अजीत सिन्हा/ नई दिल्ली
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर विभिन्न बिल्डरों के विरुद्ध 5 नए आपराधिक मामले दर्ज किए हैं, जिनमें बेंगलुरु और मुंबई में परियोजनाओं के लिए ओजोन समूह और उससे संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध 4 मामले तथा बेंगलुरु परियोजना के लिए एम/एस विवांसा बालसम और विभिन्न वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और वित्तीय संस्थान के अधिकारियों की ओर से आपराधिक कदाचार के अपराधों के लिए 01 मामला शामिल है।

आज, गुरुवार को, इन 5 मामलों के संबंध में बेंगलुरु,मुंबई और पुणे के 12 स्थानों पर तलाशी ली गई। ये 5 मामले बेंगलुरु और मुंबई के बिल्डरों के विरुद्ध कथित रूप से बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के बीच मिलीभगत के कारण दर्ज किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप निर्दोष गृह खरीदारों के साथ धोखाधड़ी और ठगी हुई।काफी संख्या में घर खरीदारों ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है और बिल्डरों की धोखाधड़ी पूर्ण गतिविधियों के कारण अपने जीवन पर कई वर्षों से पड़ रहे प्रभाव के संबंध में राहत की प्रार्थना की है।सीबीआई की कार्रवाई का उद्देश्य कथित धन के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं और आवासीय रियल एस्टेट क्षेत्र में धोखाधड़ीपूर्ण प्रथाओं से जुड़ी बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र करना है। तलाशी के परिणाम स्वरूप आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य सामग्री जब्त की गई है, जिनकी जांच की जा रही है। यह स्मरण किया जा सकता है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में सीबीआई ने इससे पहले भारत भर में विभिन्न बिल्डरों के विरुद्ध कुल 50 मामले दर्ज किए थे। इस अभियान के साथ, सीबीआई ने अब तक सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों पर कुल 55 मामले दर्ज किए हैं। सीबीआई आर्थिक अपराधों से संबंधित मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए त्वरित और निष्पक्ष जांच करने तथा यह सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है कि कानूनों और दिशानिर्देशों का उल्लंघन कर निर्दोष घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी करने वालों को न्याय के कटघरे में लाया जाए।
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