
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद: हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि हमारी पूजा-पद्धतियां, भाषाएं, वेशभूषाएं और परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारी राष्ट्रीय पहचान एक है—हम सभी भारतीय हैं। भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना इस विविधता को एकता के सूत्र में पिरोती है।गोयल रविवार को जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय,वाईएमसीए,फरीदाबाद के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित ‘राष्ट्र प्रथम संवाद’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन वंदे सरदार एकता पदयात्रा आयोजन समिति एवं सशक्त युवा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में वतनपरस्त शहीद राजा हसन खां मेवाती के 500वें बलिदान वर्ष के उपलक्ष्य में किया गया।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि युवाओं को इतिहास के राष्ट्र नायकों से प्रेरणा लेकर शिक्षा, सेवा, अनुशासन और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’, ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ तथा ‘विकसित भारत’ का संकल्प ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को आगे बढ़ा रहा है।मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू ने विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं है। राष्ट्र हमारी संस्कृति, सभ्यता, इतिहास, संविधान और करोड़ों देशवासियों की सामूहिक चेतना है। प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।मेवात अध्ययन केंद्र के संरक्षक श्याम सुंदर ने मेवात की साझी सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मेवात की सामाजिक परंपराओं में आज भी भारतीय संस्कृति की गहरी छाप दिखाई देती है। समय के साथ मत-मजहब में परिवर्तन हुआ, लेकिन यहां के रीति-रिवाजों और सामाजिक संस्कारों में ‘भात’ और ‘चाक पूजा’ जैसी अनेक प्राचीन परंपराएं आज भी जीवित हैं। यही मेवात की समन्वयकारी संस्कृति और साझा विरासत की पहचान है।कार्यक्रम अध्यक्ष मुफ्ती मुस्तजाब उद्दीन मजाहिरी ने कहा कि भारत ने हमें पहचान, अधिकार और आगे बढ़ने के अवसर दिए हैं। इसलिए राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना भी हमारी जिम्मेदारी है। देश की एकता को कमजोर करने वाली जातिवाद, सांप्रदायिकता, क्षेत्रवाद और कट्टरता जैसी प्रवृत्तियों से हमें सावधान रहना चाहिए।
मौलाना आजाद शिक्षा संस्थान, भारत सरकार के पूर्व सदस्य अली रजा जैदी ने भी राष्ट्र की एकता, सामाजिक सद्भाव और शिक्षा के महत्व पर अपने विचार रखे।मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक मुकेश वशिष्ठ ने कार्यक्रम की संकल्पना प्रस्तुत करते हुए कहा कि मेवात के वीर राजा हसन खां मेवाती ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के अमर प्रतीक हैं। उन्होंने विदेशी आक्रांता के सामने झुकने के बजाय मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान देना स्वीकार किया। उनका जीवन संदेश देता है कि वतन की रक्षा मजहब, जाति और क्षेत्र से ऊपर होती है।उन्होंने कहा, “देश तभी आगे बढ़ेगा, जब प्रत्येक नागरिक कहेगा—पहले देश, फिर समाज और उसके बाद स्वयं।” हमें देश की एकता और अखंडता की रक्षा करने तथा नफरत के स्थान पर सद्भाव, भाईचारे और आपसी विश्वास को बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।कार्यक्रम के दौरान राजा हसन खां मेवाती के जीवन, शौर्य और बलिदान पर आधारित विशेष वीडियो का लोकार्पण एवं प्रदर्शन किया गया। ‘राष्ट्र प्रथम’ स्मारिका का भी विमोचन हुआ। कार्यक्रम के संयोजक कमाल हुसैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि मंच संचालन राम भारद्वाज ने किया।इस अवसर पर अजय शर्मा, मौलाना जमालुद्दीन, रमन सूद, सेक्टर-6 ईदगाह के मोहम्मद आबिद, इम्तियाज प्रधान, शफीक प्रधान बड़खल, वंदे सरदार एकता पदयात्रा आयोजन समिति के महासचिव मोहम्मद साजिद, अंजुम इस्लाम, असलम गोरवाल, नासिर कुरैशी, मास्टर रफीक अल्वी, एडवोकेट अमरदीप सिंह, मोहन शर्मा, मास्टर नेत्रपाल, नियाज, आकाश नागर, रामकिशन गोला और घनश्याम वत्स सहित अनेक शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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