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दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय हाइलाइट्स

कांग्रेस और राहुल गांधी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं, लेकिन अपना ट्रैक रिकॉर्ड भूल जाते हैं-पीयूष गोयल

अजीत सिन्हा/ नई दिल्ली 
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने आजमंगलवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में संयुक्त प्रेस वार्ताको संबोधित किया और चुनाव आयोग पर कांग्रेस के आरोपों को दोहरे मापदंड औरसंवैधानिकसंस्थाओं पर दबाव बनाने की राजनीति बताया। गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने चुनाव आयोग को स्वायत्तता दी,जबकि कांग्रेस ने चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक पदों से पुरस्कृत किया। उन्होंनेराहुल गांधी से मतदाता सूची के शुद्धीकरण, एसआईआर, वोट चोरी के प्रमाण और कांग्रेसके विरोध को लेकर सवाल पूछे। श्री सिंह ने महिला पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार औरप्रदर्शन की आलोचना करते हुए कांग्रेस से संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करने कीमांग की।पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी चुनाव आयोग कीनिष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं, लेकिन अपना ट्रैक रिकॉर्ड भूल जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  के नेतृत्व में एनडीए ने चुनाव आयोग को पूर्णस्वायत्तता दी है और किसी चुनाव आयुक्त को राजनीतिक लाभ नहीं दिया।

इसके उलट,कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में एक मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनाव लड़वाया, एक कोकैबिनेट मंत्री बनाया, दो को राज्यपाल बनाया और मुख्य चुनाव आयुक्त की शिकायत केबावजूद कांग्रेस के एजेंट के रूप में काम करने वाले एक कमिश्नर को पद से नहींहटाया। कांग्रेस ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषन को 1999 में श्रीलालकृष्ण आडवाणी जी के खिलाफ चुनाव लड़वाकर एक तरह से पुरस्कृत किया। यह इस बात कास्पष्ट प्रमाण है कि कांग्रेस ने चुनाव आयुक्तों के पद की गरिमा गिराकर उन्हेंराजनीतिक पदों से पुरस्कृत किया और सौदेबाजी की।केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि 1985 में मुख्य चुनाव आयुक्तआर. के. त्रिवेदी के रिटायर होने के दो महीने बाद ही राजीव गांधी सरकार ने उन्हेंगुजरात का राज्यपाल बना दिया। 2005 में सोनिया गांधी के हस्तक्षेप से नवीन चावलाचुनाव आयुक्त बने। वर्ष 2009 में मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने नवीनचावला पर कांग्रेस के पक्ष में काम करने का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने कीसिफारिश की थी। लेकिन मनमोहन सिंह सरकार ने इस सिफारिश को नजरअंदाज कर दिया औरनवीन चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया। यह कांग्रेस के प्रति उनकी निष्ठा काइनाम था। यह ट्रैक रिकॉर्ड चुनाव अधिकारियों तक भी फैला है।

