
अजीत सिन्हा/ नई दिल्ली
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के बरेली में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराज कता हटाओ’ यात्रा को संबोधित किया और कांग्रेस, इंडी गठबंधन और समाजवादी पार्टीपर चुनाव आयोग की साख कमजोर करने का आरोप लगाया। नड्डा ने कहा कि देश में चल रहेमतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थितऔर दोहरे मतदाताओं के नाम हटाकर मतदाता सूची को शुद्ध करना है।

उन्होंने बताया कि10.24 लाख बीएलओ और 12.62 लाख बीएलए की भागीदारी से पुनरीक्षण के बाद 96 करोड़ मतदातादर्ज हुए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने, लोकतंत्र की रक्षाकरने और घुसपैठियों को मताधिकार से बाहर रखने के लिए एसआईआर आवश्यक है। कार्यक्रम मेंउत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष पूर्ण लाल मोदी,राज्य सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना, भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह सहित अन्य नेतागण उपस्थित रहे।

जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि भारत को प्रजातंत्र की जननी और मदरऑफ डेमोक्रेसी कहा जाता है। दशकों की मेहनत के बाद इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने दुनियामें अपना स्थान बनाया है। इसी तरह, हमारा सुप्रीम कोर्ट संवैधानिक संस्थाओं और न्यायपालिकाकी सर्वोच्च संस्था है। वर्षों की मेहनत के बाद उसने भी समाज, देश और दुनिया में अपनास्थान बनाया है। लेकिन कुछ गैर-जिम्मेदाराना पार्टियां, विशेषकर इंडी गठबंधन, कांग्रेसपार्टी और समाजवादी पार्टी, इलेक्शन कमीशन की साख और उसके प्रति लोगों के दिलों में मौजूद विश्वास को तोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

बचपन में कुछ बच्चे पढ़ने में बहुतअच्छे नहीं होते। वे कभी-कभी पास हो जाते हैं तो कहते हैं कि वे बहुत होशियार हैं,लेकिन जब फेल हो जाते हैं तो कहते हैं कि टीचर बेईमान है और उनका विरोधी है। यही स्थितिराहुल गांधी की है। कभी-कभी चुनाव जीत जाते हैं तो कहते हैं कि वे बहुत होशियार हैं,लेकिन अधिकतर चुनाव हारने पर इलेक्शन कमीशन को बेईमान बताते हैं। उन्होंने ऐसी स्थितिखड़ी कर दी है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2024 में गिर के जंगल में महंत हरि दास का एक वोट था। उस एक वोट को डलवाने के लिए इलेक्शन कमीशन के 10 कर्मचारी 10 किलोमीटरपैदल चलकर गए। यह इलेक्शन कमीशन की साख है। इसी तरह, अरुणाचल प्रदेश के मालेगांव में44 वर्षीय व्यक्ति सोकेला तान का वोट डलवाने के लिए इलेक्शन कमीशन के कर्मचारी पहाड़ों पर चढ़कर 44 किलो मीटर दूर गए। इलेक्शन कमीशन ने उस व्यक्ति का वोट भी डलवाया और बैलेटपेपर तथा ईवीएम मशीन के माध्यम से मतदान की व्यवस्था सुनिश्चित की। आप इलेक्शन कमीशन के दरवाजे पर नहीं जाएंगे, बल्कि इलेक्शन कमीशन आपके दरवाजे पर जाएगा। इसी तरह इलेक्शनकमीशन काम कर रहा है। आजकल विपक्ष के लोग लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं। राहुल गांधी बहुत होशियार बनते हैं, उनकी दादी ने इमरजेंसी के दौरान एक लाख लोगों को बिना दलील,बिना अपील और बिना किसी कारण के 22 महीने तक जेल में डाल दिया था। इस दौरान उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई थी। इसके बावजूद राहुल गांधी लोकतंत्र की बात करते हैं और उसकी दुहाई देते हैं! अंग्रेजों ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी इतनी बड़ी संख्या में लोगोंको जेल में नहीं डाला,जितने लोगों को इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी के दौरान जेल में डालाथा। यह कांग्रेस के लोकतंत्र की करतूत है। नड्डा ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने हम लोगों को कितनी बार जेलमें डाला है। इमरजेंसी के दौरान पुलिस ने मुझे दो बार क्लास रूम से पकड़ कर गिरफ्तार किया था। लेकिन राहुल गांधी आज प्रजातंत्र की दुहाई दे रहे हैं। आधी शताब्दी बीत गई,हम प्रजातंत्र की रक्षा करते आ रहे हैं,जबकि ये लोग जनता को भटकाने और भड़काने काकाम कर रहे हैं। बैलेट पेपर से ईवीएम पर कांग्रेस की सरकार ही लेकर आई थी, लेकिन जबये लोग चुनाव हारने लगे तो ईवीएम को बेईमान बताने लगे। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया नेहैकाथॉन आयोजित कर चुनौती दी कि आकर ईवीएम मशीन को गलत साबित करके दिखाएं। राहुल गांधी,कांग्रेस पार्टी और अखिलेश यादव में से कोई भी इस चुनौती को स्वीकार करने नहीं पहुंचा।ये लोग अमीर परिवारों के बच्चे हैं, जिन्होंने कभी कॉलेज में भी ठीक से राजनीति नहींकी। ये वही राजनीति कर रहे हैं, जिसमें पत्थर मारना, वाइस चांसलर और प्रिंसिपल को गालीदेना और फिर भाग जाना शामिल है। आज राहुल गांधी ने भी यही काम अपना लिया है। जब हैकाथॉनआयोजित किया गया, तो ईवीएम के बारे में सवाल उठाना बंद कर दिया गया, जबकि इससे पहलेइन लोगों ने ईवीएम पर सवाल उठाए थे। जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि अभी चार दिन पहले उत्तर प्रदेश औरचार अन्य राज्यों में 28 एमएलसी के चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी की स्थितियह रही कि उत्तर प्रदेश में उसे एक भी सीट नहीं मिली, बिहार में भी वह शून्य पर रही,महाराष्ट्र में बड़ी मुश्किल से एक सीट मिली और कर्नाटक में, जहां उसकी सरकार है, वहांचार में से एक भी सीट नहीं मिली। यह कांग्रेस की स्थिति है, फिर भी ये लोग इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन देश में 12 बार हुआ है। इनमें से 10 बार कांग्रेस पार्टी ने और दो बार एनडीएने कराया। एक बार वर्ष 2004 में श्रद्धेय अटल जी ने और दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह प्रक्रिया कराई जा रही है। वर्ष 2004 के बाद पहलीबार ऐसा हो रहा है। इस प्रक्रिया के तहत 10,24,000 बीएल ओ ने घर-घर जाकर मतदाता सूची में नाम जोड़ने का काम किया है। सभी राजनीतिक दलों के 12 लाख 62 हजार बूथ लेवल एजेंटों(बीएलए) की भागीदारी के साथ मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया। इसके बाद 96 करोड़मतदाता बने हैं। विपक्ष के लोग जनता को बरगलाने का काम कर रहे हैं। वे 13 करोड़ वोटकटने की बात करते हैं, लेकिन ये एएसडीडी श्रेणी के वोट हैं।
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