अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:त्योहारी सीजन से ठीक पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को कांग्रेस ने 36,000 करोड़ रुपये का घोटाला बताते हुए कहा है कि मोदी सरकार देश की जनता को खुलेआम काला बाजारियों और मुनाफाखोरों से लुटवा रही है। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि देश में चीनी की कीमतें 45 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 70 से 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने इसे आम जनता की जेब पर डाका करार दिया और कहा कि सरकार द्वारा त्योहारों की मिठास पर महंगाई का कड़वा वार किया गया है। इस दौरान उनके साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक अभय दुबे भी मौजूद थे।

कांग्रेस महासचिव ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 का ओपनिंग शुगर स्टॉक 50 लाख टन है,जो 2024-25 के 80 लाख टन के मुकाबले काफी कम है। इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन के अनुसार 2025-26 में चीनी उत्पादन 275 लाख टन हुआ, जबकि सरकार 343 लाख टन उत्पादन का झूठा दावा करती रही। उन्होंने कहा कि अप्रैल के अंत में ही सरकार को देश में चीनी की कमी का अंदेशा हो गया था, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। यानी जिसके पास भी चीनी का स्टॉक है, उसका स्टॉक बगैर कुछ किए 45 रुपये से 75 रुपये प्रति किलो का हो जाएगा। सुरजेवाला ने कहा कि जब अगस्त में त्योहारों का दौर शुरू हुआ और कीमतें आसमान छूने लगीं, तब जाकर सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि ब्राजील से समुद्री रास्ते से आने वाली इस कच्ची चीनी को रिफाइन होकर बाजार तक पहुंचने में नवंबर के अंत तक का समय लगेगा, तब तक सावन, रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों का सीजन समाप्त हो चुका होगा। कांग्रेस महासचिव के अनुसार, देश में अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारों के चार महीनों में चीनी की औसतन खपत 120 लाख टन होती है। चीनी की कीमतों में लगभग 30 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी के कारण इन चार महीनों में भारतीय नागरिकों को कुल 36,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त चपत लगेगी। इसका सीधा फायदा मुनाफाखोरों और कालाबाजारियों को मिल रहा है। उन्होंने इसे सत्ता की सांठगांठ का बड़ा उदाहरण बताया।सुरजेवाला ने ई-20 नीति पर भी सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच एथेनॉल उत्पादन के लिए 32 प्रतिशत शुगरकेन कॉम्प्लेक्स का इस्तेमाल किया गया, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए बाजार में उपलब्ध चीनी की मात्रा में भारी कमी आई और दाम बढ़ गए। जबकि दूसरी तरफ ई-20 से जनता के वाहन खराब हो रहे हैं। कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान राशन की दुकानों के माध्यम से 40 करोड़ लोगों को 13.50 रुपये प्रति किलो के रियायती दाम पर प्रति व्यक्ति 500 ग्राम चीनी हर माह दी जाती थी और सरकार इस पर 18.50 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी वहन करती थी। वर्तमान मोदी सरकार ने 2017 में इस योजना को ही बंद कर दिया।सुरजेवाला ने एनडीए के नेताओं के बयानों पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और बिहार के मंत्री श्रवण कुमार महंगाई की मार को मास्टरस्ट्रोक बताते हुए जनता को ज्ञान दे रहे हैं कि डायबिटीज भगाने के लिए चीनी महंगी कर दी गई व उसे पेट्रोल में मिला दिया गया। इस दौरान कांग्रेस महासचिव ने चीनी मिलों की बदइंतजामियों के चलते गन्ने के उत्पादन में कमी को लेकर भी भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि चीनी मिलों द्वारा निश्चित समय पर पर्ची न देना, पेराई के लिए लंबी कतारें और भुगतान में महीनों की देरी के चलते किसान गन्ने की खेती छोड़ रहे हैं। चीनी मिलों की आर्थिक हालत खस्ता है। उन्होंने सवाल किया कि खून-पसीने की मेहनत के बाद भी किसान को सिर्फ घटती पैदावार और भुगतान के लिए मिलों के धक्के ही मिलने हैं, तो वह गन्ना क्यों उगाएगा?
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