केरलम के चीफ इलेक्शनऑफिसर टीकाराम मीणा को बाद में कांग्रेस की राजस्थान मेनिफेस्टो टीम में शामिलकिया गया। मई 2026 में केरल चुनाव के तुरंत बाद मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन नेइलेक्शन ऑफिसर रतन यू. केलकर को अपना सचिव बना लिया। कांग्रेस ने हमेशा चुनावअधिकारियों का दुरुपयोग कर उन्हें पद बांटे। इसके विपरीत,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने 2023 में नया कानून लाकर चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष को शामिल किया,जिससे अब प्रधान मंत्री और नेता प्रतिपक्ष साथ मिलकरचुनाव आयुक्त तय करते हैं।गोयल ने कहा कि हम राहुल गांधी से 10 प्रश्न पूछना चाहते हैं।हालांकि, बेबुनियाद आरोप लगाकर भाग जाने की राहुल गांधी की ‘शूट एंड स्कूट’ नीतिको देखते हुए लगता नहीं कि वे एक भी सवाल का जवाब देंगे। फिर भी, हम राहुल गांधीको चुनौती देते हैं कि वे सामने आकर इन 10 सवालों के जवाब दें।पहला सवाल: राहुल गांधी चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप तो लगाते हैं, लेकिन बार-बारमांगने पर भी वे कोई शपथपत्र (एफिडेविट) या साक्ष्य पेश कर अपनी जिम्मेदारी क्योंनहीं निभाते?दूसरा सवाल: यदि एसआईआर इतनी ही गंभीर समस्या थी, तो बिहार, तमिलनाडु और पश्चिम बंगालमें इस प्रक्रिया के दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी चुप क्यों थे?तीसरा सवाल: जब कांग्रेस के ही कई वरिष्ठ नेताओं ने माना है कि मतदाता सूची में लाखोंडुप्लीकेट और मृत व्यक्तियों के नाम हैं, तो चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर के जरिएसूची का शुद्धीकरण किए जाने पर कांग्रेस इसका विरोध क्यों कर रही है?चौथा सवाल: जिन चुनाव प्रक्रियाओं की तारीफ आंध्र प्रदेश में अभिषेक मनु सिंघवी,राजस्थान में अशोक गहलोत , सचिन पायलट और सी. पी. जोशी तथा केरल में शशि थरूर, रमेशचेन्निथला और मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन कर चुके हैं, अब वही नेता ममता बनर्जी केसाथ मिलकर उसी चुनाव आयोग पर बेबुनियाद आरोप क्यों लगा रहे हैं?पांचवां सवाल: यदि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है और चुनावों में धांधली होती है, तोकर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, केरल, झारखंड और तमिलनाडु में सत्ता में बैठेकांग्रेस और उसके गठबंधन के सभी छह मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा क्यों नहीं देते?छठा सवाल: क्या कांग्रेस की यह दोहरी मानसिकता नहीं है कि चुनाव जीतने पर उन्हेंप्रक्रिया निष्पक्ष लगती है, लेकिन हारने पर धांधली का बहाना बनाने लगते हैं?सातवां सवाल: राहुल गांधी और उनके साथियों द्वारा विरोध प्रदर्शन कवर कर रही एक तीनमहीने की गर्भवती महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार क्यों कियागया?आठवां सवाल: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ने और उन पर आरोप लगानेके बाद,अब चुनाव हारते ही राहुल गांधी उनके साथ मिलकर चुनाव आयोग को दोष क्यों देरहे हैं?नौवां सवाल: जब सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है, तोन्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा करने के बजाय कांग्रेस सड़कों पर उतरकर अराजकता क्योंफैला रही है?दसवां सवाल: यदि वोट चोरी के ठोस प्रमाण हैं, तो कांग्रेस उन्हें अदालत में सही तरीकेसे क्यों नहीं रखती, और उनकी सुप्रीम कोर्ट की याचिका में 14 कमियां क्यों पाईगईं?पीयूष गोयल ने कहा कि झूठ और अराजकता की राजनीति करने वाले राहुलगांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का भविष्य अंधकारमय है। कांग्रेस नेता अदालत मेंठीक से याचिका भी दाखिल नहीं कर पा रहे हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे का पहचान पत्रअस्पष्ट है, 220 रुपये की कोर्ट फीस सही से जमा नहीं की गई और दस्तावेज अधूरे हैं।ऐसा नेतृत्व 140 करोड़ लोगों की अपेक्षाएं कैसे पूरी कर सकता है?राजीव रंजन सिंह ने कहा कि राहुल गांधी के पास इन सवालों का जवाब नहींहोगा। वे परिवार को सर्वोपर मानकर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर रहे हैं औरदबाव बनाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सामने अभूतपूर्व प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  के शासन में दबाव की राजनीति काम नहींकरेगी, जबकि राहुल गांधी अपने प्रति वफादार संस्थाएं चाहते हैं। कांग्रेस केशासनकाल में ‘प्रतिबद्ध संस्थाओं’ के उदाहरण के तौर पर बहारुल इस्लाम का उल्लेखकिया जाता है, जो कांग्रेस कार्यकर्ता से न्यायाधीश और फिर सांसद बने। इसी तरह,रंगनाथ मिश्रा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कांग्रेस सांसद बने। राहुल गांधीअपनी दादी की तरह सत्ता पाने के लिए अराजकता फैला रहे हैं और देश को 1974-75 केआपातकाल वाले दौर में ले जाना चाहते हैं। बिहार में राहुल गांधी की यात्रा के दौरानदरभंगा में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की स्वर्गीय माता जी कोगालियां दी गईं, जिसका जवाब जनता ने कांग्रेस की सीटें 19 से घटाकर 6 करके दिया।उन्होंने 1977 में इंदिरा गांधी बुरी तरह चुनाव हारी थीं और कांग्रेस कई राज्योंमें सिकुड़ रही है।  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के शासन में किसीको भी सिर्फ वफादारी के कारण संवैधानिक पद नहीं मिलता, जबकि कांग्रेस के समय ऐसाहोता था। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशु पालन एवं डेयरी और पंचायती राज मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी के अराजक कृत्य  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रप्रेम का मुकाबला नहीं कर सकते। राहुल गांधी का यह ख्वाब केवल मुंगेरीलालका हसीन सपना बनकर रह जाएगा। सेवाभाव के कारण ही जनता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तीसरी बार चुना है। महिला पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार औरअराजकता फैलाने वाले कृत्य लोकतंत्र विरोधी हैं। राहुल गांधी को आत्मचिंतन करसकारात्मक सोच अपनानी चाहिए। राहुल गांधी चुनाव हारने पर ईवीएम हैक होने का आरोपलगाते हैं, लेकिन चुनाव आयोग की चुनौती पर उसे साबित नहीं करते। राष्ट्रपति केप्रमाण की बात पर उन्होंने कोई सबूत नहीं दिया और राफेल मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर झूठा आरोप लगाकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामादेकर माफी मांगनी पड़ी थी। राहुल गांधी को श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी और लालकृष्ण आडवाणी से सीख लेनी चाहिए,जिन्होंने विपक्ष में रहकर कभी अराजकतानहीं फैलाई। कांग्रेस को अराजकता फैलाने से बचना चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं कोस्वतंत्र रूप से काम करने देना चाहिए। ये संस्थाएं संविधान की रक्षा और देश के हितमें काम कर रही हैं। कांग्रेस को इन संस्थाओं को कलंकित करने या उन पर दबाव बनानेका प्रयास नहीं करना चाहिए।

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