
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़:हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने आज बुधवार को पंचकूला स्थित पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश में अपराध नियंत्रण की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अपराध के आंकड़ों का विश्लेषण, थाना स्तर पर अपराध की प्रवृत्तियों की पहचान, कानून एवं व्यवस्था की स्थिति से निपटने की तैयारियों तथा अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए।

डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि विभिन्न विभागों के कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों एवं राजनीतिक दलों के धरना-प्रदर्शनों से कई बार कानून एवं व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पुलिस अधीक्षक योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें और निर्धारित एसओपी के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस बल हर स्तर पर आवश्यक संसाधनों एवं उपकरणों से लैस (Well Equipped) रहे। उन्होंने सभी पुलिस अधीक्षकों को जिलेवार धरना-प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं का विश्लेषण कर उनके कारणों की पहचान करने तथा भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए।

डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि अपराध नियंत्रण के लिए सटीक और बेहतर डेटा का होना बेहद जरूरी है। यदि हमारे पास अपराध से संबंधित विस्तृत और विश्वसनीय आंकड़े होंगे तो हम बेहतर रणनीति तैयार कर सकेंगे, जिससे अपराध की रोकथाम में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की कानून एवं व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए हरियाणा पुलिस द्वारा एसओपी तैयार की गई है। सभी अधिकारी इसका गंभीरता से पालन करें और निर्धारित एसओपी के अनुरूप ही कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को हर परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए और उन्हें अपने एक्शन प्लान की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए।

बैठक के दौरान थाना स्तर पर अपराध की स्थिति की समीक्षा की गई। पुलिस महानिरीक्षक, कानून एवं व्यवस्था राकेश आर्य ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से विभिन्न थाना क्षेत्रों में अपराध के बदलते पैटर्न और वृद्धि वाले क्षेत्रों की जानकारी दी। डीजीपी ने निर्देश दिए कि हत्या, डकैती सहित अन्य अपराधों में वृद्धि के कारणों का गहन विश्लेषण किया जाए।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष के पहले दस महीनों में प्रदेश में कुल अपराध में 9.41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, लेकिन थाना स्तर पर अपराध की लगातार समीक्षा और मॉनिटरिंग जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को अपराध की प्रकृति और स्थान के अनुसार पेट्रोलिंग बढ़ाने, सीसीटीवी कैमरे लगवाने तथा अन्य निवारक उपाय अपनाने के निर्देश दिए। साथ ही, अपराध नियंत्रण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय करने की बात कही।

डीजीपी ने 18 वर्ष से कम आयु के गुमशुदा लोगों विशेषकर लड़कियों की गुमशुदगी के मामलों को गंभीरता से लेते हुए ऐसे थाना क्षेत्रों में विशेष टीमें गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नाबालिग बच्चियों सहित गुमशुदा व्यक्तियों,विशेषकर कमजोर वर्गों से संबंधित मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए तथा उनकी शीघ्र तलाश और रिकवरी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय को लेकर अत्यंत गंभीर है और पुलिस अधिकारियों को भी इस दिशा में पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करना चाहिए।सिंघल ने आरजेएसएफ यूनिट द्वारा अपराधियों के डेटा के सत्यापन और डिजिटलीकरण के कार्य की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अपराधियों का एक व्यापक डिजिटल डेटाबेस तैयार होने से उनकी गतिविधियों और मूवमेंट पर प्रभावी निगरानी रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आरजेएसएफ यूनिट द्वारा किया जा रहा अपराधियों के डेटा के डिजिटलीकरण का कार्य जल्द से जल्द पूरा करे जिसके बाद पीओ, बेल जम्परों तथा मोस्ट वांटेड अपराधियों का डेटा वेरीफाई किया जाएगा।अपराध की रोकथाम के लिए डीजीपी ने सभी थानों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने, बिना नंबर प्लेट अथवा हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) के बिना चलने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा रात्रि नाकाबंदी को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अपराधियों की गतिविधियों और उनके मूवमेंट पर नजर रखने के लिए रात्रि नाकाबंदी बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए पुलिस आयुक्त , पुलिस महानिरीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी स्वयं नाका प्वाइंट्स की मॉनिटरिंग करें और अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में प्रभावी नाकाबंदी सुनिश्चित करें।एक्सटॉर्शन कॉल्स के मामलों पर चर्चा करते हुए डीजीपी ने कहा कि ऐसी कॉल प्राप्त होने पर कार्रवाई के लिए हरियाणा पुलिस द्वारा एसओपी निर्धारित की गई है। सभी अधिकारी इसका पालन सुनिश्चित करें और एक्सटॉर्शन कॉल्स से संबंधित डेटा की नियमित मॉनिटरिंग करें। उन्होंने बताया कि अभेद्य ऐप के माध्यम से प्राप्त होने वाली एक्सटॉर्शन कॉल्स से संबंधित जानकारी भी नियमित रूप से जिलों के साथ साझा की जा रही है। संबंधित जिलों को निर्देश दिए गए कि इस डेटा का तकनीकी टीमों के माध्यम से विश्लेषण करवाकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।बैठक में एटीएम चोरी और एटीएम के माध्यम से होने वाले वित्तीय फ्रॉड की रोकथाम को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। डीजीपी ने बताया कि हरियाणा पुलिस द्वारा एटीएम मशीनों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। अब यदि कोई व्यक्ति एटीएम मशीन के साथ छेड़छाड़ करता है अथवा उसे उखाड़ने का प्रयास करता है तो इसका अलर्ट सीधे डायल 112 हेल्पलाइन पर प्राप्त होगा,जिससे पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई कर सकेगी। उन्होंने अधिकारियों को एटीएम चोरी की घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही एटीएम के माध्यम से होने वाले साइबर एवं वित्तीय फ्रॉड की घटनाओं का डेटा विश्लेषण कर प्रभावी रणनीति तैयार करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ अपराधी एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर लोगों के बैंक खातों से पैसे निकाल लेते हैं। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए तकनीकी विश्लेषण और प्रभावी निगरानी के माध्यम से आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सी एस राव, अमिताभ ढिल्लों, एम रविकिरण, पुलिस महानिरीक्षक कानून एवं व्यवस्था राकेश आर्य, नाज़नीन भसीन, पुलिस आयुक्त पंकज नैन सहित कई अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।
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