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अपराध नोएडा

कंप्यूटर डिवाइस से नई चाबी बना, कार चुराने वाले गददू गैंग का पर्दाफाश, सरगना समेत 8 अरेस्ट, दस लग्जरी गाड़ी बरामद

अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट 
नॉएडा: नोएडा कोतवाली सेक्टर 20 और कोतवाली फेज वन की पुलिस ने ऑन डिमांड गाड़ियों की चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गददू गैंग का पर्दाफाश करते हुए गैंग के सरगना समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से दस लग्जरी गाड़ी, गाड़ी की चाबी बनाने वाली इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, कार चोरी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण ,पिस्टल तमंचा कारतूस बरामद किया है। पुलिस की गिरफ्त खड़ा है साकिब उर्फ गद्दू और साथ में खड़ी है कार चोरों की टोली, जिसमें शामिल है मौ. इमरान उर्फ टट्टी,  मोनू उर्फ जमशेद, मौ. फरनाम, राशिद उर्फ काला, मौ. साहिबजादा, रोहित मित्तल,रंजीत सिंह को पुलिस ने सेक्टर-18 से गिरफ्तार किया गया है। ये सभी कितने शातिर अपराधी थे इसका नमूना इन बदमाशों ने एक कार की लॉक को तोड़कर कंप्यूटर डिवाइस के माध्यम से नहीं चाबियां बनाकर मीडिया के सामने प्रदर्शन किया। 

डीसीपी नोएडा हरीश चंद्र ने बताया कि इन बदमाशों के निशाने पर नई-नई लग्जरी गाड़ियां होती थी, जो ये ऑन डिमांड चोरी करते थे, और चोरी की कारों को जिनमें फॉर्च्यूनर को 8-10 लाख रुपये में, स्कॉर्पियो को 5-6 लाख में, क्रेटा को 3-4 लाख में और,  ब्रेजा और स्विफ्ट को 1-2 लाख रुपये में डिमांड के आधार पर उनके फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपने अन्य साथी रोहित मित्तल, रंजीत, बप्पा को बेचकर पंजाब , जयपुर, हैदराबाद जैसे स्थानों पर बेच देते थे। डीसीपी ने बताया कि इस गैंग के सदस्यों का काम बटा हुआ था, मो. फरमान एवं राशिद काला जो कि कारों की चाबी की प्रोग्रामिंग के एक्सपर्ट है, गैंग के अन्य सदस्य साहिबजादा व मोनू उर्फ जमशेद चोरी के दौरान निगरानी करते है ताकी कोई खतरा आने पर साथियों को सतर्क कर सके, एक सदस्य मो. इमरान कार को स्टार्ट रखकर भागने के लिए तैयार रहता, मो. फरमान द्वारा उस कार को टीम के ही एक सदस्य को देकर उस बताए गए स्थान पर मिलने के लिए कहता है, जिसके बाद वह सदस्य कार को लेकर वहां से चला जाता है और बचे हुए सदस्य अन्य कारों को चोरी करने के लिए पुनः निकल जाते, कार चोरी की प्रक्रिया करने में 3-4 मिनट लगते है। इसके बाद एक दिन में कम से कम दो से तीन गाड़ियों को चुरा कर बताए गए स्थान पर आपस में मिलते हैं। जिसके बाद गद्दू गैंग के सदस्य उन गाड़ियों को एक या दो दिन के लिए कहीं खड़ी कर देते हैं । मामला शांत होने पर गाड़ी का नंबर प्लेट को बदल कर दस्तावेज तैयार कर अपने अन्य साथी रोहित मित्तल, रंजीत, बप्पा को बेचकर पंजाब, जयपुर, हैदराबाद जैसे स्थानों पर बेच देते थे। 

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