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दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय हाइलाइट्स

कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था की खराब स्थिति के लिए मोदी सरकार को घेरा

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली: कांग्रेस ने केंद्रीय बजट से पहले देश में अर्थव्यवस्था की खराब स्थिति के लिए केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि सरकार इस स्थिति को सुधारने के लिए कुछ नहीं कर रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह एवं वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की अध्यक्ष सुप्रिया श्रीनेत व रिसर्च विभाग के चेयरमैन प्रो. राजीव गौड़ा के साथ ‘अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति 2025’ रिपोर्ट जारी की, जिसमें देश में व्याप्त गंभीर आर्थिक परिदृश्य को प्रस्तुत किया गया है।

चिदंबरम ने जोर देकर कहा कि देश में पूरी तरह से आर्थिक मंदी है, नौकरियां नहीं हैं, महंगाई बढ़ रही है, भारी आर्थिक असमानता है और वेतन स्थिर है।लेकिन सरकार अर्थव्यवस्था के बारे में इन सच्चाइयों को छिपा रही है। गिरती आर्थिक वृद्धि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले साल के मुकाबले इसमें दो प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बेरोजगारी की भयावह स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि इसकी दर करीब 40 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र सौंपे जाने पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि नई नौकरियां पैदा नहीं की गई हैं, बल्कि केवल रिक्तियां भरी गई हैं। इसका मतलब नई नौकरियों का सृजन नहीं है। स्नातकों में बेरोजगारी दर करीब 30 प्रतिशत है। चिदंबरम ने कहा कि एक तरफ जहां पिछले चार-पांच सालों से वेतन स्थिर है, वहीं महंगाई लगातार बढ़ रही है। खाद्य, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की महंगाई दर पिछले दो-तीन सालों से दोहरे अंकों में है। देश में 70 प्रतिशत लोग अभी भी 100 से 150 रुपये प्रतिदिन पर गुजारा कर रहे हैं। अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ती जा रही है और सरकार इसे पाटने के लिए कुछ नहीं कर रही है। पिछले छह-सात वर्षों के बजट का हवाला देते हुए पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री ने खुलासा किया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक कल्याण और ग्रामीण विकास पर सरकारी खर्च 2017-18 से साल दर साल गिर रहा है। उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों में प्रमुख कल्याण कार्यक्रमों के लिए आवंटन में भारी गिरावट आई है।
इस अवसर पर बोलते हुए प्रो. राजीव गौड़ा ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा पर बहुत अधिक निवेश करते हैं, लेकिन नौकरियां नहीं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में घटती नौकरियां बढ़ती बेरोज़गारी का एक बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण विकास दर में गिरावट आई है और यह औसतन छह प्रतिशत पर सिमट गई है। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ती जा रही है और लोगों की खाने की थाली महंगी होती जा रही है। वहीं सुप्रिया श्रीनेत ने महंगाई और बेरोजगारी का जिक्र करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा 2022 में 25 प्रतिशत होना था, वह सिर्फ 15 प्रतिशत से थोड़ा सा ऊपर है। नरेंद्र मोदी के शासनकाल में जीडीपी विकास दर महज छह प्रतिशत रही, जो यूपीए के शासनकाल के 7.6 प्रतिशत से बहुत कम है। कॉर्पोरेट टैक्स का संग्रह पहली बार आजाद हिंदुस्तान में आयकर संग्रह से कम है। मोदी सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण का बजट घटा दिया है। देश के 55 प्रतिशत किसान कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। महंगाई से लोग परेशान हैं। डॉलर के मुकाबले रूपये की हालत खराब है। कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी को रुपया 58 पर दिया था, वो 87 पर पहुंच गया है। देश में सारी नीतियां नरेंद्र मोदी के चहेते पूंजीपतियों के लिए बन रही हैं, अडानी ग्रुप पर करीब एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है। देश में लोग बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हैं। लोगों को रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए गोल्ड लोन लेना पड़ रहा है।

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