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नोएडा

यमुना नदी में बढ़ते जलस्तर के बाद प्रशासन आपदा स्थिति के निपटने के अलर्ट, डीएम ने की समीक्षा बैठक।

अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट 
गौतमबुध नगर में यमुना ओखला बैराज से प्रवेश करती है आम दिनों में एक नहर के रूप में बहने वाली यमुना नदी में इस समय जलस्तर काफी बढ़ रहा है, जिसका कारण है हरियाणा के यमुना नगर हथिनीकुंड बैराज से एक लाख 16 हजार पानी डिस्चार्ज किया गया है। प्रशासन ने आपदा स्थिति के निपटने के लिए रेड अलर्ट जारी कर आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए है।  प्रशासन ने आपदा स्थिति के निपटने के लिए बाढ़ नियंत्रण चौकियां स्थापित कर दी हैं। साथ ही रेस्क्यू टीम भी लगा दी गई है। वहीं, एनडीआरएफ समेत अन्य एजेंसी को भी अलर्ट रहने को कहा गया है।
 
नोएडा के तट टकराती यमुना नदी की लहरे संकेत दे रही है, की यमुना नदी का जल स्तर बढ़ रहा है। लेकिन ये जल स्तर काफी नीचे है। इसका कारण है कि हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी अभी यहाँ नहीं पहुंचा है. क्योंकि यमुना पहले से उफान पर है, अगले 48 से 72 घंटे तक इसके जलस्तर बढ़ने से खतरा बना हुआ है। यमुना में बढ़ते जलस्तर को देखते सिंचाई विभाग के अधिकारी अलर्ट मोड पर हैं वे लगातार यमुना के जलस्तर के बढ़ने की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. उनका कहना है कि हथिनी कुंड बैराज से जो पानी छोड़ा गया है शाम तक पहुंचने की संभावना है लेकिन उससे पहले ओखला बैराज से पानी छोड़ा गया है. जिसे आप यहां पर बहता हुआ देख रहे हैं. ऐसा ओखला बैराज पर इकट्ठा पानी को कम करने के लिए किया गया है. अभी किसी गांव को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि पानी गांव से दूर है विभाग द्वारा पानी की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और आवश्यक कदम भी उठाए जा रहे हैं बाढ़ आने से नोएडा क्षेत्र  सेक्टर-150, याकूतपुर, कुलेसरा समेत नोएडा, ग्रेटर नोएडा के करीब 52 गांव चपेट में आ सकते हैं। जेवर के 25 गाँव बाढ़ से प्रभावित हो सकते है। जिनमें रहने वाले सवा दो लाख लोग प्रभावित हो सकते है।

 जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। डीएम मेधा रूपम की कलेक्ट्रेट में बाढ़ तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक की है और अधिकारियों को बाढ़ चौकियों को सक्रिय करने तथा वहां पर्याप्त संख्या में ड्यूटी लगाने और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता कराने के निर्देश दिए है.सिंचाई विभाग को कहा गया है कि वह नियमित रूप से नदियों के जलस्तर की निगरानी करें तथा समय-समय पर प्रशासन को अवगत कराएं। बाढ़ से प्रभावित होने वाले ग्रामों के निवासियों को सतर्क रहने और पानी बढ़ने की संभावना के बारे में लगातार जानकारी दी जाए। डीएम ने प्राधिकरणों के अधिकारियों से कहा कि डूब क्षेत्रों में जो गौशालाएं है, उनको लेकर भी वैकल्पिक व्यवस्था रखी जाए, क्योंकि यदि जनपद में बाढ़ की स्थिति बनती है तो वहां से गोवंशों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा जा सके।

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