अजीत सिन्हा / नई दिल्ली
जैसा कि अडानी महाघोटाले से पता चला है, प्रधानमंत्री मोदी की सूट बूट की सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ही अपने पूंजीपति मित्रों को विभिन्न क्षेत्रों में एकाधिकार स्थापित करने में सुनियोजित ढंग से मदद की है। अब हमारे पास नए और विश्वसनीय सबूत हैं कि एकाधिकार के बाद ये पूंजीपति समूह अपने मार्केट पावर का दुरुपयोग करके प्रतिस्पर्धा करने वाली अन्य कंपनियों की तुलना में 10-30% अधिक क़ीमतें वसूल रहे हैं, जिससे देश में महंगाई बढ़ रही है। यह सबूत हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. विरल आचार्य से मिला है, जिन्होंने 2017 से 2019 तक भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के रूप में अपनी सेवा दी है।यह नया प्रमाण कांग्रेस पार्टी के उस दावे का समर्थन करता है कि मोदी सरकार अपने पूंजीपति मित्रों के फ़ायदे के लिए उपभोक्ताओं, छोटे व्यवसायों और यहां तक कि उन बड़े व्यवसायों को भी नुक़सान पहुंचा रही है जो इन एकाधिकार स्थापित कर चुके बिज़नस ग्रुप के साथ प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री अपने पूंजीपति मित्रों को जो फ़ायदा पहुंचाते हैं उसके बदले में उन्हें और BJP को इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए फंडिंग के रूप में इनाम मिलता है सीमेंट, रसायन, पेट्रोल ,निर्माण, दूरसंचार और खुदरा व्यापार सहित 40 क्षेत्रों में एकाधिकार स्थापित कर रहे अडानी ग्रुप समेत पांच प्रमुख समूह महंगाई को बढ़ा रहे हैं। बिग 5 कहलाने वाले ये समूह अब कुल संपत्ति का 18% हिस्सा हैं।डॉ. आचार्य के विश्लेषण के अनुसार, ये तीन चरणों में महंगाई को बढ़ाते हैं।
1) 2015 के बाद से, बिग 5 ने छोटी कंपनियों का अधिग्रहण करके कई नए क्षेत्रों में प्रवेश किया है। साथ ही इन क्षेत्रों में मार्केट शेयर को भी बढ़ाया है।
2) मोदी सरकार ने बिग 5 को तरह-तरह से फ़ायदा पहुंचाया है – परियोजनाओं के आवंटन में उन पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्हें बाज़ार बिगाड़ने वाली मूल्य नीति अपनाने की छूट दी गई, जिससे कि वे वस्तुओं और सेवाओं के मनमाने दाम रखने लगे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से उन्हें बचाने के लिए आयात शुल्क को बढ़ाया गया। अडानी जैसे मामलों में हमने SBI और LIC जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों को भी उन्हें ऋण देने एवं उनकी कंपनियों में निवेश करने के लिए बाध्य होते देखा है ।
3) सरकार द्वारा उनके लिए तैयार किए गए अनुकूल माहौल के कारण बिग 5 को प्रतिस्पर्धा कर रही अन्य कंपनियों की तुलना में अधिक क़ीमत वसूलने की छूट मिल गई है।

उदाहरण के लिए एक ऐसी वस्तु लें जिसके उत्पादन में 100 रुपए का ख़र्च आता है। अन्य कंपनियां उपभोक्ताओं से इस वस्तु के लिए 125 रुपया लेती हैं, जबकि बिग 5 कंपनियां उसी वस्तु के लिए 145 रुपए के क़रीब वसूलती हैं। इसलिए, डॉ. आचार्य ने पाया कि जब एकाधिकार स्थापित कर चुकी कंपनियां किसी क्षेत्र में अपनी बिक्री की हिस्सेदारी 10% तक बढ़ाती हैं, तो हम उस क्षेत्र में मुद्रास्फीति में 2.7% की वृद्धि भी देखते हैं। बढ़ते बाज़ार केंद्रीकरण के परिणामस्वरूप, सभी गुड्स सेक्टर (वस्तु क्षेत्र) का औसत लाभ मार्जिन 2015 के 18% से लगभग दोगुना होकर 2021 में 36% हो गया है। इन बढ़ती क़ीमतों से उपभोक्ताओं को सीधे नुक़सान होता है। उदाहरण के लिए, गुजरात सरकार द्वारा अडानी से ख़रीदी गई एक यूनिट बिजली की क़ीमत 2021 के जनवरी महीने में 2.83 रुपया थी, जो 2022 के दिसंबर में बढ़कर 8.83 रुपए हो गई। अडानी के स्वामित्व वाले अहमदाबाद हवाई अड्डे पर उपयोगकर्ता शुल्क निकट भविष्य में 12 गुना बढ़ने वाला है। अडानी के ही स्वामित्व वाले लखनऊ हवाई अड्डे पर उपयोगकर्ता शुल्क मौजूदा 192 रुपए से 5 गुना बढ़ाने का प्रस्ताव है।एकाधिकार को बढ़ावा देना प्रधानमंत्री की विनाशकारी आर्थिक नीतियों का हिस्सा है, जिनकी मार भारत की जनता पर पड़ती है, जैसे कि ग़लत ढंग से तैयार की गई GST, पेट्रोल और गैस की आसमान छूती क़ीमतें, कृषि एवं सार्वजनिक उपक्रमों का अंधाधुंध निजीकरण। कांग्रेस पार्टी एक ऐेसी अर्थव्यवस्था का समर्थन करती है जिसमें सभी को लाभ हो,निजी उद्यमों को भी। हम ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें बड़े और छोटे व्यवसायों, विशेष रूप से बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा करने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को अनुकूल तथा समान अवसर मिले। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान लोगों की यही मांग थी, जो अडानी महाघोटाले के सामने आने के बाद और भी ज़रूरी हो गई है। राष्ट्रहित में कांग्रेस इन मुद्दों को संसद में, मीडिया में एवं भारत के हर गांव, कस्बे और शहर की सड़कों तथा गलियों में उठाती रहेगी।
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