा के लिए टिमटिमाती रहती है।” इसलिए शिक्षक को अपना दायित्व समझना चाहिए। शिक्षकों के  ऊपर  बहुत बड़ी जिम्मेवारी होती उसे हमेशा गंभीरता से समझने की आवश्यकता है। शिक्षक कई पीढ़ियों का मार्ग दर्शन करते हैं।डॉ. झा  ने आगे कहा कि शिक्षक का मार्ग दर्शन किसी के जीवन को बदलकर रख देता है। इसलिए एक शिक्षक से यह अपेक्षा की जाती है कि वह छात्रों को किसी कार्य करने के मूल सिद्धांतों को समझाएं।आज के दौर में शिक्षकों को अपने विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर होने के बारे में  सिखाना चाहिए, जैसा कि कहावत है: “किसी व्यक्ति को एक मछली दे दो और आप उसे एक दिन के लिए भोजन दे दो; किसी व्यक्ति को मछली पकड़ना सिखा दो और आप उसे जीवन भर के लिए भोजन दे दो।”डॉ झा  ने आगे कहा कि एक शिक्षक को अपने छात्रों को प्रत्येक क्षेत्र में स्थापित करने के तरीकों के बारे में बताना चाहिए। एक कहावत के अनुसार, हर काम में तरकीबें होती हैं। छात्रों को पेशेवरकौशल , तकनीक और तरीके सीखने की आवश्यकता होती है जो कार्यों को आसान या अधिक कुशल बनाते हैं।डॉ झा  ने आगे कहा कि अनुभव बहुत मायने रखता है। अनुभव सबसे अच्छा शिक्षक है। यह बताता है कि ज्यादातर ज्ञान शिक्षा या अन्य साधनों के बजाय अनुभव से अर्जित किया जाता है। जो लोग कठिनाइयों के स्कूल या विश्वविद्यालय से गुजरते हैं, वे अधिक परिपक्व दिखते हैं। हर किसी में सुधार की गुंजाइश होती है, चाहे वह मैं हूं या  आप हों या कोई और। हमें खुद को अपडेट और बेहतर बनाते रहना चाहिए। डॉ झा   ने आगे कहा कि  हमें अपने प्रयास में असफलता की स्थिति में उम्मीद नहीं खोनी चाहिए। यह हमें सीखने और अपने काम करने के तरीके में सुधार करने का अवसर देता है।

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