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चंडीगढ़ फरीदाबाद राष्ट्रीय हरियाणा हाइलाइट्स

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में हरियाणा सरकार की डिजनी लैंड बनाने की तैयारी।

अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट 
चंडीगढ़: हरियाणा की नायब सरकार राज्य को पर्यटन की दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाने की दिशा में विशेष पहल करने जा रही है, जिससे हरियाणा के पर्यटन को उद्योग को न केवल नई पहचान मिलेगी, बल्कि इससे अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इस नई कार्ययोजना के तहत हरियाणा सरकार दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में डिजनी लैंड बनाने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही, राज्य को वैश्विक मंच पर तीर्थाटन के रूप में स्थापित करने के लिए सूरजकुंड में हर वर्ष तीन मेलों का आयोजन करने तथा अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव को ओर बड़े रूप में मनाने के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक सहयोग की अपील की गई है।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इन परियोजनाओं के संबंध में बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय सांस्कृतिक एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री के साथ हरियाणा में पर्यटन को बढ़ावा देने तथा राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने व वैश्विक मानचित्र पर एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के संबंध में विचार-विमर्श किया।नायब सिंह सैनी ने कहा कि डिजनी लैंड हरियाणा, खासकर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए एक बड़ा बदलाव लाने वाला अवसर साबित होगा।

इस डिज्नीलैंड से प्रदेश के साथ-साथ देश को आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक लाभ मिलेंगे। इस परियोजना का उद्देश्य बाजार और कनेक्टिविटी का लाभ उठाकर एक विश्व स्तरीय मनोरंजन केंद्र बनाना है। इस परियोजना से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, बुनियादी ढांचे का विकास होगा और आसपास के क्षेत्रों में भी विकास की दृष्टि से बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा के गुरुग्राम में कई फॉर्च्यून कंपनियों के मुख्यालय हैं और यह राज्य की अर्थव्यवस्था में अधिकतम योगदान देता है। गुरुग्राम की आगामी ग्लोबल सिटी प्रोजेक्ट की स्थापना इस क्षेत्र में एक और उपलिब्ध होगी। इसलिए प्रस्तावित डिजनी लैंड प्रोजेक्ट के लिए गुरुग्राम सबसे आदर्श स्थान होगा। इस परियोजना के लिए पचगांव चौक के पास मानेसर, जिला गुरुग्राम में लगभग 500 एकड़ भूमि को चिन्हित किया है। यह स्थल कुण्डली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे और हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर पर स्थित है। यह परियोजना हरियाणा के आर्थिक विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और साथ में डिजनी लैंड अगर भारत में अपना प्रोजेक्ट स्थापित करता है तो इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक भी भारत में आयेंगे और देश एवं प्रदेश के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा को पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने तथा देश-विदेश के शिल्पकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करने के उद्देश्य से हर वर्ष फरीदाबाद जिले में अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में भारतीय कला, संस्कृति, शिल्प, संगीत और देश-विदेश के व्यंजनों का अनोखा संगम देखने को मिलता है। इस मेले में हर साल देश-विदेश के शिल्पकार ,कलाकार और लोक कलाकार भाग लेते हैं और अपने क्षेत्रीय उत्पादों तथा सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करते हैं। हर बार मेले की की थीम किसी एक राज्य पर आधारित होती है, जिससे उस राज्य की विशेष परंपराएं और लोककला को बढ़ावा मिलता है। सूरजकुंड मेला न केवल भारतीय विविधता का उत्सव है , बल्कि यह पर्यटन को भी बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है।उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेले की प्रसिद्धि को देखते हुए सरकार ने वि चार किया है कि सूरजकुंड में एक दीपावली मेला तथा एक पुस्तक मेले का भी आयोजन किया जाए, जिससे न केवल स्थानीय, राज्य तथा देश-विदेश के शिल्पकारों, कलाकारों और लोक कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर मिलेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा भगवान कृष्ण द्वारा दिए गए कर्म के संदेश को विश्वभर में पहुंचाने के उद्देश्य से हर साल अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिस दौरान सरस मेले सहित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों में अंतर्राष्ट्रीय कलाकार और शिल्पकार बड़ी संख्या में भाग लेते हैं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं।उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव हरियाणा को एक अद्वितीय पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने का एक बड़ा मंच है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की काफी क्षमता है। इस उद्देश्य के लिए पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के सक्रिय सहयोग की आवश्यकता है। इसलिए केंद्र सरकार से अनुरोध है कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव भव्य पैमाने पर आयोजित करने के लिए हरियाणा को वित्तीय सहायता प्रदान की जाए, जिससे हरियाणा राज्य वैश्विक मानचित्र पर एक प्रमुख तीर्थाटन केंद्र के रूप में स्थापित हो सके।

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