
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए लाया गया लोक परीक्षा संशोधन विधेयक अभी भी अधूरा है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था का अब भी अभाव है। राज्यसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान बोलते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने मांग की कि कानूनी रूप से सभी परीक्षाओं के लिए समयबद्ध वार्षिक कैलेंडर बनाया जाए,ताकि सरकार समय सीमा के प्रति जवाबदेह हो। छात्रों को हर साल अनिश्चितता और देरी का सामना नहीं करना चाहिए। छात्रों पर हुई बर्बर कार्रवाई की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक उच्च-स्तरीय समिति से स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आए और जवाबदेही तय हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सभी सरकारी रिक्त पदों को तुरंत भरा जाए।उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार संसद के सामने ‘नेशनल यूथ एंप्लॉयमेंट स्ट्रैटेजी’ पेश करे। इसमें स्पष्ट किया जाए कि देश में कारोबारी माहौल को बेहतर बनाते हुए रोजगार पैदा करने वाले निवेश कैसे लाए जाएंगे।
खरगे ने मोदी सरकार को घेरते हुए सवाल किया कि दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल की इजाजत किसने दी? सादे कपड़ों में छात्रों को पीटने वाले लोग कौन थे? दिल्ली पुलिस किसके अधीन है? आरएएफ किसके आदेश पर काम करती है? इस पूरे घटनाक्रम का सर्वोच्च सूत्रधार कौन था? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश इस बर्बरता पर जवाब चाहता है। यदि गृह मंत्री जवाब नहीं दे सकते तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए, अन्यथा प्रधानमंत्री उन्हें तुरंत पद से हटाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों पर बर्बरता के लिए गृहमंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं। उन्होंने बिहार में छात्रों पर एके-47 से गोलियां चलाए जाने का भी उल्लेख किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि अमित शाह बंद कमरे में बैठकर उनकी बातें सुन रहे होंगे, लेकिन वे बहुत दिनों तक बंद कमरे में छिप नहीं सकते, जनता उन्हें खींचकर बाहर निकालेगी। खरगे ने इस्तीफा देने के बाद संसद परिसर में सत्ता पक्ष द्वारा धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत की भी कड़ी आलोचना की। खरगे ने कहा कि 2024 में विपक्ष द्वारा दिए गए ठोस सुझावों को दरकिनार कर चुनाव नजदीक देख मोदी सरकार द्वारा जल्दबाजी में लोक परीक्षा कानून बनाया गया था। उस समय राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान लगातार पेपर लीक और युवाओं के भविष्य का मुद्दा उठा रहे थे। इसीलिए सरकार व्यवस्था को सुधारने की बजाय जल्दबाजी में ऐसा कानून लाई, जिसे दो साल में ही संशोधित करना पड़ रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले एक दशक में 152 से अधिक पेपर लीक हुए, लेकिन किसी भी बड़े आरोपी को सजा नहीं हुई। उन्होंने बताया कि 2024 के नीट पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी को क्लीन चिट मिल गई, जबकि नीट 2026 पेपर लीक के मामले में दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहली ही सुनवाई में सीबीआई के वकील पेश नहीं हुए। उन्होंने कहा कि एक मंत्री के इस्तीफे से शिक्षा व्यवस्था नहीं बदलेगी। अगर संस्थान वही रहेंगे, एनटीए और परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव नहीं होगा तथा जवाबदेही तय नहीं होगी तो कुछ महीनों बाद कोई और पेपर लीक हो जाएगा।कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कड़ी मेहनत और पढ़ाई पर भारी-भरकम खर्च करने के बावजूद बार-बार टलती परीक्षाओं, लटकते नतीजों व लगातार पेपर लीक ने देश के युवाओं को गहरे मानसिक तनाव में धकेल दिया है। वर्षों तक भर्तियां अटकी रहती हैं और कई उम्मीदवारों की उम्र सीमा निकल जाती है। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में करीब सवा लाख छात्रों ने आत्महत्या की है।उन्होंने हाल ही में हुई री-नीट परीक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि कम समय में दोबारा परीक्षा से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का भारी बोझ पड़ता है। खरगे ने देश में बढ़ती बेरोजगारी का जिक्र करते हुए कहा कि देश में लगभग 10 लाख शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। देश में कुल 30 लाख से अधिक सरकारी पद खाली हैं, फिर भी सरकार उन्हें नहीं भर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जहां कोठारी आयोग की सिफारिश के अनुसार शिक्षा पर जीडीपी का छह प्रतिशत खर्च होना चाहिए था, वहीं वर्तमान सरकार सिर्फ तीन प्रतिशत ही खर्च कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि मोदी सरकार शिक्षण संस्थानों में आरएसएस से जुड़े लोगों को नियुक्त कर रही है। विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर के पद सिर्फ आरएसएस से जुड़े लोगों को दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका नुकसान देश की उच्च शिक्षा और पूरे ज्ञान तंत्र को हो रहा है।
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