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फरीदाबाद

फरीदाबाद: राष्ट्रीय लोक अदालत में 59348 केस रखे गए केसों में से 23500 का हुआ निपटारा आपसी सहमति से: सुकिर्ती गोयल

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
फरीदाबाद: हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एवं न्यायमूर्ति पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट चंडीगढ़  अगस्तिन जॉर्ज मसीह  के दिशा निर्देशानुसार हरियाणा प्रांत के प्रत्येक जिले मे राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसी क्रम में जिला फरीदाबाद के सत्र न्यायाधीश एवं चेयरमैन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  वाई एस राठौर की अध्यक्षता एवं निर्देशानुसार मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्रीमती सुकीर्ति एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की देखरेख में आज शनिवार को जिला न्यायिक परिसर सेक्टर-12 में भी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में 14 बेंच लगाए गए थे।

जिनमें नरेंद्र सुरा अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अमृत सिंह चालिया अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, संजय कुमार शर्मा प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट, आशु संजीव अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लेबर कोर्ट इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल,  हरीश गोयल अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी,तैयब हुसैन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, ज्योति ग्रोवर न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, अनुराधा न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, गगनदीप गोयल न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, सुमित तुरकिया न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, गौरंग शर्मा न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी , महेंद्र सिंह सिविल जज सीनियर डिवीजन परमानेंट लोक अदालत पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज, रूपम न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, अमित अरोड़ा प्रेसिडेंट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल फोरम  फरीदाबाद की बेंच बनाई गई थी।इन अदालतों में 59348 केस रखे गए।

जिनमें से कुल 23500 केसों का निपटारा आपसी सहमति से लोक अदालत द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि 05 अरब 09 लाख 92 हजार 324 रुपये की धनराशि विभिन्न केसों में सेटलमेंट की गई है।सीजेएम सुकिर्ती गोयल ने बताया कि जिनमें मोटर व्हीकल दुर्घटना 80, छोटे-मोटे अपराधिक मामले 2745, चेक बाउंस 835, बिजली से संबंधित 1023, समरी चालान  15000, श्रमिक विवाद 03 और 200 वैवाहिक संबंधित, दीवानी 553, बैक रिकवरी 921, रेवेन्यू 2140 का निपटारा आपसी सहमति से किया गया।सुकीर्ति गोयल ने आगे बताया कि लोक अदालत में  केस का फैसला होने पर जिसकी सुप्रीम कोर्ट तक कोई अपील नहीं होती। कोर्ट फीस वापस हो जाती है तथा केस का फैसला हमेशा हमेशा के लिए हो जाता है। जिससे लोगों के पैसे व समय की बचत होती है तथा आपस में प्रेम भाव बना रहता है।

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